दी टेंपुल ऑफ हैनिमेन होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, मुंगेर एक ऐसा मेडिकल कॉलेज अस्पताल है जहां रोगियों का इलाज नहीं होता. यहां न तो रोगी को भरती किया जाता है और न ही उसके इलाज की व्यवस्था है. अलग बात है कि इस मेडिकल कॉलेज से प्रतिवर्ष युवक-युवतियां डॉक्टर की डिग्री प्राप्त कर निकलते हैं. लेकिन अपने शिक्षा ग्रहण के दौरान वे किन रोगियों का इलाज करते हैं यह शायद उन्हें भी पता नहीं होगा. छह माह पूर्व अस्पताल में एक्सरे मशीन लगायी गयी थी. वह भी धूल फांक रही है.
मुंगेर : गौर बाबू अस्पताल के नाम से प्रसिद्ध दी टेम्पुल ऑफ हैनिमेन होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की बदहाली दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है़ कहने को तो यहां 24 घंटा सातों दिन चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध है़ं किंतु जमीनी हकीकत यह है कि पिछले 3 साल से यहां न तो कोई मरीज भरती हुआ है और न ही किसी गर्भवती महिला का प्रसव ही कराया गया है़ आउटडोर के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही. जबकि ड्यूटी के लिए यहां कुल 6 चिकित्सक, 4 नर्स व 3 दाई तैनात हैं.
नहीं होता इलाज
मुंगेर का होमियोपैथ मेडिकल कॉलेज अर्थात गौर बाबू हॉस्पिटल किसी जमाने में मुंगेर व जमालपुर ही नहीं बल्कि जिले भर के गर्भवती महिलाओं के सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलेवरी) के लिए जाना जाता था़ इतना ही नहीं किसी दुर्घटना में घायल हो जाने वाले मरीजों को भी यहां पर भरती कर इलाज किया जाता था़ किंतु यहां पर पदस्थापित दाई विमला देवी ने बताया कि पिछले 3 साल से यहां न तो किसी महिला का प्रसव कराया गया है और न ही एक भी घायल मरीज का इलाज ही किया गया है़ इस कारण गौर बाबू अस्पताल के अस्तित्व पर अब ग्रहण के बादल मंडरा रहे हैं. अस्पताल का टूटा-फूटा व धूल जमा बेड भी अब अपनी स्थिति को खुद ही बयां कर रहा है.
कहते हैं प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ एके तिवारी ने बताया कि चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों की मजदूरी काफी न्यूनतम होने के कारण आम जनों को चिकित्सा सेवा नहीं मिल पा रही है़ एक्स-रे के लिए कर्मियों व संसाधन का अभाव है़
चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की नहीं है कमी
इस अस्पताल में चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की कोई कमी नहीं है़ यहां दो आरएमओ, दो एसएमओ सहित कुल 6 चिकित्सक पदस्थापित हैं. इसके अलावा 4 नर्स व 3 प्रशिक्षित दाई को भी तैनात किया गया है़ प्रसव वार्ड तथा सर्जिकल वार्ड में 11-11 बेड लगे हैं. किंतु सारे बेड चिथरे हो चुके हैं. बेड को ही देख लेने मात्र से यहां के चिकित्सकीय सेवाओं का अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है़ और तो और ओपीडी सेवा के दौरान धोखे से यहां चिकित्सक से दर्शन हो भी जायें, लेकिन इलाज की व्यवस्था नदारद है. जबकि बाहर के गेट पर लगे अस्पताल के बोर्ड पर 24 घंटे सेवा उपलब्ध की बात लिखी है़ इस कारण इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों व उनके परिजनों का यहां से भरोसा ही खत्म हो चुका है़
नहीं खुला एक्स-रे कक्ष का ताला
लगभग छह महीने पूर्व इस अस्पताल में मरीजों को जांच की सुविधा उपलब्ध कराये जाने को लेकर लगभग 3 लाख रुपये की लागत से एक एक्स-रे कक्ष का शुभारंभ किया गया था़ जिसका उद्घाटन सदर अनुमंडल पदाधिकारी डॉ कुंदन कुमार तथा स्थानीय विधायक विजय कुमार विजय ने संयुक्त रूप से फीता काट कर किया था़ किंतु उद्घाटन के बाद मरीजों का जांच होना तो दूर एक्स-रे कक्ष का आजतक ताला भी नहीं खोला जा सका है़ इस कारण जरूरतमंद मरीज इस स्वास्थ्य सेवा से पूरी तरह वंचित हैं.