10 दिनों से नहीं हो रही सफाई

Updated at :10 Apr 2017 6:09 AM
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10 दिनों से नहीं हो रही सफाई

व्यवस्था. एनजीओ का कार्यकाल समाप्त, नये साल में नहीं मिला काम मधुबनी : शहर में साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गयी है. जिसके कारण शहर में कचड़ो का अंबार लग गया है. वही नाले की सफाई नहीं होने दुर्गंध देना शुरू कर दिया है. दरअसल, नगर परिषद क्षेत्र में साफ-सफाई का कार्य स्वयंसेवी संस्था […]

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व्यवस्था. एनजीओ का कार्यकाल समाप्त, नये साल में नहीं मिला काम

मधुबनी : शहर में साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गयी है. जिसके कारण शहर में कचड़ो का अंबार लग गया है. वही नाले की सफाई नहीं होने दुर्गंध देना शुरू कर दिया है. दरअसल, नगर परिषद क्षेत्र में साफ-सफाई का कार्य स्वयंसेवी संस्था को दिया गया था. वित्तीय वर्ष 2016-17 के समाप्ति के बाद नये रूप से किसी भी स्वयंसेवी संस्था को कार्य नहीं दिया गया है. जिसके बाद 31 मार्च के बाद स्वयंसेवी संस्था ने करार के मुताबिक काम बंद कर दिया है. एक सप्ताह से शहर की सफाई व्यवस्था ठप है. हालांकि नगर परिषद के सफाई कर्मी मुख्य सड़कों की सफाई कर रहे हैं. पर सफाई कर्मी के कमी के कारण शहर की सफाई नहीं हो पाती है.
निकाली गयी निविदा. नये वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए शहर में साफ-सफाई के लिए निविदा का प्रकाशन किया गया था. नगर परिषद निविदा की प्रक्रिया पूरी कर लिया है. नये रूप से साफ-सफाई का जिम्मा किसे दिया गया. यह बताने से कार्यालय कर्मी परहेज ही कर रहे हैं. पर इतना जरूर है कि 01 मार्च से शहर में साफ-सफाई बंद है. इधर बीते सात एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी किसी को सफाई का काम नहीं दिये जाने से अब तरह तरह के सवाल उठने लगे हैं.
सभी वार्डों की होगी सफाई . अब नये वित्तीय वर्ष में सभी तीस वार्ड की सफाई एनजीओ के द्वारा ही करायी जायेगी. इससे पूर्व मात्र 21 वार्ड की सफाई ही एनजीओ के द्वारा करायी जाती थी. बाकी बचे दस वार्ड की सफाई आउट सोर्सिंग व कार्यालय के सफाई कर्मी के द्वारा की जाती थी.
जल्द ही एनजीओ को सौंपी जायेगी जिम्मेदारी. इस बाबत कार्यपालक पदाधिकारी जटाशंकर झा ने बताया है कि जल्द ही एनजीओ को नियम के अनुकूल काम दे दिया जायेगा. इसके बाद पूर्व की तरह ही सफाई का काम किया जायेगा.
अब 30 वार्डों की सफाई की जिम्मेदारी होगी एनजीओ के पास
हर वार्ड पर करीब 15 लाख रुपये होंगे खर्च
सफाई मद में 30 वार्ड के लिये मासिक करीब 15 लाख रुपये खर्च किये जाने की योजना विभाग के पास है. इस अनुसार से सालाना करीब 11 लाख रुपये खर्च किये जाते थे. इसमें से करीब चार लाख 10 हजार रुपये एनजीओ को 21 वार्ड की सफाई के लिये दिये जाते थे. जबकि करीब 7.50 लाख सफाई कर्मी पर खर्च होते हैं. इस बार 30 वार्ड की सफाई के लिये करीब 7.50 लाख रुपये एनजीओ को दिये जायेंगे. जबकि सफाई कर्मी पर पूर्व की तरह ही खर्च होगा.
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