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शिवलिंग पूर्वी चंपारण की सीमा में प्रवेश

Updated at : 05 Jan 2026 10:19 PM (IST)
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शिवलिंग पूर्वी चंपारण की सीमा में प्रवेश

पूर्वी चंपारण के कैथवलिया में बन रहे विश्व प्रसिद्ध विराट रामायण मंदिर की भव्यता अब साकार होने वाली है.

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डुमरियाघाट.

पूर्वी चंपारण के कैथवलिया में बन रहे विश्व प्रसिद्ध विराट रामायण मंदिर की भव्यता अब साकार होने वाली है. तमिलनाडु के महाबलीपुरम से चलकर विश्व का सबसे ऊँचा शिवलिंग सोमवार की शाम गोपालगंज के बलथर होते हुए डुमरियाघाट सीमा में प्रवेश कर गया. कड़कड़ाती ठंड और पछुआ हवा के बीच, हज़ारों की संख्या में खड़े श्रद्धालुओं की टकटकी तब सफल हुई जब विशालकाय शिवलिंग का दर्शन हुआ. शंखनाद और ””””हर-हर महादेव”””” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया.

सुरक्षा के कड़े इंतजामशिवलिंग की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा. भारी पुलिस बल के साथ दंडाधिकारियों की तैनाती की गई थी. मौके पर चकिया डीएसपी संतोष कुमार, केसरिया इंस्पेक्टर निक्कू सिंह और डुमरियाघाट थानाध्यक्ष विवेक कुमार बालेंदु सशस्त्र बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले हुए थे.

शिवलिंग की विशेषताएंवजन और ऊँचाई: यह शिवलिंग 33 फीट ऊँचा है और इसका वजन 210 मीट्रिक टन (लगभग 2 लाख किलो) है.

एकल पत्थर निर्माण: इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे एक ही ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर बनाया गया है.

दशक भर की मेहनत: शिल्पकार लोकनाथ के नेतृत्व में दक्षिण भारतीय शिल्पकला शैली में इसे तैयार करने में 10 साल का समय लगा है.

ऐतिहासिक जुड़ाव: इसका निर्माण सातवीं शताब्दी के पल्लव वंश काल से पत्थर तराशने के लिए विख्यात पट्टीकड्डु गांव में हुआ है.

लंबा सफर, अब स्थापना की तैयारी96 पहियों वाले विशेष ट्रक से यह शिवलिंग 21 नवंबर को तमिलनाडु से रवाना हुआ था. आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश होते हुए 46 दिनों की यात्रा कर यह बिहार पहुँचा है. अब 17 जनवरी को विराट रामायण मंदिर (कैथवलिया) में इस महाशिवलिंग की स्थापना की जाएगी.

तमाम अटकलों पर लगा विरामगंडक नदी के डुमरियाघाट पुल की क्षमता को लेकर लंबे समय से संशय बना हुआ था कि क्या यह भारी-भरकम ट्रक पुल पार कर पाएगा? विशेषज्ञों की जांच और महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव शायन कुणाल के स्पष्टीकरण के बाद ट्रक को इसी मार्ग से निकाला गया. उन्होंने बताया कि शिवलिंग की लंबाई अधिक होने के कारण उसका भार पुल के एक हिस्से पर केंद्रित नहीं होगा, जिससे यह सुरक्षित है. इस पर सहमति बनी, उसके बाद ट्रक को बलथर से गोपालगंज होते हुए पूर्वी चम्पारण के लिए रवाना किया गया. शिवलिंग का वजन 210 मीट्रिक टन है. बताया कि विराट रामायण मंदिर कैथवलिया में शिवलिंग की स्थापना 17 जनवरी को निर्धारित है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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