ईरान-अमेरिका तनाव का असर, महंगी हुईं कैंसर, बीपी और डायबिटीज की दवाएं
सांकेतिक तस्वीर
मधुबनी: जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में 15 से 28 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. डायबिटीज, बीपी, थायराइड और कैंसर की दवाएं महंगी होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है. जानिए खबर विस्तार से...
मधुबनी से अनिल कुमार झा की रिपोर्ट
मधुबनी: जिले में जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों पर महंगाई का असर साफ दिखने लगा है. ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों और दवा निर्माण लागत में इजाफे के कारण डायबिटीज, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, थायराइड और एंटीबायोटिक दवाओं की कीमतों में 15 से 28 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. महंगी दवाओं के कारण मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है. पहले जहां लोग एक महीने की दवा खरीदते थे, अब कई मरीज सिर्फ 10 दिनों की दवा ही खरीद पा रहे हैं.
जीएसटी कटौती का भी नहीं मिल रहा फायदा
केंद्र सरकार ने 23 दिसंबर 2025 से दवाओं पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया, लेकिन बढ़ी हुई एमआरपी के कारण इसका लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच सका. वहीं पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ने से परिवहन लागत में भी इजाफा हुआ है, जिसका असर दवा कारोबारियों के मार्जिन पर पड़ा है.
कैंसर की दवाओं पर भी महंगाई की मार
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले प्लेटिनम की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है. सितंबर 2025 में प्लेटिनम की कीमत 3,869 रुपये प्रति ग्राम थी, जो अब बढ़कर करीब 8,000 रुपये प्रति ग्राम हो गई है. इससे सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लाटिन और ऑक्सालिप्लाटिन जैसी दवाओं की उपलब्धता और कीमत दोनों प्रभावित हुई हैं.
कच्चा माल और पैकेजिंग महंगी होने से बढ़ी लागत
दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, प्लास्टिक दाना, बोतल और अन्य पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. इसका असर पैरासिटामोल समेत कई सामान्य दवाओं की कीमतों पर भी पड़ा है. दवा कंपनियां बढ़ी हुई लागत के कारण दवाओं के दाम बढ़ाने को मजबूर हैं.
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