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वर्ष 2024 में एक भी नहीं हुई सीनेट व सिंडिकेट की बैठक, कई महत्वपूर्ण मामले लंबित

Updated at : 25 Oct 2024 6:51 PM (IST)
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मुंगेर विश्वविद्यालय अपने सक्षम प्राधिकारों सिंडिकेट व सीनेट की बैठक को लेकर पूरी तरह उदासीन है

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मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय अपने सक्षम प्राधिकारों सिंडिकेट व सीनेट की बैठक को लेकर पूरी तरह उदासीन है. इस कारण शिक्षकों के लीयन लीव, नये शिक्षकों के नियुक्ति के अनुमोदन सहित शिक्षक व कर्मियों के अवकाश व अन्य कई मामलों की सूची दिनोंदिन लंबी होती जा रही है. हद तो यह कि एमयू के सक्षम प्राधिकार सिंडिकेट की बैठक तो एक साल में 12 बार होनी थी, लेकिन अबतक एक भी सिंडिकेट की बैठक नहीं हुई है. हालांकि 3 अगस्त 2024 को एमयू में सिंडिकेट की बैठक हुई, लेकिन उसमें केवल एक सूची एजेंडा शिक्षकों की प्रमोशन प्रक्रिया ही रही.

6 नवंबर 2023 को हुई थी सिंडिकेट की आखिरी बैठक

सरकार द्वारा विश्वविद्यालय के कार्यों की मॉनिटरिंग और इसके अनुमोदन को लेकर सिंडिकेट और सीनेट जैसे सक्षम प्राधिकारियों को बनाया गया है. नियमानुसार विश्वविद्यालय में एक साल में सिंडिकेट की 12 बैठक होनी है. ताकि विश्वविद्यालय अपने कार्यों को सक्षम प्राधिकार से अनुमोदन प्राप्त कर सरकार को स्वीकृति के लिये भेज सके, लेकिन एमयू प्रशासन अपने सक्षम प्राधिकारियों को ही पूरी तरह नजरअंदाज कर चुका है. इस कारण ही 2024 में अबतक सिंडिकेट की एक भी बैठक नहीं हो पायी है. जबकि विश्वविद्यालय में सिंडिकेट की आखिरी बैठक 6 नवंबर 2024 को हुई थी. हालांकि 3 अगस्त 2024 को सिंडिकेट की बैठक पूर्व कुलपति प्रो. श्यामा राय की अध्यक्षता में हुई, लेकिन इस बैठक का आयोजन ही एकमात्र शिक्षकों के प्रमोशन को अनुमोदन देने के लिये किया गया था.

सीनेट बैठक का तो नहीं दिखा नामोनिशान

किसी भी विश्वविद्यालय में प्रत्येक साल वित्तीय बजट का अनुमोदन सीनेट में किया जाता है. जिसके लिये प्रत्येक साल नये वित्तीय वर्ष से पहले सभी विश्वविद्यालय में सीनेट की बैठक आयोजित की जाती है, लेकिन एमयू में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिये सीनेट बैठक को तो अबतक नामोनिशान तक नहीं दिख रहा. हद तो यह रही कि पूर्व कुलपति के समय सीनेट बैठक को लेकर कई बार फाइलें बढ़ी, लेकिन मामला शिक्षक प्रमोशन के बीच दब कर रह गया. वैसे तो एमयू के 6 सालों के कार्यकाल में अबतक 6 सीनेट बैठक होना था, लेकिन एमयू में अबतक पांच सीनेट बैठक ही हो पाया है. हालांकि नवंबर में हुए एकडमिक सीनेट में खुद कुलाधिपति के शामिल होने से लगा था कि बजट सीनेट में कुलाधिपति विश्वविद्यालय के वित्तीय मामलों से अवगत हो पायेंगे, लेकिन एमयू प्रशासन सीनेट बैठक को लेकर ही पूरी तरह लापरवाह बना रहा.

कैग द्वारा भी किया गया है ऑब्जेक्शन

हद तो यह है कि एमयू के कार्य प्रणाली को लेकर ऑडिट के दौरान भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) द्वारा कुल 40 ऑब्जेक्शन विश्वविद्यालय को दिया गया है. इसमें एक ऑब्जेशन विश्वविद्यालय के सक्षम प्राधिकार सिंडिकेट और सीनेट बैठक के ससमय आयोजन नहीं होने को लेकर भी है. कैग द्वारा पांच सालों में 60 सिंडिकेट बैठक की जगह मात्र 12 सिंडिकेट बैठक होने पर आपत्ति दर्ज की गयी है. हालांकि एमयू प्रशासन अबतक कैग के कई आपत्तियों का जवाब तक नहीं दे पाया है.

कहते हैं कुलसचिव

कुलसचिव कर्नल विजय कुमार ठाकुर ने बताया कि पूर्व कुलपति के समय सिंडिकेट व सीनेट की बैठक को लेकर कई बार फाइलें बढ़ायी गयी थी, लेकिन कुलपति की स्वीकृति नहीं मिल पाने के कारण बैठक नहीं हो पायी. वहीं बाद में राजभवन द्वारा भी कुलपति के शक्तियों को सीमित कर दिया गया. इस कारण बैठक का आयोजन नहीं हो पाया.

सिंडिकेट बैठक की आस में कई कार्य पेडिंग

एचएस कॉलेज हवेली खड़गपुर के फिलॉस्फी के सहायक प्राध्यापक डॉ सत्यजीत पाल के स्टडी लीव को लेकर लीयन की स्वीकृति अबतक नहीं मिल पायी है. इस कारण शिक्षक आवेदन करने के बाद अनुपस्थित हो रहे हैं.

– एचएस कॉलेज, हवेली खगड़पुर के ही इकोनॉमिक्स के सहायक प्राध्यापक डॉ चंदनचंद्र चुन्ना द्वारा लीयन के लिये आवेदन किया गया है. जिसे सिंडिकेट बैठक नहीं होने के कारण अबतक स्वीकृति नहीं मिल पायी है.- आरडी कॉलेज, शेखपुरा की साइकोलॉजी की सहायक प्राध्यापिका डॉ रूबिका अंसारी लीयन पर है. जिसका एक साल भी पूरा होने वाला है, लेकिन सिंडिकेट बैठक नहीं होने के कारण अबतक उनके लीयन की स्वीकृति नहीं मिल पायी है.- आरडी एंड डीजे कॉलेज के एक कर्मी रंधीर कुमार द्वारा वीआरएस के लिये आवेदन दिया गया है, लेकिन सिंडिकेट बैठक नहीं हो पाने के कारण उनके आवेदन को अबतक स्वीकृति नहीं मिल पायी है.- सिंडिकेट बैठक नहीं होने के कारण अबतक एमयू में योगदान देने वाले बीपीएससी के नये शिक्षकों का अनुमोदन नहीं हो पाया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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