मुंगेर में गंगा का जलस्तर 37.53 मीटर पहुंचा, दियारा में 100 एकड़ से ज्यादा जमीन गंगा में समाई

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गंगा कटाव का दृश्य. | Prabhat Khabar Network

गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से मुंगेर के दियारा इलाके में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ गया है. कुतलूपुर और जाफरनगर पंचायतों में 100 एकड़ से अधिक कृषि भूमि नदी में समा गई है, जिससे किसानों की मकई और सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गई हैं.

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गंगा के बढ़ते जलस्तर ने मुंगेर के दियारा इलाके में बाढ़ और कटाव का खतरा गहरा दिया है. सदर प्रखंड के गंगा पार स्थित कुतलूपुर और जाफरनगर पंचायत में नदी लगातार कृषि भूमि को अपने आगोश में ले रही है. खेतों में खड़ी मकई और सब्जियों की फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो कटाव की मार आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकती है.

चेतावनी स्तर से महज 70 सेंटीमीटर नीचे पहुंची गंगा

बुधवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 37.53 मीटर दर्ज किया गया. यह चेतावनी सूचक स्तर से महज 70 सेंटीमीटर नीचे है. नदी के बढ़ते जलस्तर के साथ दियारा क्षेत्र के खेतों पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है.

किसानों का कहना है कि जलस्तर में वृद्धि के साथ नदी की धार तेज हो रही है, जिससे कटाव प्रभावित इलाकों में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है.

कुतलूपुर और जाफरनगर में कटाव की सबसे ज्यादा मार

सदर प्रखंड के गंगा पार स्थित कुतलूपुर और जाफरनगर पंचायत में कटाव गंभीर बना हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार दोनों पंचायतों में अब तक 100 एकड़ से अधिक कृषि भूमि गंगा में समा चुकी है.

कटाव की चपेट में आए खेतों में मकई और विभिन्न प्रकार की सब्जियों की फसल लगी थी. फसल के साथ जमीन भी गंगा में समाने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है.

किसी की पांच तो किसी की 50 बीघा जमीन हुई बर्बाद

कटाव ने कई किसानों की वर्षों की मेहनत और खेती का आधार छीन लिया है. स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार ललन सिंह की करीब 50 बीघा जमीन कटाव की चपेट में आ चुकी है. इसे क्षेत्र में किसी एक किसान की सबसे बड़ी क्षति बताया जा रहा है.

इसके अलावा अरविंद कुमार सिंह, गोपाल सिंह, शंकर सिंह, चंद्रमोहन सिंह, स्वर्गीय बृजनंदन सिंह और स्वर्गीय प्रभुनंदन सिंह समेत कई किसानों की जमीन भी गंगा में समा चुकी है.

ग्रामीणों के अनुसार किसी किसान की पांच बीघा, किसी की सात बीघा तो किसी की 10 बीघा या उससे अधिक जमीन नदी के कटाव में नष्ट हो गई है.

फसल के साथ जमीन गंवा रहे किसान

दियारा क्षेत्र में खेती ही बड़ी संख्या में परिवारों की आय का प्रमुख आधार है. ऐसे में खेतों के लगातार नदी में विलीन होने से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट भी गहराने लगा है.

किसानों का कहना है कि खेतों में लगी फसल तैयार होने से पहले ही गंगा की तेज धार उसे अपने साथ बहा ले जा रही है. जमीन बचाने की कोशिश में किसान लगातार नदी के किनारे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.

प्रशासन से तत्काल कटावरोधी उपाय की मांग

बढ़ते जलस्तर और कटाव को देखते हुए दियारा क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन से तत्काल कटावरोधी उपाय शुरू कराने की मांग की है. किसानों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है.

ग्रामीणों ने कटाव से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की है. उनका कहना है कि अभी कटाव मुख्य रूप से कृषि भूमि को प्रभावित कर रहा है, लेकिन नदी का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा तो आबादी वाले क्षेत्रों पर भी खतरा मंडरा सकता है.


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Birendra Kumar Sing

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By Birendra Kumar Sing

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