बाढ़ पीड़ित पशुपालकों के सामने पशुओं का चारा एक बड़ी समस्या

Updated at : 27 Sep 2024 11:44 PM (IST)
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बाढ़ पीड़ित पशुपालकों के सामने पशुओं का चारा एक बड़ी समस्या

तीन दिनों से गंगा के पानी में कमी होने के बावजूद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ितों की समस्या घटने का नाम नहीं ले रही.

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प्रतिनिधि, जमालपुर. तीन दिनों से गंगा के पानी में कमी होने के बावजूद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ितों की समस्या घटने का नाम नहीं ले रही. लोगों द्वारा सहायता अभियान पर असंतोष व्यक्त किया जा रहा है. बाढ़ पीड़ित आम लोगों के साथ ही पशुओं के चारा की व्यवस्था पशुपालकों के लिए भारी मुसीबत बनी हुई है. इसे लेकर प्रभावित पंचायत में कई स्थानों पर पशुपालकों ने शुक्रवार को चारा की व्यवस्था की मांग की. पशुपालकों का कहना है कि करीब एक सप्ताह से बाढ़ की समस्या से हजारों पशुपालक प्रभावित हैं और पंचायत में करीब 40000 पशुओं को संतुलित चारा नसीब नहीं हो पा रहा है. कुछ पशुपालकों का कहना था कि चिह्नित क्षेत्र में पशुओं के लिए निर्धारित मापदंड के अनुसार चारा का वितरण किया जा रहा है, परंतु जिस प्रकार सभी बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री या तैयार खाना नहीं मिल पा रहा है. उसी प्रकार क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित पशुपालकों को भी उनके पशुओं के लिए चारा नहीं मिल पा रहा है. इस कारण पशुपालकों में असंतोष व्याप्त है.

इंदरुख पश्चिमी व परहम पंचायत में पशुपालकों ने चारे की मांग की

बाढ़ पीड़ितों के लिए तैयार भोजन वितरण में अनियमितता की बात करते हुए पशुपालकों ने पशुओं के लिए भी चारा वितरण में अनियमितता की बात कही. बताया गया कि बड़े मवेशी के लिए पांच किलोग्राम और छोटे मवेशी के लिए तीन किलोग्राम चारा वितरण की व्यवस्था की गयी है, परंतु इंदरुख पश्चिम पंचायत के पशुपालक रामजोत यादव, रामबरन यादव, संजीत यादव, दुखन यादव, विनय यादव, उपेंद्र यादव, रवि यादव और विनोदी यादव ने बताया कि सभी पशुपालकों को चारा की आपूर्ति नहीं की जा रही है. इसी प्रकार परहम पंचायत के वार्ड संख्या दो प्रेम टोला फरदा निवासी उमेश यादव, बिछू यादव, रामाधीन यादव, भरोसी यादव, मुकेश यादव, विक्रम यादव, किशन यादव, राहुल कुमार, नवीन यादव और चंदन यादव ने भी पशु चारा नहीं मिलने की बात कही. उन लोगों ने कहा कि एक-एक पशुपालक के पास चार से पांच या उससे भी अधिक पशु है, लेकिन प्रशासन द्वारा सभी पशुपालकों को चारा की आपूर्ति नहीं की जाती है. इस कारण मनुष्य से ज्यादा निरीह पशु बाढ़ के कारण परेशान है. पशुपालकों ने बताया कि बाढ़ के कारण पूरे क्षेत्र में कहीं भी हरा चारा उपलब्ध नहीं है. बाढ़ के पानी के कारण पशुओं का बथान भी अपना अस्तित्व खो चुका है. ऐसे में पशुधन की देखभाल में पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

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