Bihar: महागठबंधन ने रैली के लिए पू्र्णिया को ही क्यों चुना? लोकसभा चुनाव 2024 से जुड़ी बड़ी वजह जानिए...

Updated at : 23 Feb 2023 11:35 AM (IST)
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Bihar Politics: 25 फरवरी को बिहार के पूर्णिया में महागठबंधन की होने वाली रैली को लेकर तैयारी जोर-शोर से की जा रही है. वहीं इस रैली को लेकर सीमांचल की सियासी गरमी भी बढ़ी है. जानिए लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर कुछ अहम बातें..

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Bihar Politics: 25 फरवरी को बिहार के पूर्णिया में महागठबंधन की रैली (Purnea Rally) होने वाली है. इसकी तैयारी जोर-शोर से चल रही. कोसी-सीमांचल-अंगक्षेत्र के तमाम नेता व कार्यकर्ता इस रैली को सफल बनाने में दिन-रात एक किए हुए हैं. दरअसल, पूर्णिया रैली के बहाने महागठबंधन आगामी लोकसभा चुनाव 2024 का शंखनाद करने की तैयारी में लग रही है. इसके पीछे भी कुछ बड़ी वजहें हैं….

लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी का शंखनाद?

बिहार में सियासी समीकरण अब बदला हुआ है. भाजपा और जदयू अब अलग-अलग है. जेडीयू ने राजद, कांग्रेस व महागठबंधन के अन्य घटक दलों के साथ मिलकर अब सरकार में है. वहीं भाजपा विपक्षी खेमा बन चुकी है. 25 फरवरी को महागठबंधन की रैली को लेकर सियासी गलियारे में हलचल तेज है. दरअसल, इस रैली को एक तरह से लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी के शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है.

रैली के लिए पूर्णिया के उसी रंगभूमि मैदान को चुना जहां…

बिहार में गृह मंत्री अमित शाह की सक्रियता काफी बढ़ गयी है. वो लगातार बिहार का दौरा कर रहे हैं. जिस दिन पूर्णिया में महागठबंधन की रैली होगी उसी दिन गृह मंत्री अमित शाह भी बिहार में होंगे. वहीं महागठबंधन ने रैली के लिए पूर्णिया के उसी रंगभूमि मैदान को चुना है. जिससे अमित शाह ने हुंकार भरी थी. इस रैली को लेकर सीमांचल क्षेत्र की भी हलचल तेज है.

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सीमांचल का समीकरण

बता दें कि सीमांचल में महागठबंधन का मजबूत वोट बैंक रहा है. लेकिन लोकसभा चुनाव में यहां भाजपा आसानी से बाजी मार जाती है. उम्मीदवार नरेंद्र मोदी रहे तो एनडीए ने यहां जोरदार प्रदर्शन किया है. 2019 के लोकसभा चुनाव में सीमांचल की 4 सीटों में 3 पर एनडीए ने जीत दर्ज की थी. अररिया सीट बीजेपी तो पूर्णिया और कटिहार की सीट जदयू के पास रही. वहीं किशनगंज में कांग्रेस का झंडा फहरा था. यानी अब भाजपा यहां एक सीट तो महागठबंधन के पास तीन सीट है. हालाकि जदयू ने एनडीए के साथ रहकर दो सीट जीते थे.

अल्पसंख्यकों की आबादी अधिक

एक अनुमान के मुताबिक सीमांचल में करीब 40 से 70 फीसदी आबादी अल्पसंख्यकों की है. वहीं भाजपा जब यहां हुंकार भरती है तो एनडीए के पक्ष में परिणाम आते हैं. महागठबंधन का मजबूत MY समीकरण यहां है. लेकिन लोकसभा चुनाव में उसका असर नहीं दिखने लगा है. अब सीमांचल में ही अपनी जमीन को वापस मजबूत करके यहां की चारों सीटों को अपने कब्जे में रखने की तैयारी में महागठबंधन जरुर रहेगी.

Published By: Thakur Shaktilochan

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