मदरसा और संस्कृत विद्यालय शिक्षकों को मार्च से नहीं मिला वेतन, आर्थिक संकट गहराया

मदरसा
पूर्वी बिहार के मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को मार्च महीने से वेतन नहीं मिला है. लगातार भुगतान लंबित रहने से शिक्षकों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है. दुकानदारों ने उधार देना बंद कर दिया है.
Motihari News: पूर्वी चंपारण समेत पूरे बिहार के अराजकीय प्रस्वीकृत मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को मार्च महीने से वेतन नहीं मिला है. लगातार कई महीनों से भुगतान लंबित रहने के कारण शिक्षकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. शिक्षकों का कहना है कि परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है और अब भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है.
दुकानदारों ने उधार पर राशन देना किया बंद
शिक्षकों ने बताया कि वेतन नहीं मिलने से घर का पूरा बजट बिगड़ गया है. बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दवाइयों और दैनिक जरूरतों का खर्च उठाना कठिन हो गया है. लगातार बढ़ते उधार के कारण स्थानीय दुकानदारों ने भी राशन और अन्य आवश्यक सामान उधार देना बंद कर दिया है.
बच्चों की पढ़ाई और इलाज पर पड़ा असर
शिक्षकों के अनुसार वे अपने बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर पा रहे हैं. आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है. वहीं बुजुर्ग परिजनों के इलाज और दवाइयों का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है. हाल के त्योहार भी आर्थिक तंगी के कारण फीके रहे.
विभाग ने जांच को बताया देरी का कारण
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विभागीय निर्देश पर सभी मदरसा और संस्कृत विद्यालयों की जांच कराई गई है. संस्थानों की शैक्षणिक गतिविधियों और अभिलेखों के सत्यापन के कारण भुगतान प्रक्रिया में देरी हुई है. जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
शिक्षकों ने शीघ्र वेतन भुगतान की मांग की
संस्कृत और मदरसा शिक्षक संघ ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की है. संघ का कहना है कि सरकार शिक्षा सुधार की बात करती है, लेकिन शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है. शिक्षकों ने मांग की कि बकाया राशि का जल्द भुगतान कर उन्हें आर्थिक संकट से राहत दिलाई जाए.
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