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कफ सिरप के अवैध कारोबार से युवा हो रहे नशे के गुलाम

Updated at : 19 Dec 2019 8:51 AM (IST)
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कफ सिरप के अवैध कारोबार से युवा हो रहे नशे के गुलाम

मुरलीगंज : शराबबंदी कानून लागू होने व पुलिस की सख्ती के बाद युवाओं को नशे के नये विकल्प के रूप में कफ सिरप का सेवन करने लगे हैं. इससे कई घरों के अभिभावक परेशान हैं. कफ सिरप सेवन करने की लत एक बार किसी को पकड़ लेती है तो फिर उसकी आदत छुड़ा पाना मुश्किल […]

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मुरलीगंज : शराबबंदी कानून लागू होने व पुलिस की सख्ती के बाद युवाओं को नशे के नये विकल्प के रूप में कफ सिरप का सेवन करने लगे हैं. इससे कई घरों के अभिभावक परेशान हैं. कफ सिरप सेवन करने की लत एक बार किसी को पकड़ लेती है तो फिर उसकी आदत छुड़ा पाना मुश्किल होता है.

गौरतलब हो कि मुरलीगंज मिडिल स्कूल चौक के स्टेट हाईवे 91 के किनारे बने शौचालय में सैकड़ों की संख्या में कफ सिरप की बोतलें देखी जा सकती है, जिसे प्रतिदिन नगर पंचायत के सफाई कर्मी हटाते हैं. शाम होते ही कफ सिरप के खाली बोतलें वहां जमा होने लगती है.
विद्यालय परिसर में फेंकते हैं दवाई की बोतल: नशेड़ी कफ सिरप की खाली बोतल आदर्श मध्य विद्यालय मुरलीगंज के विद्यालय परिसर में फेंक देते हैं, जिसे विद्यालय में प्रतिदिन इन प्लास्टिक के कप सिरप के बोतलों को आग लगाकर नष्ट किया जाता है. विद्यालय परिसर के अंदर बने शौचालय में बाहर से कफ सिरप की बोतलें फेंकी जाती है.
एक नशेड़ी अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर पर बताया कि कफ सिरप का नशा ,“पहली वजह तो यह है कि यह शराब से सस्ती है. इससे मन शांत होता है, सुरूर बढ़ता है और खुमारी चढ़ती है. ज्यादा असर के लिए कई बार नशेड़ी कफ सिरप पीने के बाद चाय या मिठाई भी खाते हैं.”
मुरलीगंज शहर में सबसे व्यस्ततम चौराहे मिडिल स्कूल चौक स्कूल के मुख्य द्वार के पास भी कफ सिरप कोल्डीस्टार व डीलेक्स एक्स कफ सिरप की बोतलें फेंकी हुई. नई ताजा तरीन बोतले देखने को मिलेगी. शहर के सड़कों के किनारे भी देखने को मिल जाना आम बात है. वह भी ताजातरीन बोतलें जो शाम होते ही युवाओं के हाथ कहीं पान दुकान से, कहीं दवाई दुकान से, कहीं चाय की दुकान से तो कहीं किराने की दुकान से लेकर सेवन करते है.
मुनाफे का बिजनेस बना कफ सिरप का अवैध कारोबार: शराब के बाद अब सबसे आसान व मुनाफे का कारोबार साबित हो रहा है. एक नशेड़ी ने अपना नाम नहीं छपवाने की शर्त पर बताया कि शहर में वह व्यक्ति जो कफ सिरप के कारोबार में संलिप्त है को नशेड़ीयों
की पहचान है.
कफ सिरप के कारोबार में संलिप्त दवाई दुकानदार, किराने के दुकानदार, पान दुकानदार को है शाम ढलते ही निश्चित समय पर डेढ़ सौ रूपया लेने के बाद एक सौ एमएल की बोतल लाकर देते हैं, जिसे पीकर युवा धीरे-धीरे मौत के करीब पहुंच रहा है.
सिर्फ युवा ही नहीं 13 से 15 साल के बच्चे भी इसकी गिरफ्त में धीरे-धीरे आ रहे हैं. अभिभावक परेशान हो रहे हैं कि आखिर शहर में इस प्रतिबंधित ड्रग्स की सप्लाई किस तरह हो रही है और प्रशासन मूकदर्शक बनकर तमाशबीन बना है.
कफ सिरप से होने वाले साइड इफैक्ट्स के विषय में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डाॅ राजेश कुमार ने बताया कि उन्होंने बताया “लेकिन असली नशा तब चढ़ता है कफ सिरप पीने के बाद नशेड़ी नाइट्रोजन, नाइट्रावेट व प्रॉक्सीवॉन जैसे चीजों का सेवन करते हैं.” ग्रीष्म, वर्षा के सापेक्ष में ठंड में इसकी बिक्री कई गुना बढ़ जाती है.
डॉक्टर ने बताया कि कफ सिरप शरीर के भीतर यह कफ को निकालने वाले अंगों पर प्रभाव दिखाता है. गला सूखने लगता है. यह मस्तिष्क, किडनी, पेट, लिवर, लंग्स आदि सब पर असर दिखाता है. मेटाबालिज्म चयापचय को गड़बड़ा देता है. शरीर में शुगर का लेवल अचानक बढ़ जाता है. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है.
धीरे-धीरे यह समस्त मुख्य शरीरांगों की क्षमता को प्रभावित कर उन्हें निष्क्रिय बना देता है. कफ सिरप असली हो या नकली, दोनों सेवनकर्ता के लिए नुकसान दायक है. कफ सिरप का तेज दुष्प्रभाव बच्चों पर पड़ता है. जबकि नकली कफ सिरप पूरा जहर होता है. इधर, थानाध्यक्ष संजीव कुमार ने बताया कि इस दिशा में कई बार छापेमारी की गयी है और इस दिशा में प्रयास जारी है. औषधि निरीक्षक द्वारा इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती है.
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