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28 साल बाद सकरी चीनी मिल में फिर गूंजेगी मशीनों की आवाज, नए साल पर किसानों के लिए गुड न्यूज

Updated at : 03 Jan 2026 7:04 PM (IST)
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Bihar-Sakri-Sugar-Mill

AI फोटो

Bihar Sugar Mill: मधुबनी की ऐतिहासिक सकरी चीनी मिल को दोबारा चालू करने की घोषणा से किसानों और पुराने कर्मचारियों में खुशी है. मिल के फिर से चालू होने से गन्ना खेती, रोजगार और लोकल अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी.

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Bihar Sugar Mill: मधुबनी जिले की सकरी चीनी मिल को दोबारा चालू करने की घोषणा से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. 28 वर्षों से इस मिल के दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे किसानों और पुराने कर्मचारियों को अब एक नई उम्मीद दिखाई दे रही है. सकरी चीनी मिल कभी पूरे मिथिला क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती थी. इस मिल की स्थापना 1933 में दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह ने सूगर मिल कंपनी लिमिटेड के तहत कराई थी. उस समय यहां बनने वाली चीनी की मांग देश ही नहीं, विदेशों तक थी. मिल के पास गन्ना ढुलाई के लिए अपना निजी रेलवे नेटवर्क भी था, जिससे किसानों को बड़ी सुविधा मिलती थी.

मिल के चलते कमाते थे लोग

चीनी मिल के चलते इस क्षेत्र के किसान गन्ने की खेती से अच्छी आमदनी कमाते थे. गन्ना एक नकदी फसल थी, जिससे किसान अपने बच्चों की पढ़ाई, घर-परिवार का खर्च और बेटियों की शादी तक आसानी से कर पाते थे. मिल में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों और मजदूरों के परिवारों का जीवन भी इसी पर निर्भर था. सकरी चीनी मिल हजारों लोगों के रोजगार का बड़ा साधन थी.

1997 में मिल के बंद हो जाने से स्थिति पूरी तरह बदल गई. मिल में करीब 1100 कर्मचारी काम करते थे. इनमें लगभग 1100 मजदूर काम करते थे. मिल बंद होते ही कर्मचारियों और मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया. कई परिवारों को भारी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ी. पुराने कर्मचारी बताते हैं कि अभाव और बीमारी के कारण कई लोगों की मौत तक हो गई. जो लोग बचे, वे लंबे समय तक गरीबी और बेरोजगारी से जूझते रहे.

क्या प्रभाव पड़ा

चीनी मिल बंद होने का असर किसानों पर भी गहरा पड़ा. इस इलाके में गन्ना ही मुख्य फसल थी. मिल बंद होते ही गन्ने की खेती धीरे-धीरे खत्म होने लगी. गन्ने से जुड़े गुड़ उद्योग भी पूरी तरह बंद हो गए.

सकरी चीनी मिल का क्षेत्र काफी बड़ा था. मिल का परिसर लगभग 36 एकड़ में फैला है. इसमें से अधिकतर हिस्सा दरभंगा जिले के मनीगाछी प्रखंड में और कुछ हिस्सा मधुबनी जिले के पंडौल प्रखंड में आता है. प्रशासनिक कामकाज मधुबनी से ही संचालित होता था. रेल के जरिए गन्ना लाने के लिए आसपास के कई स्टेशनों पर विशेष व्यवस्था थी.

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आज क्या है स्थिति

आज की स्थिति में मिल परिसर में बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं और भवन जर्जर हो चुके हैं. कुछ मशीनों को स्क्रैप में बेचने की कोशिश भी हुई, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध से उन्हें बचा लिया गया. दिसंबर 2025 के अंत में बिहार सरकार ने सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत सकरी, रैयाम और लोहट चीनी मिल को फिर से चालू करने का निर्णय लिया है.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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