Muharram Explained: आखिर मुहर्रम क्या है? ताजिया क्यों निकाला जाता है, आशूरा का क्या महत्व है और कर्बला से आज क्या सीख मिलती है

Edited by Sarfaraz Ahmad
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मुहर्रम के अवसर पर निकाले गए जुलूस

Muharram Explained: मुहर्रम क्या है, आशूरा का क्या महत्व है, ताजिया क्यों निकाला जाता है, शिया और सुन्नी समुदाय इसे अलग-अलग तरीके से क्यों मानते हैं और कर्बला से आज क्या सीख मिलती है, जानिए एक ही लेख में.

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Muharram Explained: भारत समेत दुनिया के कई देशों में मुहर्रम पूरे सम्मान और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. लेकिन हर साल एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि आखिर मुहर्रम क्या है? क्या यह मुस्लिमों का त्योहार है? ताजिया क्यों निकाला जाता है? आशूरा का क्या महत्व है? और आखिर कर्बला की घटना आज भी दुनिया को क्यों याद है?

अगर इन सभी सवालों का सरल और तथ्यात्मक जवाब जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है.

मुहर्रम क्या है? इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना

मुहर्रम इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर का पहला महीना है. इसे इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शामिल माना जाता है. इसी महीने से नए इस्लामी वर्ष की शुरुआत होती है. हालांकि अन्य नववर्षों की तरह इसे उत्सव के रूप में नहीं मनाया जाता.

इस महीने की 10वीं तारीख को यौमे आशूरा कहा जाता है, जिसका इस्लामी इतिहास में विशेष महत्व है.

कर्बला में आखिर क्या हुआ था?

680 ईस्वी में इराक के कर्बला में पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने तत्कालीन शासक यज़ीद के सामने अन्याय के आगे झुकने से इनकार कर दिया.

कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन और उनके छोटे से काफिले को पानी तक से वंचित कर दिया गया. अंततः 10 मुहर्रम को इमाम हुसैन सहित उनके परिवार और साथियों ने शहादत दी. इस घटना को इस्लामी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में माना जाता है.

शिया और सुन्नी समुदाय मुहर्रम को अलग-अलग तरीके से क्यों याद करते हैं?

यहीं सबसे अधिक भ्रम देखने को मिलता है.

शिया समुदाय के लिए आशूरा इमाम हुसैन की शहादत का दिन है. वे मजलिस, मातमी जुलूस और कर्बला की याद में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं.

वहीं सुन्नी परंपरा में भी आशूरा का विशेष महत्व है. कई इस्लामी परंपराओं में इसे हजरत मूसा और बनी इस्राईल की मुक्ति सहित अन्य ऐतिहासिक घटनाओं से भी जोड़ा जाता है. इसी कारण अनेक सुन्नी मुसलमान इस दिन रोजा भी रखते हैं.

भारत में ताजिया क्यों निकाला जाता है?

भारत में मुहर्रम की सबसे प्रमुख पहचान ताजिया जुलूस है. ताजिया को कर्बला की स्मृति का प्रतीक माना जाता है. विभिन्न राज्यों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार ताजिया बनाए जाते हैं और निर्धारित मार्गों से जुलूस निकाले जाते हैं.

बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और कई अन्य राज्यों में अखाड़ों के प्रदर्शन, पारंपरिक युद्धकला और ताजिया मिलान भी मुहर्रम की प्रमुख विशेषता हैं.

क्या मुहर्रम सिर्फ मुस्लिम समुदाय तक सीमित है?

भारत की गंगा-जमुनी तहजीब में कई स्थानों पर विभिन्न समुदायों के लोग मुहर्रम के आयोजन में सहयोग करते हैं. कई इलाकों में ताजिया निर्माण, मेले और सामाजिक सहयोग में अलग-अलग समुदायों की भागीदारी देखने को मिलती है.

इसी कारण मुहर्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक माना जाता है.

आज के समय में कर्बला हमें क्या सिखाती है?

कर्बला की घटना केवल इतिहास नहीं है. इसका सबसे बड़ा संदेश है कि अन्याय, अत्याचार और सत्ता के दबाव के सामने भी सत्य और नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए.

इमाम हुसैन की शहादत को दुनिया भर में न्याय, साहस, धैर्य और मानवता की रक्षा के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है. यही कारण है कि करीब 1400 वर्ष बाद भी कर्बला की घटना करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है.

यह भी पढ़ें: आखिर क्यों कहा जाता है “हर दिन आशूरा है और हर जमीन कर्बला”? जानिए इसका अर्थ

Muharram: सबसे जरूरी बातें

  • मुहर्रम इस्लामी वर्ष का पहला महीना है.
  • 10 मुहर्रम को यौमे आशूरा कहा जाता है.
  • कर्बला की घटना 680 ईस्वी में हुई थी.
  • शिया समुदाय इस दिन इमाम हुसैन की शहादत को याद करता है.
  • सुन्नी परंपरा में भी आशूरा का धार्मिक महत्व है और कई लोग रोजा रखते हैं.
  • भारत में ताजिया जुलूस स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा बन चुके हैं.
  • कर्बला का संदेश न्याय, इंसानियत, धैर्य और सत्य के पक्ष में खड़े रहने का है.
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Sarfaraz Ahmad

लेखक के बारे में

By Sarfaraz Ahmad

सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।

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