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Madhubani : नहाय खाय के साथ 13 सितंबर से शुरू होगा जितिया पर्व, 15 सितंबर को पारण

Updated at : 10 Sep 2025 10:15 PM (IST)
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Madhubani : नहाय खाय के साथ 13 सितंबर से शुरू होगा जितिया पर्व, 15 सितंबर को पारण

महापर्व जितिया संतान की लंबी आयु, निरोगी काया और उनकी सुख समृद्धि की कामना से किए जाने वाले मिथिलांचल का जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है.

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मधुबनी . महापर्व जितिया संतान की लंबी आयु, निरोगी काया और उनकी सुख समृद्धि की कामना से किए जाने वाले मिथिलांचल का जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है. जितिया व्रत का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है. आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत रखा जाता है. इस व्रत को पुत्रवती माताएं अपने संतान की लंबी आयु लिए करती है. अपने बच्चों की सुरक्षा और उनकी लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है. जितिया व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश में मनाया जाता है. जितिया व्रत की कई कथाएं प्रचलित हैं. जिनमें मुख्य रूप से भगवान जीमूतवाहन की कथा और महाभारत काल से जुड़ी कथाएं शामिल हैं. इन कथाओं के अनुसार, जीमूतवाहन ने अपनी परोपकारी प्रवृत्ति से नागों की जान बचाई थी. जबकि महाभारत काल में भगवान कृष्ण ने उत्तरा के मृत बालक को जीवित कर परीक्षित का नाम दिया था. इसके बाद संतान की दीर्घायु के लिए यह व्रत किया जाने लगा. एक अन्य कथा चील और सियारिन के पिछले जन्म से जुड़ी है. इसमें चील ने व्रत का पालन किया और सियारिन ने तोड़ दिया. इसके कारण चील को दीर्घायु संतान सुख मिला. पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया कि इस बार जितिया व्रत 14 सितंबर रविवार को रखा जाएगा. जबकि पारण 15 सितंबर को. पंचांग के मुताबिक, हर साल आश्विन मास में कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को नहाय खाय के साथ जितिया व्रत प्रारम्भ होता है. इस बार जितिया का नहाय खाय 13 सितंबर को होगा. वहीं, 14 सितंबर, रविवार के दिन सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में जितिया ओठगन रहेगा. मिथिला क्षेत्रीय पंचांग अनुसार – 13 सितंबर शनिवार षष्ठी तिथि दिन 11:13 तक. इसके बाद सप्तमी तिथि आरंभ. नहाय – खाय, रात में ओठगन। रात 03:35 से 04:35 तक 14 सितंबर रविवार सप्तमी तिथि दिन 08: 50 तक. इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ. भाद्री रवि व्रत समाप्त. जीमूतवाहन व्रत (जितिया), जीमूतवाहन पूजा 15 सितंबर सोमवार अष्टमी तिथि प्रातः 06:35 तक. इसके बाद नवमी तिथि आरंभ, जीमूतवाहन व्रती के लिए पारणा. प्रातः 0635 बजे के बाद मातृनवमी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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