Motihari: आईसीडीएस की महिला सुपरवाइजर्स के वीडियो वायरल, रील का असर अब सरकारी दफ्तरों तक पहुंचा

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दफ्तर में रील बनाती महिला, फोटो-एआई

Motihari Reel Culture: मोतिहारी में आईसीडीएस की कुछ महिला पर्यवेक्षिकाओं के फेसबुक और इंस्टाग्राम वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हैं. इसे लेकर सरकारी कर्मचारियों की सोशल मीडिया भूमिका और सामाजिक प्रभाव पर अलग-अलग राय सामने आ रही है.

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मोतिहारी से सामंत कुमार गौतम की रिपोर्ट

Motihari Reel Culture: सोशल मीडिया पर रील बनाने का बढ़ता ट्रेंड अब सरकारी कार्यालयों तक भी पहुंचता दिखाई दे रहा है. पूर्वी चंपारण के आईसीडीएस विभाग की कुछ महिला पर्यवेक्षिकाओं के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं. इन वीडियो में डांस, निजी जीवन, घर के कामकाज, यात्रा और नए कार्यालय में योगदान (जॉइनिंग) से जुड़े दृश्य शामिल हैं. सोशल मीडिया पर इनके वायरल होने के बाद लोगों के बीच इस पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

सोशल मीडिया पर सामने आईं मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे इन वीडियो को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है. कुछ लोग इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि सार्वजनिक पद पर कार्यरत कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर भी गरिमा और संयम का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

हालांकि, केवल रील बनाना अपने आप में किसी सरकारी नियम का उल्लंघन नहीं माना जाता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वीडियो कब, कहां और किन परिस्थितियों में बनाया गया है तथा उससे विभागीय कार्य, सेवा आचरण या सरकारी नियमों का कोई उल्लंघन हुआ है या नहीं.

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समाज और युवाओं पर प्रभाव को लेकर उठे सवाल

सामाजिक विषयों से जुड़े जानकारों का मानना है कि सरकारी कर्मचारी समाज में एक जिम्मेदार छवि का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे में यदि वे लगातार रील और वायरल कंटेंट की संस्कृति का हिस्सा बनते दिखाई देते हैं, तो इसका असर बच्चों और युवाओं पर भी पड़ सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जबकि शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक जिम्मेदारियों जैसे महत्वपूर्ण विषय अपेक्षाकृत पीछे छूट सकते हैं. हालांकि, इस विषय पर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय है.

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जिम्मेदारी के साथ सोशल मीडिया के उपयोग की सलाह

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया आज संवाद, सूचना और जागरूकता का प्रभावी माध्यम बन चुका है. सरकारी कर्मचारियों को भी इसका उपयोग करने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक पद की जिम्मेदारियों और सेवा आचरण को ध्यान में रखते हुए संतुलित व्यवहार आवश्यक है.

उनका कहना है कि निजी अभिव्यक्ति और सरकारी दायित्वों के बीच संतुलन बनाए रखना समय की जरूरत है. इससे न केवल व्यक्तिगत छवि बल्कि विभाग की साख भी बनी रहती है.

विभाग की ओर से नहीं आया कोई आधिकारिक बयान

आईसीडीएस विभाग की ओर से इस पूरे मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है. ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर चल रही चर्चाएं फिलहाल लोगों की व्यक्तिगत राय और बहस तक ही सीमित हैं.

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अनिकेत कुमार

लेखक के बारे में

By अनिकेत कुमार

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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