Madhubani News : मानक के अनुरूप संचालित नहीं होने वाले दो नर्सिंग होम पर लगाया 50-50 हजार रुपये का अर्थ दंड

Published by : GAJENDRA KUMAR Updated At : 18 Nov 2025 9:32 PM

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बिना निबंधन, बिना बोर्ड एवं मानक के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे नर्सिंग होम मामले में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने बेनीपट्टी के दो संचालकों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है.

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मधुबनी.

बिना निबंधन, बिना बोर्ड एवं मानक के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे नर्सिंग होम मामले में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने बेनीपट्टी के दो संचालकों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है. सिविल सर्जन ने संचालक को पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर हास्पिटल बंद करने व अर्थ दंड की राशि जिला निबंधन प्राधिकार के नाम से बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करने का निर्देश दिया है. आदेश का उल्लंघन करने पर संचालक के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी.

बिना बोर्ड के संचालित नर्सिंग होम

सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार के निर्देश पर एनसीडीओ डॉ. एसएन झा एवं उपाधीक्षक अनुमंडलीय अस्पताल बेनीपट्टी द्वारा बिना बोर्ड के संचालित दो नर्सिंग होम की जांच 8 नवंबर को की थी. सिविल सर्जन को सौंपे गये जांच प्रतिवेदन में जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी एवं उपाधीक्षक अनुमंडलीय अस्पताल बेनीपट्टी द्वारा दोनों नर्सिंग होम बिना निबंधन, बिना बोर्ड एवं मानक के अनुरूप संचालित नहीं होने की बात कही गई है. सिविल सर्जन ने कहा कि जिले में मानक के अनुरूप संचालित नहीं होने वाले अभी तक 170 संचालकों पर अर्थ दंड लगाया गया है. इससे विभाग को 50 लाख रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है. सिविल सर्जन ने दोनों संचालकों से जवाब तलब करते हुए 50 हजार रुपए का अर्थ दंड लगाया है. साथ ही संस्थान को पूर्णतया बंद करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट रेगुलेशन लागू किए जाने के बाद अब सभी तरह के क्लिनिकों, नर्सिंग होम, अस्पताल, लैबोरेट्री का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है. इसके लिए जिला स्तर पर जिला प्राधिकार के गठन की अधिसूचना जारी की गयी. अगर कोई क्लिनिक अस्पताल या नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन कराये संचालित किया जाता है तो पहली बार उल्लंघन करने पर 50 हजार, दूसरी बार उल्लंघन करने पर 1 लाख तक और उसके बाद निबंधन नहीं कराने पर 5 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. राज्य सरकार ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रजिस्ट्रीकरण और विनियमन अधिनियम 2010 में ही विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कर लिया है. इसे प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बिहार नैदानिक स्थापना रजिस्ट्रीकरण एवं विनियमन नियमावली 2013 को अधिसूचित कर दिया है. इसे प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा नैदानिक स्थापना राज्य परिषद और जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकार का गठन किया गया है. इस रेगुलेशन के प्रभावी होने के बाद अब राज्य के सभी तरह के इलाज करने वाले संस्थान का निबंधन का रास्ता साफ हो गया है.

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