मुंगेर
योगगुरु स्वामी संतोषानंद महाराज को सोमवार को सदर प्रखंड के शीतलपुर गांव स्थित रामधाम आश्रम का महंत बनाया गया. देश के विभिन्न भागों से पधारे साधु-संत, महात्माओं ने शीतलपुर आश्रम पहुंच कर पूरे विधि-विधान एवं काशी के विद्वान आचार्यों के पावन नेतृत्व में धार्मिक कर्मकाडों द्वारा उन्हें महंत घोषित किया.साधु-संतो ने कहा कि मनुष्य को सोच-समझकर कर्म करने चाहिए. क्योंकि कर्म का फल अवश्य ही मिलता है. किसी को न तो कष्ट देना चाहिए, न ही अपमानित करना चाहिए. क्योंकि इस जगत में कर्मफल सुनिश्चित है. उन्होंने कहा क सनातन धर्म ( हिंदु धर्म ) दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म है, जिसका अर्थ है ””शाश्वत धर्म”” या ””सदा रहने वाला””. जिसका न कोई आदि है न अंत. यह किसी एक व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं, बल्कि हजारों सालों से विकसित एक जीवन पद्धति है जो वेदों, उपनिषदों और अन्य शास्त्रों पर आधारित है. जिसमें प्रकृति और ब्रह्मांड के नियमों का पालन करना सिखाया जाता है. यह भारतीय उपमहाद्वीप से उत्पन्न हुआ है. मौके पर स्वामी यमुना दास, रत्नेश्वरानंद, अशोकानंद गिरी, गरीब दास, प्रेमाचार्य पीतांबर, रक्तांबर, डॉ संजय शास्त्री, भानुशंकर व्यास, दिवाकर सिंह, परशुराम सिंह सहित संत-महात्मा व श्रद्धालु उपस्थित थे.
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