जेल में रौशन यादव की मौत पर उठे सवाल, पुलिस ने कहा- जिला पुलिस की कोई भूमिका नहीं

Updated:
विज्ञापन

पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार | Prabhat Khabar Network

मधुबनी मंडल कारा में न्यायिक हिरासत में बंद रौशन कुमार यादव की मौत के बाद जेल प्रशासन और जिला पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें मजिस्ट्रेट और न्यायिक जांच शामिल हैं.

विज्ञापन

Madhubani Jail Death: रामपट्टी स्थित मंडल कारा में न्यायिक हिरासत में बंद रौशन कुमार यादव की मौत के बाद जेल प्रशासन और जिला पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं. 10 अगस्त को जेल में रौशन की तबीयत अचानक बिगड़ गयी थी. इसके बाद उसे सदर अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद प्रशासनिक, न्यायिक और मानवाधिकार स्तर पर जांच शुरू कर दी गयी है.

मजिस्ट्रेट और न्यायिक जांच शुरू

वरीय पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार के कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बंदी की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलने के बाद जेल कर्मियों ने उसे सदर अस्पताल भेजा था. चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया.

जिलाधिकारी के आदेश पर नियुक्त मजिस्ट्रेट ने मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट तैयार की है. वहीं त्रिस्तरीय मेडिकल बोर्ड ने वीडियोग्राफी के साथ शव का पोस्टमार्टम किया. पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट पुलिस को मिल चुकी है, जबकि अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

24 घंटे के भीतर NHRC को भेजी गयी रिपोर्ट

पुलिस के अनुसार, घटना की जानकारी मिलने के 24 घंटे के भीतर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC को भी रिपोर्ट भेजी गयी. जेल के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही है.

इसके अलावा न्यायिक मजिस्ट्रेट भी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. सभी जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी.

जेल में हुई घटना, जिला पुलिस ने बताया कोई भूमिका नहीं

पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि घटना मंडल कारा के अंदर हुई है और वहां कारा प्रशासन के कर्मी ही मौजूद रहते हैं. जिला पुलिस के कर्मी जेल के अंदर तैनात नहीं रहते हैं.

इसी आधार पर पुलिस ने कहा है कि रौशन कुमार यादव की मौत की घटना में जिला पुलिस की कोई भूमिका नहीं है. हालांकि, बंदी की मौत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

2 जून को हुई थी गिरफ्तारी, 3 जून को भेजा गया था जेल

पुलिस के अनुसार, रौशन कुमार यादव को रहिका थाना कांड संख्या 147/26 में आर्म्स एक्ट के तहत 2 जून को गिरफ्तार किया गया था. अगले दिन 3 जून को उसे न्यायिक हिरासत में मंडल कारा भेजा गया.

गिरफ्तारी के बाद बीएनएसएस की धारा 48 के तहत उसकी माता को गिरफ्तारी की सूचना लिखित रूप से दी गयी थी. जेल भेजे जाने से पहले रहिका पीएचसी के चिकित्सक ने भी रौशन को फिट पाया था.

पुलिस के मुताबिक, जेल भेजे जाने के करीब 67 दिन बाद 10 अगस्त को मंडल कारा में उसकी मौत हो गयी.

रौशन पर दर्ज थे पांच आपराधिक मामले

पुलिस ने बताया कि रौशन कुमार यादव के खिलाफ कुल पांच आपराधिक मामले दर्ज थे. इनमें केवटी थाना, दरभंगा में वर्ष 2025 का एक मामला, औसी थाना में दर्ज एक मामला और रहिका थाना में वर्ष 2026 में दर्ज तीन मामले शामिल हैं.

रहिका थाना के मामलों में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट की धाराएं भी लगायी गयी थीं.

अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजर

फिलहाल रौशन यादव की मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर न्यायिक जांच, मजिस्ट्रेट जांच, जेल के सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल बोर्ड की अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी. इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद ही मौत के कारण और घटना की परिस्थितियों की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी.

यह भी पढ़ें

Madhubani News: दिशा की बैठक में डीएम-एसपी की गैरहाजिरी पर जनप्रतिनिधियों ने किया बहिष्कार


विज्ञापन
Kartik Kumar

लेखक के बारे में

By Kartik Kumar

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन