मुंगेर विश्वविद्यालय ने छात्रों के सर्टिफिकेट डिजिलॉकर पर किए अपलोड, फिर भी कई रिकॉर्ड लंबित

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 21 May 2026 12:52 PM

विज्ञापन

Munger University News

Munger University News: मुंगेर विश्वविद्यालय ने स्नातक सत्र 2022-25 के 23,500 विद्यार्थियों के प्रोविजनल सर्टिफिकेट डिजिलॉकर पर अपलोड कर दिये हैं. हालांकि विश्वविद्यालय अब भी बड़ी संख्या में छात्रों के क्रेडिट रिकॉर्ड और प्रमाण पत्र अपडेट करने में पीछे चल रहा है.

विज्ञापन

Munger University News: मुंगेर से अमित झा की रिपोर्ट. मुंगेर विश्वविद्यालय ने अपने स्नातक सत्र 2022-25 के 23,500 विद्यार्थियों का प्रोविजनल सर्टिफिकेट अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) आईडी से जुड़े डिजिलॉकर पर अपडेट कर दिया है. अब विद्यार्थी अपने एबीसी आईडी के माध्यम से ऑनलाइन अपना प्रमाण पत्र देख सकेंगे. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है, लेकिन दूसरी ओर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं.

डिजिलॉकर पर उपलब्ध हुआ प्रोविजनल सर्टिफिकेट

विश्वविद्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार सत्र 2022-25 के विद्यार्थियों का प्रोविजनल सर्टिफिकेट डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया है. इससे छात्रों को प्रमाण पत्र के लिए विश्वविद्यालय या कॉलेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

विद्यार्थी अपने अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट आईडी के माध्यम से डिजिलॉकर में लॉगिन कर प्रमाण पत्र देख और डाउनलोड कर सकते हैं.

एबीसी आईडी बनाने में आगे, रिकॉर्ड अपडेट में पीछे

हालांकि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक मुंगेर विश्वविद्यालय अब तक 1 लाख 4 हजार 940 विद्यार्थियों का एबीसी आईडी बना चुका है, लेकिन इनमें से केवल 78 हजार 662 विद्यार्थियों का ही क्रेडिट रिकॉर्ड उनके आईडी से मैप किया जा सका है.

ऐसे में हजारों विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड अब भी अपडेट होने बाकी हैं. छात्रों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब सभी रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध कराए जाएं.

उपयोगिता प्रमाण पत्र का भी बड़ा बकाया

मुंगेर विश्वविद्यालय पर वर्ष 2019 से अब तक 105.92 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र का बकाया होने की बात भी सामने आयी है. इससे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं.

जानकारों का मानना है कि विश्वविद्यालय को डिजिटल पहल के साथ-साथ लंबित वित्तीय और शैक्षणिक मामलों के समाधान पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है.

18 कॉलेजों में पढ़ते हैं एक लाख से अधिक विद्यार्थी

मुंगेर विश्वविद्यालय के अंतर्गत 18 अंगीभूत और संबद्ध कॉलेज संचालित हैं, जहां कुल 1 लाख 5 हजार 891 विद्यार्थी नामांकित हैं. बड़ी संख्या में छात्र अब अपनी शैक्षणिक सेवाओं के डिजिटलीकरण की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

Also Read: ‘मार देहब गोली’…आंगनबाड़ी केंद्र बना डांस बार, बच्चों की क्लास में रातभर भोजपुरी गानों पर लगे ठुमके

विज्ञापन
Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन