Madhubani News : एसएसएसटी टोला में बाल विवाह नहीं करने की ली शपथ

Edited by GAJENDRA KUMAR
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गयी है.

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मधुबनी.

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गयी है. इसके लिए शहर से गांव तक अभियान चलाया जा रहा है. इस क्रम में रहिका प्रखंड के हुसैनपुर स्थित मसहरी टोला, पंडौल प्रखंड के मुसहरी टोला एवं अन्य प्रखंडों में एससीएसटी टोला एवं मंदिरों में बाल विवाह की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक किया गया. वार्ड पार्षद, सरपंच आदि लोग क्षेत्र में बाल विवाह रोकने की अपील की गयी.

30 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर सामूहिक विवाह होते हैं, जिसमें बाल विवाह होने की आशंका अधिक होती है. गांवों में बाल विवाह की रोकथाम के लिए विशेष जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा देना है. अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन की भी नजर है. बाल विवाह के दुष्परिणाम के बारे में गांवों व टोला में विद्यार्थियों को जागरूक किया जा रहा है.

कानून की अवहेलना करने पर होगी कार्रवाई

बाल विवाह जैसे कुप्रथा की रोकथाम के लिए प्रशासन विशेष अभियान चला रहा है. जिसमें लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ कानून की अवहेलना करने वाले व्यक्तियों पर कानूनी कार्रवाई की हिदायत दी जा रही है. फेरे करवाने वाले पंडित, टेंट वाले, बैंड वालों और हलवाइयों को भी पाबंद किया गया है. बाल विवाह की सूचना तुरंत पुलिस को देने की लोगों से अपील की गई. ऐसा नहीं करने पर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी. सूचना देने वालों को प्रोत्साहन के साथ मजबूत सुरक्षा तंत्र उपलब्ध करवाया जाएगा.

गांवों से जिला स्तर तक चलाई जा रही मुहिम

बाल विवाह पर प्रभावी रोक के लिए गांव एवं जिला स्तर पर कार्यरत विभिन्न महिला संगठनों, सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों की सहायता लेकर प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्कूल, ग्राम स्तरीय संगठन स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में प्रतिभागियों को बाल विवाह के प्रति संवेदनशील बनाया जा रहा है. इसके साथ ही 18 साल से कम उम्र की लड़कियों और 21 साल से कम उम्र के लड़कों को बाल विवाह कानून के प्रति जागरूक किया गया.

अक्षय तृतीया पर अधिक रहती है बाल विवाह की संभावना

अक्षय तृतीया पर बाल विवाह की संभावना ज्यादा होती है. बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार बाल विवाह एक अपराध है. इस कुप्रथा का आयोजन विशेष रूप से अक्षय तृतीया जैसे पर्वों के साथ-साथ अन्य अवसरों पर भी खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में किया जाता है. बाल विवाह की रोकथाम के लिए निरंतर निगरानी रखने और बाल विवाह नहीं होने की सुनिश्चितता के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है.

क्या कहते हैं अधिकारी

महिला एवं बाल विकास निगम के जिला प्रबंधक हेमंत कुमार ने कहा कि बाल विवाह, बचपन खत्म कर देता है. बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कारों पर गलत प्रभाव डालता है. बाल विवाह को रोकने के लिए जागरूकता पैदा करना, बालिकाओं को शिक्षित करना, और सामाजिक-आर्थिक सुधार करने के लिए सरकार प्रयासरत है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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