Madhubani News : नहाय खाय के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व शनिवार से होगा शुरू, तैयारी जोरों पर

Published by : GAJENDRA KUMAR Updated At : 23 Oct 2025 10:05 PM

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छठ आस्था का महापर्व है, जो सूर्य व छठी मैया को समर्पित है. यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है.

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मधुबनी. छठ आस्था का महापर्व है, जो सूर्य व छठी मैया को समर्पित है. यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. चार दिवसीय सूर्य षष्ठी व्रत शनिवार 25 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ से शुरू होकर 28 अक्टूबर मंगलवार को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर पारण के साथ संपन्न होगा. नहाय-खाय शनिवार (25 अक्टूबर): को इस दिन व्रती नदी या तालाब में स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं, जिसमें लौकी और भात प्रमुख है. खरना रविवार (26 अक्टूबर) : इस दिन महिलाएं गुड़ और खीर का प्रसाद बनाती हैं और छठी मैया को भोग लगाने के बाद इसका सेवन करती हैं. इसके बाद से 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है. संध्याकालीन अर्घ्य सोमवार (27 अक्टूबर): इस दिन व्रती अस्त होते सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं. उदीयमान सूर्य को अर्घ्य मंगलवार (28 अक्टूबर): छठ पर्व के अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है. छठ पर्व आस्था, श्रद्धा और आत्मसंयम का प्रतीक है. यह पर्व सूर्य देव की उपासना का पर्व है, इसमें सूर्य देव को जीवन का मूल स्रोत माना जाता है. मान्यता है कि छठी मैया सूर्य देव की बहन हैं, और उनकी संयुक्त पूजा की जाती है. यह पर्व विशेषकर संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए मनाया जाता है. छठ पूजा अपने पर्यावरण-अनुकूल अनुष्ठानों के लिए जानी जाती है. यह पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. धार्मिक दृष्टि से छठ महा पर्व का महत्व : पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया कि सूर्यदेव को जीवन और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है. उनकी उपासना से जीवन में सकारात्मकता और शक्ति आती है. वहीं छठी मैया को संतान की देवी माना जाता है. उनकी पूजा से बच्चों को स्वास्थ्य और सुरक्षा मिलती है, और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है. सूर्य को अर्घ्य देने से मानव और प्रकृति के बीच गहरा संबंध स्थापित होता है, और यह पर्व प्रकृति के प्रति श्रद्धा सिखाता है. छठ पूजा की कई पौराणिक कथाएं हैं. इसमें सबसे प्रमुख द्रौपदी और राजा प्रियव्रत से जुड़ी कथाएं हैं. एक कथा के अनुसार, महाभारत काल में द्रौपदी ने पांडवों के राजपाट वापस पाने के लिए छठ व्रत रखी थी. दूसरी कथा राजा प्रियव्रत से जुड़ी है, जिनके मृत पुत्र को छठी मैया की पूजा करने के बाद जीवन मिला. कुछ मान्यताओं के अनुसार, सूर्य के परम भक्त कर्ण ने भी सबसे पहले छठ पूजा की शुरुआत की थी. छठ पूजा में ठकुआ, लड्डू, सहित विभिन्न प्रकार के फल, गन्ना सहित कई अन्य हरी सब्जियां एवं चावल के आंटे से बना भूसवा विशेष प्रसिद्ध है. छठ पूजा की अधिकांश सामग्री प्राकृतिक होती है. इसमें फल, सब्जियां, गन्ने के डंठ पूजा में बांस की टोकरियों, नारियल, केला, शकरकंद, सुथनी, मूली और अदरक का हरा पौधा जैसी प्राकृतिक चीजें शामिल हैं, जो इस त्योहार को प्रकृति से जोड़ती हैं. छठ पूजा का कार्यक्रम 25 अक्टूबर 2025 शनिवार नहाय – खाय (संयम). 26 अक्टूबर 2025 रविवार खड़ना पर्व. 27 अक्टूबर 2025 सोमवार सायं कालिकार्घदान 05:05 बजे (सूर्योदय 06:25, सूर्यास्त 05:34) 28 अक्टूबर 2025 मंगलवार प्रातः कालिकार्घदान 06:25 बजे (सूर्योदय 06:25, सूर्यास्त 05:34)

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