Madhubani News : जीत-हार पर चर्चाओं का बाजार गर्म, आम लोगों से लेकर कार्यकर्ता तक कर रहे गणना

मंगलवार को मतदान संपन्न होने के साथ ही फुलपरास विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी फिर तेज हो गयी.
घोघरडीहा. मंगलवार को मतदान संपन्न होने के साथ ही फुलपरास विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी फिर तेज हो गयी. बुधवार की सुबह से ही गांव-गांव, चौक-चौराहों, चाय-पान की दुकानों और स्थानीय बाजारों में चुनाव परिणाम को लेकर चर्चा का दौर शुरू हो गया. हर ओर सिर्फ प्रत्याशियों की हार – जीत की बातें हो रही थी. राजनीतिक कार्यकर्ता से लेकर आम मतदाता तक सभी अपने-अपने तरीके से परिणाम का अनुमान लगाने में जुट गए हैं. कोई मतदान प्रतिशत के आधार पर संभावित विजेता का अनुमान लगा रहा है तो कोई जातीय समीकरण, बूथवार मतदान पैटर्न और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि के आधार पर विश्लेषण कर रहा है. कई जगहों पर स्थानीय लोग बैठकों में मतदान के दिन की स्थिति का बारीकी से विश्लेषण करते नजर आए. कौन-सा बूथ किस उम्मीदवार के पक्ष में गया, किस वर्ग का झुकाव किस ओर दिखा ऐसे तमाम बिंदुओं पर चर्चा जारी है. कुछ लोग मान रहे हैं कि इस बार मुकाबला बेहद कड़ा रहा है और किसी भी प्रत्याशी की जीत या हार का अंतर बहुत कम हो सकता है. वहीं कई अनुभवी राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुख्य दलों का समीकरण बिगाड़ दिया है. चर्चा का माहौल इतना गर्म है कि राजनीतिक कार्यकर्ता लगातार फोन पर अपने साथियों से संपर्क बनाए हुए हैं, जबकि सोशल मीडिया पर भी “कौन आगे और कौन पीछे” जैसे पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं. स्थानीय विश्लेषकों का कहना है कि फुलपरास विधानसभा में इस बार वोटों का बिखराव कई सीटों पर असर डाल सकता है. एनडीए, महागठबंधन और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच तगड़ा त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला है. मतदान प्रतिशत भी उत्साहजनक रहा है, जिससे यह स्पष्ट है कि जनता में इस बार बदलाव की लहर या प्रत्याशी आधारित मतदान दोनों ही देखने को मिले हैं. हालांकि इन तमाम चर्चाओं और दावों के बीच असली तस्वीर तो मतगणना के दिन ही साफ होगी. 14 नवंबर शुक्रवार को जब इवीएम खुलेंगे तभी यह स्पष्ट हो पाएगा कि मतदाताओं ने किस पर भरोसा जताया और किसे नकार दिया. तब तक फुलपरास की गलियों, चौपालों और दुकानों पर जारी यह राजनीतिक चर्चा का पारा यूं ही चढ़ा रहेगा. बहरहाल, अब सबकी निगाहें मतगणना केंद्र पर टिक गई हैं, जहां जनता के फैसले की मुहर खुलने के साथ ही तय होगा कि किसकी मेहनत रंग लाई और किसकी उम्मीदों पर पानी फिरा.
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