17 मई से शुरू हो रहा ऐतिहासिक ऋषिकुंड मलमास मेला, जर्जर सड़कें दे रही हैं हादसों को न्योता

खतरनाक रास्ते
मुंगेर के ऐतिहासिक ऋषिकुंड में 17 मई से मलमास मेला शुरू होने वाला है, लेकिन मुख्य मार्गों की बदहाली श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर भारी पड़ रही है. विशेष रूप से ऋषिकुंड हॉल्ट के पास की जर्जर पुलिया और संकरी सड़कें किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं.
बरियारपुर से संजीव कुमार की रिपोर्ट. आस्था और विश्वास का प्रतीक ऋषिकुंड मलमास मेला आगामी 17 मई से प्रारंभ होने जा रहा है. प्रत्येक तीन वर्ष पर आयोजित होने वाले इस राजकीय मेले की तैयारियों को लेकर जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की बैठक ऋषिकुंड परिसर में संपन्न हो चुकी है. प्रशासनिक दावों के उलट धरातल पर स्थिति चिंताजनक है. मेले की शुरुआत में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन ऋषिकुंड पहुंचने वाले मुख्य मार्ग अब तक दुरुस्त नहीं किए जा सके हैं, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है.
मुख्य मार्ग की पुलिया बनी ‘डेथ ट्रैप’, कटाव से संकरी हुई सड़क
ऋषिकुंड पहुंचने के लिए तीन मुख्य रास्ते हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण बरियारपुर कालीथान से ऋषिकुंड हॉल्ट होकर जाने वाला मार्ग है. लगभग 6 किलोमीटर लंबे इस रास्ते का उपयोग ट्रेन से आने वाले हजारों श्रद्धालु भी करते हैं. इसी मार्ग पर ऋषिकुंड हॉल्ट और रतनपुर गांव के बीच स्थित एक पुलिया बेहद खतरनाक स्थिति में है. पिछले दिनों आई बाढ़ के कारण पुलिया के दोनों ओर सड़क का कटाव हो गया है, जिससे रास्ता काफी संकरा हो चुका है. मेले के दौरान जब वाहनों का दबाव बढ़ेगा, तो इस संकरी पुलिया पर दो गाड़ियों के आमने-सामने आने से कभी भी कोई वाहन नीचे गिर सकता है. प्रशासन ने अब तक इस संवेदनशील स्थल की मरम्मत नहीं कराई है.
अन्य रास्तों की भी स्थिति बदहाल
मुख्य मार्ग के अलावा दो अन्य रास्ते भी उपेक्षा का शिकार हैं. पहला रास्ता मस्जिद मोड़ नौवागढ़ी से पाटम होते हुए करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय करता है, जबकि दूसरा रास्ता लोहची के समीप से लगभग 7 किलोमीटर का है. इन मार्गों पर भी श्रद्धालुओं को हिचकोले खाने पड़ेंगे. स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले के दौरान हजारों की संख्या में छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरेंगे. ऐसे में जर्जर सड़कें और संकरी पुलिया श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती साबित होंगी.
रामायण काल से जुड़ा है ऋषिकुंड का गौरवशाली इतिहास
ऋषिकुंड केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि रामायण काल से जुड़ी एक महान तपोस्थली है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां महान ऋषि श्रृंगी और विभांडक ऋषि ने कठिन तपस्या की थी. यही वह स्थान है जहां से श्रृंगी ऋषि ने राजा दशरथ को पुत्रेष्टि यज्ञ करने की सलाह दी थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें भगवान श्री राम सहित चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी. आज भी लोग यहां बड़ी श्रद्धा के साथ अपनी मन्नतें लेकर आते हैं. ऋषिकुंड का औषधीय गुणों से भरपूर गर्म जल भी देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. प्रशासनिक स्तर पर बैठकें तो हुई हैं, लेकिन अगर समय रहते कटाव वाली सड़कों और खतरनाक पुलिया की मरम्मत नहीं की गई, तो आस्था के इस केंद्र पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सफर जानलेवा साबित हो सकता है.
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