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Madhubani : स्वास्थ्य संस्थानों में डेडीकेटेड वार्ड व पर्याप्त मात्रा में आवश्यक दवा रखें: डीडीसी

Updated at : 28 Apr 2025 10:22 PM (IST)
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Madhubani : स्वास्थ्य संस्थानों में डेडीकेटेड वार्ड व पर्याप्त मात्रा में आवश्यक दवा रखें: डीडीसी

प्रभावित मरीज को चिह्नित कर समुचित उपचार करने का निर्दैश दिया.

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डीडीसी की अध्यक्षता में एईएस-जेई की रोकथाम के लिए जिला टास्क फोर्स की हुई समीक्षा बैठक Madhubani : मधुबनी . जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम और जापानी इंसेफेलाइटिस बीमारी की रोकथाम के साथ उस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सोमवार को उप विकास आयुक्त दीपेश कुमार की अध्यक्षता मे जिलास्तरीय टास्क फोर्स की बैठक हुई. उप विकास आयुक्त ने जिले में एईएस – जेई पर पूर्ण नियंत्रण के लिए संबंधित विभाग को आपस में समन्वय स्थापित कर गंभीरता पूर्वक काम करने का निर्देश दिया. उन्होने आंगनबाड़ी केंद्र, शिक्षा विभाग, परिवहन, जीविका, पंचायती राज विभाग, आपूर्ति विभाग एवं निजी संस्थानों को जमीनी स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार कर लोगों में जागरुकता लाने का निर्देश दिया. साथ ही प्रभावित मरीज को चिह्नित कर समुचित उपचार करने का निर्दैश दिया. गर्मियों में बढ़ जाती है एइएस के मामले जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डीएस सिंह ने कहा है कि गर्मी बढ़ने के साथ ह एईएस-जेई का प्रकोप बढ़ जाता है. इससे बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग एवं प्रभावित प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, आशा, आईसीडीएस, जीविका के साथ ही अन्य विभाग को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया गया है. ताकि एईएस-जेई के प्रभाव से बच्चों को सुरक्षित किया जा सके. उन्होंने कहा कि एईएस-जेई से ग्रसित बच्चों को अस्पतालों में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा की सुविधा उपलब्ध करने का निर्देश दिया गया है. प्रत्येक पीएचसी एवं सीएचसी में एईएस मरीजों के लिए दो-दो बेड, अनुमंडलीय अस्पतालों में चार-चार बेड व सदर अस्पताल में 10 बेड सुरक्षित रखा गया है. डॉ. डीएस सिंह ने एईएस बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए सभी पीएचसी के प्रभारियों व स्वास्थ्य अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है. उन्होंने कहा कि अप्रैल से जुलाई तक छह माह से 15 वर्ष तक के बच्चों में चमकी बीमारी की संभावना अधिक होती है. बच्चों की सुरक्षा के लिए धूप में निकलने से बचना चाहिए. अधपके कच्चे फल का सेवन नहीं करना चाहिए. साथ ही साफ सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए. चमकी से प्रभावित बच्चों का सही समय पर इलाज कराना जरूरी है. उन्होंने कहा कि चमकी के लक्षण मिलते ही बच्चों को तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाएं. प्रचार प्रसार के साथ जागरूकता है जरूरी डीडीसी दीपेश कुमार ने पीएचसी स्तर पर कोआर्डिनेशन प्लान तैयार कर ग्रास रूट लेवल पर मरीजों का इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने गोल्डन आवर में मरीजों के लिए एंबुलेंस के साथ आवश्यक दवा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. विशेषकर महादलित टोला में अभियान चलाकर विकास मित्र, आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, छोटे बच्चों एवं उनके परिजनों को जागरुक करने का निर्देश दिया. उन्होंने नियंत्रण कक्ष को हर हाल में 24 घंटे क्रियाशील रखने को कहा. बैठक में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एसके विश्वकर्मा, सीडीओ डॉ. जीएम ठाकुर, डीपीएम पंकज मिश्रा, पुरुषोत्तम कुमार, अमर कुमार, डिंपू कुमार, यूनिसेफ के एसएमसी प्रमोद कुमार झा, पिरामल के धीरज कुमार सिंह, सी-फार के अमन कुमार, युएनडीपी के अनिल कुमार सहित कई पदाधकारी उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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