Madhubani News : विकास वत्सनाभ की मैथिली कविता संग्रह का हुआ लोकार्पण

Published by : GAJENDRA KUMAR Updated At : 05 Oct 2025 10:04 PM

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कवि विकास वत्सनाभ की कविता संग्रह ‘नेपथ्य सं अबैत हाक’का लोकार्पण किया गया.

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रहिका. मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठ में रविवार को मैथिली के चर्चित युवा कवि विकास वत्सनाभ की कविता संग्रह ‘नेपथ्य सं अबैत हाक’का लोकार्पण किया गया. किसुन संकल्प लोक और विमर्श फाउंडेशन द्वारा आयोजित पोथी लोकार्पण और पोथी परिचर्चा कार्यक्रम में कमल मोहन चुन्नू ने कहा कि मैथिली के सुपरिचित युवा कवि विकास वत्सनाभ की कविताओं में मिथिला का उपेक्षित समाज और सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है. कविता संग्रह में यहां के लोगों के जीवन, संबंध, संस्कृति, मिथिला के बंद पड़े उद्योग-धंधे स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया है. उन्होंने कहा कि विकास के शिल्प में विविधता है और विकास की कविताओं में मैथिली कविता की परम्परा बहुत अच्छे से प्रकट होती है. सुपरिचित कवि दिलीप कुमार झा ने कहा कि विकास वत्सनाभ मैथिली कविता के प्रतिनिधि युवा स्वर हैं. मूलतः प्रेम और प्रतिरोध के कवि. उन्होंने कहा कि उनकी कविताओं में मिथिला समाज, लोक और सत्ता द्वारा हुई उपेक्षा ख़ासतौर पर देखी जा सकती है. इस अवसर पर वरिष्ठ कथाकार अशोक ने विकास को उनके पहले संग्रह के लिए खूब बधाई दी और कहा कि इस संग्रह का एक ख़ास नेरैटिव है और यह होना ही चाहिए. यह विकास की कविताओं का महत्वपूर्ण पक्ष है. धीरेंद्र प्रेमर्षि ने कहा कि नव पीढ़ी की क्रियाशीलता विकास की कविता में मिलती है. कवि अंशुमान सत्यकेतु ने कहा कि विकास की उपस्थिति मैथिली कविता संसार में महत्वपूर्ण और ख़ास है. आधुनिक कविता में विकास की लोकार्पित संग्रह में उचस्थ स्थान प्राप्त करने की क्षमता है. मौके पर उपस्थित जेएनयू के प्राध्यापक संजय कुमार झा ने कहा कि विश्व परिदृश्य में ग्रामीण जीवन, परिवेश और व्यवस्था को परिलक्षित करती हुई कविताओं का यह संग्रह पठनीय और संग्रहणीय है. प्रसिद्ध समालोचक रमानंद झा रमण ने कहा कि विकास की कविताएं अपने शब्द चयन और बिम्ब विधान के लिए ख़ासतौर पर आकर्षित करती है. ये कविताएं अपने पाठ में सहज है और कवि की काव्य-दृष्टि अपने पाठ में लोगों के मन तक पहुंचती है. प्रसिद्ध साहित्यकार सुभाष चंद्र यादव ने कहा कि संग्रह की कविताओं का स्वर मानवीय संवेदनाओं का मुखरित रूप है जिसमें संबंध, संस्कृति, परिवेश को बचाने की चिंता परिलक्षित है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार उदय चंद्र झा विनोद ने कहा विकास मैथिली के महत्वपूर्ण युवा स्वर हैं. उनकी कविताओं में मैथिल समाज मुखर रूप से सामने आता है. इस अवसर पर शंभुनाथ झा, गुंजनश्री, बालमुकुंद ने भी अपने विचार रखे. अतिथियों का स्वागत केदार कानन और विभा झा व संचालन किसलय कृष्ण ने किया. इस अवसर पर शिवशंकर श्रीनिवास, अशोक मेहता, महेन्द्र नारायण राम, चन्द्रमणि, सुस्मिता पाठक, सत्येंद झा, मिथिलेश कुमार झा, हीरेंद्र झा, मैथिल प्रशांत, कमलेश प्रेमेंद्र, आनंद मोहन झा, अनुराग मिश्र, सुशांत अवलोकित, रानी झा, श्याम झा, मुकुंद मयंक, प्रियरंजन झा, सोनू कुमार झा सहित सैकड़ों साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी उपस्थित थे.

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