Motihari: एक बार फिर से गांवो में गुंजने लगी झिझिया गीत

टीवी व सोशल मीडिया के अति प्रचार के कारण झिझिया परम्परा विलुप्त सी हो गई थी.
Motihari: गोविंदगंज. टीवी व सोशल मीडिया के अति प्रचार के कारण झिझिया परम्परा विलुप्त सी हो गई थी, लेकिन वर्षों बाद एक बार फिर से ग्रामीण परिवेश में दशहरा के मौके पर किशोर उम्र की बच्चियां शाम होते ही अपने हम उम्र किशोरियों के साथ माथे पर जालीदार कलश में दीप रखकर आस पास के दरवाजे पर झिझिया गीत गाने लगी है. “खो खो रे डईनी कोतरा मच्छरिया ना खइबे कोतरा त चबइहे आपन भतरा “जैसे झिझिया गीतों के साथ दरवाजे व गांव की सीमा पर सुनने को मिल रहा है. विलुप्त हो रही इस परम्परा के पुनः उजागर होने से इस वर्ष झिझिया गीत सुनकर ग्रामीण परिवेश में हर्ष का संचार हुआ है. ग्रामीण नर- नारी इनकी बड़ी सराहना करते हुए खुशी-खुशी किशोर वर्ग की झिझिया गीत का आनंद उठा रहे थे. क्षेत्र के कई गांव में इस लोक परम्परा को किशोरियों द्वारा एक बार फिर से बेझिझक झिझिया गीत गाया जा रहा है. झिझिया गा रही इन किशोरियों में श्रुति, आकांक्षा, संगीता,माला सहित अन्य ने बताया कि हमलोग अपने दादी मां से झिझिया के बारे में सुनकर फिर से इस लोक परम्परा को शुरू किए है. विदित हो कि झिझिया हमारे लोक संस्कृति की प्राचीन व पारंपरिक नृत्य गीत शैली है, जिसकी चर्चा गांव में चहुंओर हो रही थी.
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