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Madhubani : ठंड के दिनों में, कोल्ड डायरिया बच्चों के लिए है घातक

Updated at : 08 Dec 2025 9:48 PM (IST)
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Madhubani : ठंड के दिनों में, कोल्ड डायरिया बच्चों के लिए है घातक

गिरते तापमान की वजह से बढ़ती ठंड में सेहत का ख्याल रखना बेहद जरुरी हो जाता है.

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बैक्टीरिया से ज्यादा खतरनाक है वायरल डायरिया मधुबनी . गिरते तापमान की वजह से बढ़ती ठंड में सेहत का ख्याल रखना बेहद जरुरी हो जाता है. ठंड में स्वास्थ्य को जरा सा नजरअंदाज करना लोगों के लिए भारी पड़ सकता है. खासकर वैसे लोग जो पहले से ही किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्त हैं. दिल की बीमारी से लेकर सांस के मरीजों के लिए ठंड काफी खतरनाक साबित होती है. हांलांकि ठंड में सामान्य लोगों को भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे मौसम में उच्च रक्तचाप, हार्ट अटैक और पैरालाइसिस का भी खतरा तो बढ़ता ही है, साथ ही साथ बच्चों से लेकर बड़ों तक में कोल्ड डायरिया का भी खतरा बढ़ जाता है. कोल्ड दस्त से बचाव न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. इसलिए जरुरी है इन दिनों कोल्ड दस्त से बच्चों एवं बड़ों का बचाव किया जाये. पिछले दो हफ्तों से जिले में बढ़ी ठंड की वजह से कोल्ड डायरिया के मरीजों में भी बढ़ोतरी हो रही है. इसमें ज्यादातर संख्या बच्चों की है. सदर अस्पताल से लेकर प्रखंड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के ओपीडी में ठंड की वजह से सर्दी, खांसी, बुखार के साथ साथ बच्चों में कोल्ड डायरिया के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रहा है. इसमें पांच साल से कम उम्र के बच्चे ज्यादा शामिल हैं. चिकित्सकों द्वारा सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. वायरल डायरिया है खतरनाक : शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विवेकानंद पाल सिविल ने बताया कि कोल्ड डायरिया मुख्यतः वायरल अटैक से होता है. इसके अलावा ठंड में जोयारोट्रो वायरस, इंट्रो वायरस ज्यादा होता है. इस वायरस से बच्चों में पेचिस की शिकायत होती है. उन्होंने बताया कि एक दिन में दो या दो से अधिक बार पानी जैसा दस्त हो तो यह रोट्रो एवं नोरो वायरस का लक्षण हो सकता है. इसके अलावा ठंड के दिनों में पानी कम पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, और बच्चे कोल्ड डायरिया की चपेट में आ जाते हैं. डॉक्टर पाल ने कहा कि कि गर्मी के दिनों में होने वाले डायरिया बैक्टेरिया से होता है और ठंड के दिनों में होने वाला डायरिया वायरस से होता है जो बैक्टीरियल डायरिया से खतरनाक होता है. शुरुआती लक्षण दिखने पर ओआरएस का घोल और जिंक देनी चाहिए. ताकि बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बरकरार रहे. उन्होंने कहा कि बच्चों को अधिक से अधिक ठंड से बचा कर रखें. कोल्ड डायरिया के लक्षण दिखने पर बरतें सावधानी: शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ विवेकानंद पाल ने कहा कि गर्मी के साथ साथ ठंड में भी बच्चों में डायरिया होता है. इसे कोल्ड डायरिया कहते हैं. यह अधिकांशत: पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होता है. इसलिए ठंड के दिनों में बच्चों को बचा कर रखना चाहिए. डा.पाल ने कहा कि कोल्ड डायरिया होने पर सावधानी बरतने की आवश्यकता है. बच्चों में कोल्ड डायरिया का लक्षण दिखने पर तुरंत अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में संपर्क कर उचित सलाह लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के किये घातक साबित हो सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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