मधुबनी: सड़क निर्माण के चक्कर में पर्यावरण का कबाड़ा, ग्रामीणों ने उठाए प्रशासनिक तालमेल पर सवाल
Published by : Purushottam Kumar Updated At : 05 Jun 2026 11:15 AM
पौधे के जड़ को पीसीसी सड़क में ढाल दिया
Madhubani News: मधुबनी के झंझारपुर में विदेश्वरस्थान-भैरवस्थान पथ के चौड़ीकरण के दौरान वन विभाग का पौधा पीसीसी सड़क में दबा. ठेकेदार और वन विभाग के तालमेल पर उठे सवाल. जानिए खबर विस्तार से…
Madhubani News: पर्यावरण संरक्षण को लेकर वन विभाग की दूरदृष्टि पर ग्रामीण कार्य विभाग की विभागीय नियमावली और ठेकेदार की मनमानी भारी पड़ गई है. विकास और पर्यावरण के बीच कड़े तालमेल की कमी का एक हैरान करने वाला मामला झंझारपुर प्रखंड के विदेश्वरस्थान-भैरवस्थान मुख्य पथ पर सामने आया है. यहाँ हाल ही में ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा सड़क चौड़ीकरण (Road Widening) का काम कराया गया, लेकिन इस निर्माण के दौरान वन विभाग द्वारा सड़क किनारे लगाए गए एक हरे-भरे पौधे को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया. ठेकेदार ने क्रूरता दिखाते हुए जीवित पौधे की जड़ को ही कंक्रीट (PCC) सड़क के भीतर ढालकर दबा दिया, जिससे पौधे का अस्तित्व संकट में आ गया है.
बिना योजना के हुआ था पौधारोपण
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस बर्बादी के पीछे वन विभाग की अदूरदर्शिता भी बड़ी वजह है. विभाग ने पिछले वर्ष बिना किसी ठोस और दूरगामी योजना के आनन-फानन में इस मुख्य सड़क के किनारे पौधारोपण अभियान चलाया था. लोगों के मुताबिक, सड़क किनारे पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने के बावजूद वन विभाग के कर्मियों ने पौधों को मुख्य सड़क से बिल्कुल सटाकर लगा दिया. पौधारोपण के समय अधिकारियों ने यह कतई नहीं सोचा कि भविष्य में आबादी और वाहनों के बढ़ते दबाव के कारण सड़क का चौड़ीकरण भी अति आवश्यक हो सकता है. अगर पौधों को सड़क मार्ग से महज एक-आध फीट हटाकर लगाया गया होता, तो आज यह कड़क नौबत नहीं आती.
पर्यावरण को पहुंचाया कड़ा नुकसान
इधर, जब ग्रामीण कार्य विभाग के निर्देश पर सड़क चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का काम शुरू हुआ, तो निर्माण करा रहे ठेकेदार और इंजीनियरों ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय अपनी कागजी नापी पूरी करने को प्राथमिकता दी. ठेकेदार ने अपनी तय चौड़ाई का कोरम पूरा करने के चक्कर में खड़े पौधे को पूरी तरह दरकिनार कर दिया. भारी मशीनों और कंक्रीट मिक्सर के जरिए पौधे के तने और जड़ के ऊपर से ही पक्की पीसीसी सड़क ढाल दी गई. दोनों सरकारी विभागों के बीच आपसी समन्वय (Coordination) की इस घोर कमी के कारण न केवल सरकार की भारी-भरकम राशि पानी में बह गई, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को भी गहरा झटका लगा है.
घोर लापरवाही का मामला, जिम्मेदारी तय करने की मांग
इस अजीबोगरीब वाकये के बाद अब इलाके में यह कड़क सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस बेजुबान पौधे की सुरक्षा और उसकी मौत की जिम्मेदारी किस विभाग पर तय होगी:
• क्या वन विभाग को करोड़ों की लागत से पौधारोपण अभियान शुरू करने से पहले ग्रामीण कार्य विभाग के साथ लिखित समन्वय और भविष्य के रोड मैप की समीक्षा नहीं करनी चाहिए थी?
• या फिर सड़क निर्माण के दौरान मौके पर मौजूद ठेकेदार, मुंशी और कनीय अभियंता (JE) का यह मानवीय कर्तव्य नहीं था कि वे विकास के साथ-साथ उस जीवित पौधे को बचाने के लिए सड़क का एलाइनमेंट थोड़ा सा बदल देते?
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और मधुबनी के जिलाधिकारी (DM) से मांग की है कि भविष्य में होने वाले ऐसे किसी भी ढांचागत विकास कार्य से पहले वन विभाग और निर्माण विभागों के बीच एक कड़क संयुक्त बैठक आयोजित की जाए, ताकि चंपारण और मिथिलांचल की धरती पर विकास के साथ-साथ पर्यावरण भी पूरी तरह सुरक्षित रह सके.
मधुबनी के झंझारपुर से संजय कर्ण की रिपोर्ट
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