प्रस्तावित शिक्षा विधेयक पर मुंगेर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन की आपत्ति, कुलाधिपति को भेजा पत्र

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सांकेतिक तस्वीर

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Bihar Education Bill: मुंगेर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ने बिहार के प्रस्तावित नए शिक्षा विधेयक पर गंभीर चिंता जताई है. संगठन ने कुलाधिपति को पत्र लिखकर विधेयक के प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं, जो विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं.

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Bihar Education Bill: बिहार में प्रस्तावित नए शिक्षा विधेयक को लेकर बहस तेज होती जा रही है. इसी बीच मुंगेर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (मुगुटा) ने कुलाधिपति को पत्र भेजकर विधेयक के संभावित प्रावधानों पर गंभीर चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि यदि मीडिया में सामने आ रही जानकारी के अनुरूप विधेयक लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी, शिक्षकों की स्वतंत्रता सीमित हो सकती है और उच्च शिक्षा व्यवस्था के ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे.

मुगुटा का कहना है कि उच्च शिक्षा केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि स्वतंत्र विचार, शोध और अकादमिक स्वायत्तता पर आधारित प्रणाली है. ऐसे में किसी भी बदलाव से पहले सभी हितधारकों की राय लेना जरूरी है.

किन प्रावधानों पर जताई गई चिंता

मुगुटा के महासचिव प्रो. हरिश्चंद्र शाही और अध्यक्ष डॉ. मो. अल्हाउद्दीन ने कुलाधिपति को भेजे पत्र में कहा है कि विभिन्न समाचार माध्यमों में आगामी विधानसभा सत्र में नया शिक्षा विधेयक पेश किए जाने की चर्चा है. हालांकि अब तक विधेयक का आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक नहीं किया गया है.

पत्र के अनुसार मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नई व्यवस्था के तहत उच्च शिक्षा विभाग का नवगठित और पुराने दोनों कॉलेजों पर सीधा नियंत्रण होगा. वहीं लोक भवन की भूमिका स्नातकोत्तर शिक्षण तक सीमित हो सकती है और स्नातक कॉलेजों के नियमन में उसकी भूमिका समाप्त हो सकती है.

शिक्षकों के अधिकारों पर भी उठाए सवाल

मुगुटा ने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार शिक्षकों से जुड़े नीतिगत, प्रशासनिक और पदोन्नति संबंधी मामलों का नियंत्रण सीधे उच्च शिक्षा विभाग के पास होगा. इसके अलावा प्रस्तावित विधेयक में उच्च शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति का भी प्रावधान बताया जा रहा है.

संगठन ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि यदि शिक्षकों के राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने, किसी विचारधारा का सार्वजनिक समर्थन करने, उस पर लिखने या प्रचार करने के अधिकार सीमित किए जाते हैं, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है.

Bihar Education Bill: पदोन्नति व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति

मुगुटा का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था में स्नातक कॉलेजों के शिक्षकों को विश्वविद्यालय स्तर पर प्रोफेसर पद तक पदोन्नति का अवसर नहीं मिलने की आशंका है. संगठन के अनुसार इससे शिक्षकों के करियर विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और उच्च शिक्षा में प्रतिभाशाली शिक्षकों का मनोबल भी प्रभावित होगा.

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर जोर

पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, स्वतंत्र विचार और अभिव्यक्ति की आजादी उच्च शिक्षा व्यवस्था की मूल भावना है. यदि इन अधिकारों में कटौती होती है तो इसका असर शिक्षा की गुणवत्ता, शोध और अकादमिक माहौल पर भी पड़ सकता है.

मुगुटा ने इसे केवल शिक्षकों का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी उच्च शिक्षा प्रणाली से जुड़ा विषय बताया है.

कुलाधिपति से किया हस्तक्षेप का अनुरोध

मुगुटा ने कुलाधिपति से आग्रह किया है कि प्रस्तावित शिक्षा विधेयक के प्रावधानों पर निष्पक्ष और गंभीरता से विचार किया जाए. संगठन ने अनुरोध किया है कि ऐसे किसी भी विवादास्पद या हानिकारक प्रावधान को अंतिम विधेयक का हिस्सा न बनाया जाए, जिससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, शिक्षकों के अधिकार और उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो.

फिलहाल सरकार की ओर से विधेयक का आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक नहीं किया गया है. ऐसे में शिक्षा जगत की निगाहें आगामी विधानसभा सत्र और सरकार की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं.

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अमित झा

लेखक के बारे में

By अमित झा

अमित झा प्रिंट माध्यम में 06 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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