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Madhubani News : ऑक्सीजन प्लांट के बाद भी जंबो सिलेंडर पर खर्च की जा रही राशि

Updated at : 21 Dec 2025 10:31 PM (IST)
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Madhubani News : ऑक्सीजन प्लांट के बाद भी जंबो सिलेंडर पर खर्च की जा रही राशि

सदर अस्पताल में स्थित आक्सीजन प्लांट कर्मियों के अभाव में बंद है. विडंबना है कि सदर अस्पताल में 1 हजार एलपीए आक्सीजन प्लांट के अधिष्ठापित होने के बाद भी सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए प्रतिमाह 250 से अधिक जंबो सिलेंडर की खपत हो रही है.

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मधुबनी.

सदर अस्पताल में स्थित आक्सीजन प्लांट कर्मियों के अभाव में बंद है. विडंबना है कि सदर अस्पताल में 1 हजार एलपीए आक्सीजन प्लांट के अधिष्ठापित होने के बाद भी सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए प्रतिमाह 250 से अधिक जंबो सिलेंडर की खपत हो रही है. इसके लिए सदर अस्पताल प्रबंधन प्रतिमाह लगभग 80-85 हजार रुपये से अधिक राशि का भुगतान सिलेंडर आपूर्ति कर्ता एजेंसी को कर रहा है.

सदर अस्पताल परिसर में अधिष्ठापित आक्सीजन प्लांट से अधिष्ठापन काल से लेकर अबतक निर्वाध रुप से जेनरेशन नहीं हो पाया. विदित हो कि शुरुआती दौर में सरकार द्वारा एक आइटीआइ प्रशिक्षित टैक्नीशियन की तैनाती की गई थी. इसके द्वारा एक शिफ्ट में आक्सीजन प्लांट से आक्सीजन की आपूर्ति किया जाता था. मार्च महीने में ईडी द्वारा संबंधित टैक्नीशियन की सेवा भी समाप्त कर दी गई. इसके कारण आक्सीजन जेनरेशन प्लांट से आपूर्ति ठप है. यही हाल जिले के तीनों अनुमंडलीय अस्पतालों एवं अररिया संग्राम स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सह ट्रामा सेंटर में अधिष्ठापित आक्सीजन प्लांट की है. विदित हो कि जिले के अनुमंडलीय अस्पताल जयनगर, अनुमंडलीय अस्पताल फुलपरास, अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर एवं अररिया संग्राम स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सह ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन प्लांट अधिष्ठापित किया गया है. लेकिन सदर अस्पताल के अलावा कहीं भी टेक्नीशियन पदस्थापित नहीं किया गया. सदर अस्पताल में भी बीते एक साल से टैक्नीशियन नहीं रहने के कारण ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप है.

कोरोना काल में अधिषठापित किया गया था आक्सीजन प्लांट

विदित हो कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की समस्या उत्पन्न होने के बाद सदर अस्पताल सहित अनुमंडलीय अस्पताल एवं अररिया संग्राम स्थित ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन प्लांट अधिष्ठापित किया गया था. ताकि जिले में ऑक्सीजन की निर्बाध रूप से आपूर्ति हो सके. स्वास्थ्य संरचनाओं के विकास के दृष्टिकोण से यह बड़ी उपलब्धि थी. लेकिन इसका फायदा सदर अस्पताल के अलावा कहीं भी मरीजों को नहीं मिल रहा. ऐसे में ऑक्सीजन प्लांट होने के बाद भी ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है. वर्तमान में सदर अस्पताल में जंबो सिलेंडर के मद में प्रतिमाह हजारों रुपये का भुगतान संबंधित एजेंसी को किया जा रहा है.

ऑक्सीजन पाइप से नहीं हो रहा सप्लाई

सदर अस्पताल के एसएनसीयू, इमरजेंसी, चाइल्ड वार्ड, महिला वार्ड, पुरुष वार्ड एवं कैदी वार्ड में लगाए गए ऑक्सीजन पाइप से 24 घंटे ऑक्सीजन की सप्लाई नही हो रहा है. अस्पताल में वर्तमान में प्रतिमाह 250 से अधिक जंबो सिलेंडर की खपत हो रही है. इसकी आपूर्ति मेधा इंटरप्राइजेज ट्रेडर्स दरभंगा द्वारा की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग सभी ऑक्सीजन प्लांट को क्रियाशील करने का निर्देश दिया है. लेकिन किसी भी ऑक्सीजन प्लांट में आईआईटी टेक्नीशियन की नियुक्त विभाग द्वारा अब तक नहीं की गई है. आलम यह है कि सदर अस्पताल स्थित ऑक्सीजन पीएसए प्लांट के लिए 250 केवीए का ट्रांसफार्मर जनरेटर सेट अधिष्ठापित किया गया है, लेकिन उक्त जनरेटर सेट से इंधन की आपूर्ति नहीं होने के कारण विद्युत आपूर्ति नहीं हो रहा है.

क्या है पीएसए ऑक्सीजन प्लांट कैसे करता है काम

ऑक्सीजन को वायुमंडलीय हवा से दबाव स्विंग के माध्यम से सोखना तकनीक से अलग करता है कंप्रेस्ड हवा. जिसमें लगभग 21 प्रतिशत ऑक्सीजन तथा 78 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है. जिसको जियोलाइट आणविक छलनी से होकर गुजारा जाता है. इससे ऑक्सीजन अलग हो जाता है. अस्पतालों में पीएसए प्लांट लग जाने से सिलेंडर की समस्या खत्म हो सकता था, लेकिन प्लांट के स्थापित होने के दो- तीन वर्षों बाद भी लचर व्यवस्था के कारण आपूर्ति क्षमता के अनुसार नहीं हो पा रहा है. अस्पताल में ऑक्सीजन उत्पादन के बाद पाइप के माध्यम से बेड तक पहुंचाया जाता है. ऑक्सीजन प्लांट में पदस्थापित टेक्नीशियन बबलू कुमार सिंह ने कहा कि कर्मियों के अभाव के कारण ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रतिदिन 8 घंटे ही की जा रही है. उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन प्लांट का लेवल 90 से 93 तक रहने पर ऑक्सीजन का सप्लाई प्रेशर के अनुरूप बेहतर ढंग से हो पाता है. विदित हो कि कार्यपालक निदेशक सुहर्ष भगत द्वारा जारी पत्र में कहा गया है, कि बीएमएसआइसीएल द्वारा ऑक्सीजन प्लांट के ऑपरेशन, मेंटेनेंस एवं ट्रबुल सुटिंग के लिए एजेंसी का चयन कर लिया गया है. इसके बाद संबंधित एजेंसी द्वारा टैक्नीशियन प्रतिनियुक्त कि जाएगा. इसके साथ ही ऑक्सीजन प्लांट को 24 घंटे क्रियाशील बनाए रखने के लिए सभी ऑक्सीजन प्लांट में आईटीआई टेक्निशियन पदस्थापित कर ऑक्सीजन प्लांट का संचालन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GAJENDRA KUMAR

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By GAJENDRA KUMAR

GAJENDRA KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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