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कबीर पर कबीर पंथी संतों का हुआ आगमन

Updated at : 11 Jun 2025 9:51 PM (IST)
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कबीर पर कबीर पंथी संतों का हुआ आगमन

करीब 150 साल पुराने ऐतिहासिक कबीर आश्रम पर बुधवार को कबीर जयंती के अवसर पर गुरुपूजा (बरसाती पुणो) का आयोजन किया गया.

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पीपराकोठी. प्रखंड क्षेत्र के करीब 150 साल पुराने ऐतिहासिक कबीर आश्रम पर बुधवार को कबीर जयंती के अवसर पर गुरुपूजा (बरसाती पुणो) का आयोजन किया गया. इस दौरान बेलवतिया आश्रम सहित दूर दूर से आये अन्य कबीर पंथी आश्रमों के संतों ने आश्रम में स्थापित सभी महंथों के स्मारक पर पुष्प अर्पित कर पूजा अर्चना की. बताया जाता है कि इस आश्रम पर साल में दो बार संत सम्मेलन हुआ करता है. एक तो कबीर जयंती और दूसरा अनंत चतुर्दशी के अवसर पर. सम्मेलन में पड़ोसी देश नेपाल, यूपी, मध्य प्रदेश सहित अन्य जगहों के कबीर पंथी संत महात्माओं का समागम हुआ करता है. खासकर इस आश्रम परिसर में पूर्व के सभी महंथों का स्मारक एवं विश्व कबीर शांति स्तंभ स्थापित है जो संतों के लिए आकर्षण का केंद्र है. इस तरह का स्तंभ पूरे भारत में मध्य प्रदेश के सात जगह पर वहां के सरकार ने बनवाया है जबकि मध्य प्रदेश को छोड़ केवल इसी स्थान पर ही ऐसा स्तंभ है. इस स्तंभ का निर्माण तत्कालीन महंत स्व. रामस्नेही दास ने 2002 में किया जबकि यह आश्रम 1875 ई. में तत्कालीन महंत स्व. केशव साहेब ने स्थापित किया इस स्तंभ के अलावा अन्य सभी स्तंभ मध्य प्रदेश शासन के द्वारा बनाये गए है इस आश्रम पर प्रति वर्ष कबीर जयंती एवं अनंत चतुर्दशी को संत सम्मेलन का आयोजन किया जाता है जिसमे देश विदेश के संत महात्मा भक्त का समागम होता है यह आश्रम धार्मिक सामाजिक राजनैतिक व अध्यात्मिक साधना का केंद्र रहा है.

आश्रम का इतिहास :

इस ऐतिहासिक स्थल के बारे में गौर करें तो आश्रम की स्थापना करने वाले महंथ स्व. केशव साहब ने 1875 ई. में की और वे 1895 तक महंथ रहे उसके बाद स्व० श्याम बिहारी दास साहब सन 1895 से 1901 ई०, महंथ स्व० रिशाल साहब 1901 से 1929 तक, महंथ स्व. ब्रह्मदेव साहब सन 1929 से 1954 ई. तक , उसके बाद महंथ स्व. कमल साहेब सन 1954 से 1975 तक रहे एव उन्होंने आश्रम के 100 वे स्थापना दिवस पर अपने जीवन काल में ही रामस्नेही दास को महंथ की गद्दी पर आसीन करते हुए उन्हें महंथ बनाया और महंथ रामस्नेही दास ने अपने काल में ही विश्व कबीर शांति स्तंभ की स्थापना किया तथा वे भी अपने जीवन काल में ही 15 सितम्बर 1997 को अपना कार्य भार रामरूप दास को सौंपा तथा वे सन 31 मई 2002 को गुजर गए. फ़िलहाल इसे धार्मिक न्यास परिषद पटना ने इसे अपने अधीन ले लिया है और सदस्यों का चयन कर रखा है

आकर्षक का केंद्र है विश्व कबीर शांति स्तंभ

इस आश्रम पर स्थापित विश्व कबीर शांति स्तंभ यहां पर आने वाले सभी के लिए आकर्षक का केंद्र है. यह मध्य प्रदेश के साथ स्तंभ के बाद पूरे देश व बिहार में इकलौता है. जो संगमरमर के बने है. निचली हिस्सा त्रिभुजाकार है और यह आकार धीरे धीरे बढ़ते हुए ऊपरी हिस्से पर कमलाकृति आकार हो गया है, चांदनी रात में यह स्तंभ दूर से ही आकर्षित करती है. मौके पर मुख्य रूप से रामाशीष दास, उपेंद्र दास, रामबाबू दास, अमीन दास, शिवजी दास, विनय कुशवाहा, नीरज दास, जगरनाथ दास, फूलगेन दास, धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य भरत पटेल, शशि भूषण श्रीवास्तव, शम्भु पासवान, राजेश राम, श्यामबाबू साह, अच्छेलाल साह, गजेंद्र राम, ग्रामीण साधुशरण सिंह, श्रीभगवान सिंह, मनीष कुमार, नवल सिंह, मुन्नीलाल राम सहित अन्य मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SATENDRA PRASAD SAT

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