मानसून की धमक के साथ धान रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, आधा लक्ष्य हुआ पूरा

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मानसून की दस्तक के साथ धान की रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, 50 फीसदी लक्ष्य हुआ पूरा

मधुबन में धान की रोपनी करते किसान | Prabhat Khabar Network

मधुबन में मानसून के साथ धान की रोपनी ने रफ्तार पकड़ी, 50 फीसदी लक्ष्य पूरा। मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत से किसान परेशान, जानें पूरी रिपोर्ट।

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Madhuban Paddy Cultivation: मानसून की धमक शुरू होने के साथ ही प्रखंड क्षेत्र में धान की रोपनी ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है. कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मधुबन प्रखंड में निर्धारित लक्ष्य का लगभग 50 फीसदी धान की रोपनी का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है. इस साल प्रखंड में कुल 5740 हेक्टेयर कृषि भूमि में धान की रोपनी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके मुकाबले अब तक लगभग 2870 हेक्टेयर भूमि में रोपनी संपन्न हो चुकी है.

कम बारिश में निजी नलकूपों का सहारा, इन पंचायतों में काम तेज

क्षेत्र में इस बार उम्मीद से कम बारिश होने के बावजूद किसान अपनी हिम्मत नहीं हार रहे हैं और निजी नलकूपों (बोरिंग) के सहारे धान की रोपनी में मुस्तैदी से जुटे हुए हैं. प्रखंड के कृष्णानगर, कौड़िया, गड़हिया, दुलमा, भेलवा, रूपनी, नौरंगिया माधोपुर, तालिमपुर कोईलहरा, वाजितपुर और सवंगिया समेत विभिन्न पंचायतों में इन दिनों कृषि कार्य काफी तेजी से चल रहा है. किसान समय पर अपनी खेती पूरी करने के लिए सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का भरपूर उपयोग कर रहे हैं.

मजदूरों के पलायन से बढ़ी परेशानी, खेती की लागत में भारी वृद्धि

इस सीजन में क्षेत्र के अधिकांश कृषि मजदूरों के पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे अन्य राज्यों में पलायन कर जाने के कारण स्थानीय स्तर पर मजदूरों का भारी संकट खड़ा हो गया है. जो थोड़े-बहुत मजदूर यहां उपलब्ध हैं, वे 400 से 500 रुपये प्रतिदिन की महंगी मजदूरी के साथ एक समय के भरपेट भोजन की शर्त पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण खेतों की जोताई और कदवा (कादो) की दरों में भी काफी वृद्धि हुई है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.

खाद की कोई कमी नहीं, कालाबाजारी पर रहेगी सख्त नजर: बीएओ

इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) मुनेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि क्षेत्र में धान की रोपनी बेहद तेज गति से चल रही है और आधा लक्ष्य हासिल कर लिया गया है. उन्होंने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रखंड में उर्वरक (खाद) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. इसके साथ ही खाद की किसी भी तरह की कालाबाजारी या जमाखोरी को रोकने के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार सघन निगरानी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है.


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Shashi Chandra Tiwary

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By Shashi Chandra Tiwary

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