Madhubani News : तेज पछिया हवा ने बढायी मुश्किलें, तापमान में बढ़ोतरी

Published at :02 Mar 2025 10:57 PM (IST)
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Madhubani News : तेज पछिया हवा ने बढायी मुश्किलें, तापमान में बढ़ोतरी

तेज पछिया हवा ने रविवार को लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी. सुबह से ही पछिया हवा की रफ्तार अधिक रही. दोपहर होते होते हवा ने गति पकड़ ली.

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मधुबनी.

तेज पछिया हवा ने रविवार को लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी. सुबह से ही पछिया हवा की रफ्तार अधिक रही. दोपहर होते होते हवा ने गति पकड़ ली. मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार को पछिया हवा की गति 11 किलोमीटर प्रति घंटे रफ्तार रही. इसके साथ ही तेज धूप से गर्मी भी अधिक बढ़ गयी. मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रही. जो सामान्य से करीब चार डिग्री सेल्सियस अधिक रहा. वहीं न्यूनतम तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. यह सामान्य से 1.8 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा.

किसानों के लिये सुझाव

मौसम वैज्ञानिक ए सत्तार ने किसानों के लिये कई सुझाव दिये हैं. उन्होंने कहा है कि कुछ दिनों में तापमान में वृद्धि होने के कारण गेहूं की फसल को नुकसान होने की संभावना है. इसलिए किसान भाइयों को अपने खेतों में सिंचाई कर नमी बनाए रखना चाहिए. ताकि गेहूं की फसल को अधिक तापमान से बचाया जा सके और उत्पादन में कमी न आए. इसी प्रकार गरमा मूंग तथा उरद की बुआई के लिए खेत की तैयारी करना चाहिये. बुआई से पूर्व खेत की जुताई में 20 किलोग्राम नेत्रजन, 45 किलोग्राम सल्फर, 20 किलोग्राम पोटाष तथा 20 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करना हितकारी होगा. मूंग के लिए पूसा विशाल, सम्राट, एसएमएल-668, एचयूएम-18 एवं सोना तथा उरद के लिए पंत उरद 19, पंत उरद 31, नवीन एवं उत्तरा किस्में बुआई के लिए अनुशंसित हैं. बीज दर छोटे दानों के प्रभेदों हेतु 20-25 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा बड़े दानों के प्रभेदों हेतु 30-35 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर रखना चाहिये.. कृषकों को बुआई पूर्व बीज का प्रबंध प्रमाणित स्त्रोत से सुनिश्चित कर लेना चाहिए.

मार्च महीने में गर्मी बढ़ने से दुधारू पशुओं में थनैला बीमारी होने की संभावना रहती है. थनों एवं दूध के रंग में बदलाव या अचानक दूध उत्पादन में कमी होने पर मैमिडियम 50 ग्राम चार दिनों तक प्रतिदिन गुड़ के साथ दें एवं तुरंत उपचार कराना चाहिये. खरीफ के हरा चारा के लिए एम.पी चरी. मल्टीकट मिठा ज्वार एवं मक्का के साथ लोविया या मेथ दलहनी चारा लगाना चाहिए. पशुओं में खुरहा, गलघोटू एवं लंगड़ी बीमारी से बचाव के लिए टिकाकरण कराने की सलाह दी है.

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