जब शहर सोता है, तब बेजुबानों का पेट भरने निकल पड़ता है ये शख्स, 10 साल से निभा रहा इंसानियत का फर्ज

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आवारा कुत्तों को रोटी खिलाते शानू, फोटो- प्रभात खबर

आवारा कुत्तों को रोटी खिलाते शानू, फोटो- प्रभात खबर

मोतिहारी के शानू कुमार हर रात शहर सो जाने के बाद बेजुबान जानवरों की तलाश में निकलते हैं. पिछले आठ-दस सालों से वह भूखे गायों और कुत्तों को खाना खिलाकर इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं. जानवरों के लिए उनका समर्पण प्रेरणादायक है.

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Motihari Stray Animals: मोतिहारी के चांदमारी मोहल्ले में रहने वाले शानू कुमार इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश कर रहे हैं, जो हर किसी को प्रेरित करती है. जब पूरा शहर सो जाता है, तब शानू अपने घर से भोजन लेकर शहर की गलियों और सड़कों पर निकल पड़ते हैं. उनका मकसद सिर्फ एक होता है, भूखे आवारा गायों और कुत्तों का पेट भरना. पिछले आठ-दस वर्षों से वह बिना किसी प्रचार या अपेक्षा के हर रात यह सेवा कर रहे हैं.

रोज रात को निकलते हैं बेजुबानों की तलाश में

शानू बताते हैं कि रात होते ही उनके मन में यही ख्याल आता है कि कहीं कोई बेजुबान भूखा उनका इंतजार कर रहा होगा. इसी सोच के साथ वह भोजन लेकर शहर के अलग-अलग इलाकों में पहुंचते हैं और आवारा गायों व कुत्तों को खाना खिलाते हैं.

अब जानवर भी पहचानने लगे हैं अपना साथी

लगातार वर्षों से सेवा करने का नतीजा यह है कि जिन जगहों पर शानू रोज जाते हैं, वहां के बेजुबान जानवर भी उन्हें पहचानने लगे हैं. जैसे ही वह पहुंचते हैं, दर्जनों कुत्ते और कई गाय उनके आसपास इकट्ठा हो जाती हैं. इंसान और बेजुबानों के बीच विश्वास और अपनापन का यह दृश्य राहगीरों का भी दिल छू लेता है.

'खाना खिलाए बिना नहीं मिलता सुकून'

शानू कहते हैं कि जब तक वह इन बेजुबानों को खाना नहीं खिला देते, तब तक उन्हें चैन नहीं मिलता. उनका मानना है कि जानवर अपनी भूख और दर्द किसी से कह नहीं सकते. अगर हर व्यक्ति अपने आसपास एक-दो पशुओं की जिम्मेदारी उठा ले, तो शायद कोई भी बेजुबान भूखा नहीं रहेगा.

लोगों के लिए बने प्रेरणा

स्थानीय लोगों का कहना है कि शानू का यह प्रयास सिर्फ जानवरों का पेट भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को संवेदनशील बनने का संदेश भी देता है. उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार उन बेजुबानों की तृप्त आंखें हैं, जिनका पेट भरने के बाद उन्हें सुकून मिलता है.

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अमरेश कुमार

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By अमरेश कुमार

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