मुंगेर में 14 करोड़ के SDH भवन की दीवार से झड़ने लगा प्लास्टर, मुख्यमंत्री की तस्वीर के ऊपर उखड़ी परत ने उठाए निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

दीवार से गिर रहा प्लास्टर | Prabhat Khabar Network
Munger News: मुंगेर जिले के खड़गपुर में करोड़ों रुपये की लागत से बने अनुमंडलीय अस्पताल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल की दीवारों से प्लास्टर झड़ने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है.
Munger News: मुंगेर जिले के अनुमंडलीय अस्पताल, खड़गपुर में करोड़ों रुपये की लागत से बने भवन की गुणवत्ता सवालों के घेरे में आ गई है. करीब 14.12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार अस्पताल भवन की दीवारों से प्लास्टर झड़ने लगा है. अस्पताल परिसर में मुख्यमंत्री की तस्वीर के ऊपर की दीवार का प्लास्टर उखड़ने की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. इसके बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार एजेंसी पर कार्रवाई की मांग उठाई है.
11.80 करोड़ से बना भवन, बाद में और बढ़ी लागत
जानकारी के अनुसार अनुमंडलीय अस्पताल भवन का मूल निर्माण 11 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से कराया गया था.
अस्पताल के उद्घाटन के दौरान इसे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस बताते हुए क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया गया था.
बाद में अस्पताल में मेडिकल गैस पाइपलाइन, ऑपरेशन थियेटर, फर्नीचर, हीटिंग, वेंटिलेशन और अन्य सुविधाएं विकसित करने के लिए सरकार ने 2 करोड़ 32 लाख रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति दी. इसके बाद परियोजना की कुल लागत बढ़कर लगभग 14 करोड़ 12 लाख रुपये हो गई.
कुछ ही वर्षों में झड़ने लगा प्लास्टर
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल भवन बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही दीवारों से प्लास्टर गिरना शुरू हो गया.
सबसे अधिक चर्चा उस हिस्से की हो रही है, जहां मुख्यमंत्री की तस्वीर के ठीक ऊपर दीवार की परत उखड़ गई है. इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है.
हालांकि प्लास्टर झड़ने के कारणों को लेकर अभी तक संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
Munger News: निर्माण एजेंसी की गुणवत्ता पर उठे सवाल
भवन की स्थिति सामने आने के बाद लोगों ने निर्माण एजेंसी और कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की लागत से बने सरकारी भवनों में शुरुआती वर्षों में ही इस तरह की खामियां सामने आने लगें, तो यह गंभीर चिंता का विषय है.
लोगों का मानना है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और कार्य की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए.
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने सरकार और संबंधित विभाग से पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.
फिलहाल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं, लेकिन भवन की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं.
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लेखक के बारे में
By अमित झा
अमित झा प्रिंट माध्यम में 06 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.
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