चचेरे भाई की हत्या में पूर्व िवधायक रणवीर यादव को उम्रकैद

Updated at :04 Jan 2017 5:16 AM
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चचेरे भाई की हत्या में पूर्व िवधायक रणवीर यादव को उम्रकैद

मुंगेर : पूर्व विधायक रणवीर यादव को चचेरे भाई की हत्या के मामले में मंगलवार को मुंगेर के अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम पीसी चौधरी ने उम्रकैद की सजा सुनायी. साथ ही 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है. रणवीर यादव खगड़िया की वर्तमान जदयू विधायक पूनम देवी के पति हैं. सत्रवाद संख्या 184/89 में […]

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मुंगेर : पूर्व विधायक रणवीर यादव को चचेरे भाई की हत्या के मामले में मंगलवार को मुंगेर के अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम पीसी चौधरी ने उम्रकैद की सजा सुनायी. साथ ही 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है. रणवीर यादव खगड़िया की वर्तमान जदयू विधायक पूनम देवी के पति हैं. सत्रवाद संख्या 184/89 में उन्हें पहले दोषी करार दिया गया था. मंगलवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई. इसके दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक प्रीतम कुमार वैश्य ने बहस की. बताया जाता है कि छह दिसंबर, 1988 को रणवीर यादव अपने गांव खगड़िया जिले के चुकती में राइफल

हत्या के मामले में पूर्व िवधायक…
से चचेरे भाई सुनील यादव को गोली मार दी थी. उसकी इलाज के दौरान मौत हो गयी थी. सुनील यादव ने घायल अवस्था में ही पुलिस के समक्ष अपना फर्द बयान दिया था, जिसमें एकमात्र अभियुक्त रणवीर यादव पर गोली मारने का आरोप था. सुनील के बयान पर चौथम (मानसी) थाना पुलिस ने कांड संख्या 192‍/88 दर्ज की थी. बाद में अनुसंधान के दौरान रणवीर के भाई कैलू यादव का भी नाम घटना में आया. लेकिन, सुनवाई के दौरान ही कैलू यादव की मौत हो गयी.
27 वर्ष बाद सजा
सुनील यादव हत्याकांड में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद मंगलवार को सजा सुनायी गयी. लगभग 22 वर्षों तक मुंगेर न्यायालय के विभिन्न जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में सुनवाई का दौर चलता रहा. इस हाइ प्रोफाइल मामले में बार-बार अभियुक्त रणवीर यादव द्वारा व्यवहार न्यायालय के आदेश के विरुद्ध हाइकोर्ट में मामले को ले जाने के कारण सुनवाई की गति काफी धीमी रही.
पूर्व से सजायाफ्ता रहे हैं रणवीर यादव
यादव मुंगेर जिले के बहुचर्चित तौफिर नरसंहार कांड के आरोपित रहे हैं और उस मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा भी हुई थी. वह लगभग नौ वर्षों तक जेल में भी रहे. उस मामले में रणवीर यादव ने हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ लगायी. बाद में राज्य सरकार की ओर से सजा माफ करने के बाद जेल से निकले.
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