11 सौ आंगनबाड़ी सेविका व सहायिकाओं ने दी गिरफ्तारी

Updated at :11 Apr 2017 6:39 AM
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11 सौ आंगनबाड़ी सेविका व सहायिकाओं ने दी गिरफ्तारी

हक की खातिर. चार घंटे से अधिक जाम रही सड़क जेल भरो आंदोलन के तहत किया आंदोलन का शंखनाद सेविका को सुपरवाइजर व सहायिका को सेविका पद पर प्रोन्नति की मांग 20 अप्रैल को सूबे की सभी सड़कें होंगी जाम राज्यव्यापी आंदोलन में लिया गया निर्णय मधुबनी : विभिन्न मांगों को लेकर जिले भर से […]

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हक की खातिर. चार घंटे से अधिक जाम रही सड़क

जेल भरो आंदोलन के तहत किया आंदोलन
का शंखनाद
सेविका को सुपरवाइजर व सहायिका को सेविका पद पर प्रोन्नति की मांग
20 अप्रैल को सूबे की सभी सड़कें होंगी जाम राज्यव्यापी आंदोलन में लिया गया निर्णय
मधुबनी : विभिन्न मांगों को लेकर जिले भर से पहुंचे 11 सौ से अधिक आंगनबाड़ी सेविका सहायिका ने नगर थाना में अपनी गिरफ्तारी दी. इससे पूर्व इन महिलाओं ने करीब चार घंटे तक समाहरणालय के सामने सड़क जाम रखा. वहीं समाहरणालय के मुख्य द्वार को भी बंद कर दिया. सड़क जाम होने के कारण इस पथ पर आवाजाही पूरी तरह बाधित रही.
हमें भी मिले सरकारी कर्मी का दर्जा :आंगनबाड़ी सेविका सहायिकाओं का कहना था कि जब तक आंगनबाड़ी सेविका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा नही दिया जाता है. तक तक इसी प्रकार चरणबद्ध आंदोलन किया जायेगा. वहीं चुनाव लड़ने व अन्य तरह के सुविधाओं से रोक हटाये जाने, आंगनबाड़ी सेविका को सुपरवाइजर तथा सहायिका को सेविका के पद पर प्रोन्नति दिये जाने, अवैध ढ़ंग से चयन रद्द करना बंद किये जाने,न्यायिक प्रक्रिया को सुलभ किये जाने सहित अन्य मांग कर रही थी.
राज्यव्यापी आन्दोलन के तहत जिला समाहरणालय पर उपस्थित सैकड़ों आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका को संबोधन करते हुए बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन के महासचिव शवनम झा व अध्यक्ष रामपरी देवी ने कहा कि 24 मार्च से ही सेविका व सहायिकाओं का धरना प्रखंड परियोजना से लेकर जिला व राज्य स्तर पर धरना प्रदर्शन कर अपनी मांगों की पूर्ति का 12 सूत्री मांग भी सौपा गया. लेकिन सरकार अपनी कुम्भकर्णी निन्द्रा से अब तक नही जगी है.
आंदोलनकारी सेविका सहायिकाओं का कहना था कि आंदोलन का अगला चरण पटना में होगा. जहां राज्य की सभी सेविका व सहायिकाओं द्वारा 20 अप्रैल को पटना के सभी चौक चौराहों को जाम किया जायेगा. उक्त दोनों नेता द्वय के नेतृत्व में दर्जनों सेविका व सहायिकाओं ने इस अवसर अपनी गिरफ्तारी देकर अपना आक्रोश व्यक्त किया. इस मौके पर सेविकाओं ने सरकार से मांग किया कि जब तक सरकार सेविका-सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता है
तब तक प्रतिमाह 18 हजार रूपये न्यूनतम मानदेय दे. इसके साथ ही गोवा और तेलांगाना की भांति बिहार सरकार भी 7000 रुपये सेविका और 4500 रूपये सहायिका को वेतन दिया जाय. वहीं अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दिया जाय. इसके साथ ही सेवानिवृत के पश्चात 5 हजार रूपये मासिक पेंशन या एक मुस्त 5 लाख रुपये दिये जाने की मांग कर रही थी.
ये मांग भी हैं शामिल : हड़ताल अवधि का मानदेय न काटकर कार्य में समायोजन किया जाय. आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं की मार्ग दर्शिका में नियमानुकुल संसोधन किया जाय. श्रम कानून में संशोधन, नीजी करण, उदारीकरण, ठेकाप्रथा, मानदेय प्रथा पर रोक लगायी जाय. सेवा निवृति पेंशन, ग्रेच्यूटी व पी एफ सहित सभी सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध करायी जाय. आइसीडीए के नीजीकरण नही करते हुए गैर सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहो व कारपोरेट आदि को सौपने की साजिश पर रोक लगायी जाय.
मुखिया संघ ने भी किया समर्थन : सभा को संबोधित करते हुए जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष कृपानन्द आजाद ने सेविका सहायिकाओं की मांगों को जायज करार देते हुए पोलियो मुक्त भारत को बनाने वाली आंगनबाड़ी कर्मियों को सरकारी शोषण से मुक्त करने की मांग किया. सभा को संरक्षण कमल नारायण सिंह, पींकी देवी, विद्या देवी, मंजू देवी, रंजू देवी, सविला खातून, रंजना कुमारी, सरिता देवी, संगीता देवी, रेणु देवी, रीता देवी, कविता देवी, मो हसीना खातुन, विभा ठाकुर, इशरत परबीन, दीप शिखा, किरण देवी, नीलम देवी, रामशीला देवी, अंजू देवी, वीणा झा, शिवो देवी, मनोरमा देवी आदि ये भी संबोधित किया.
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