परमिट व नियम की अनदेखी
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :06 Apr 2017 5:13 AM
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मनमानी. निर्धारित दर से अधिक वसूला जा रहा है किराया मधुबनी : परिवहन विभाग बसों के परिचालन के लिए सभी स्टैंड से आगमन व प्रस्थान का समय निर्धारित किया है. इसमें एक्सप्रेस व लोकल बसों के लिए अलग अलग स्टॉपेज निर्धारित किया गया है. सरकार द्वारा मैक्सी व सिटी राइड के लिए कांट्रैक्ट परमिट निर्गत […]
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मनमानी. निर्धारित दर से अधिक वसूला जा रहा है किराया
मधुबनी : परिवहन विभाग बसों के परिचालन के लिए सभी स्टैंड से आगमन व प्रस्थान का समय निर्धारित किया है. इसमें एक्सप्रेस व लोकल बसों के लिए अलग अलग स्टॉपेज निर्धारित किया गया है. सरकार द्वारा मैक्सी व सिटी राइड के लिए कांट्रैक्ट परमिट निर्गत किया जाता है. मगर इसकी अनदेखी कर याित्रयों से अिधक किराया वसूला जाता है.
नियम का नहीं किया जा रहा पालन. बसों के परिचालन के लिए सभी स्टैंड से आगमन व प्रस्थान का समय निर्धारित किया जाता है. इसमें एक्सप्रेस एवं लोकल के लिए अलग अलग स्टॉपेज निर्धारित किये जाते हैं. सरकार द्वारा मैक्सी व सिटी राईड के लिए कांट्रैक्ट परमिट निर्गत किया जाता है. जिसका मतलब होता है कि मैक्सी एक स्टैंड से निकल कर दूसरे स्टैंड पर रूकेगी. बीच में कहीं नहीं रूकना है या यात्री को लेना है. पर यह नियम तो कागज तक ही सिमट कर रह गया है.
मैक्सी संचालक द्वारा हर चौक चौराहे पर रूकते हुए जाती है. जिसके कारण आये दिन यात्रियों को निर्धारित समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण ट्रेन, ऑफिस एवं कोर्ट कचहरी छूट जाता है.
किराये में भी मनमानी. बस संचालकों द्वारा किराये में भी मनमानी किया जा रहा है. खुद जिला मोटर्स वाहन एसोसिएशन की मानें तो प्रति किमी बस किराया 75 पैसे निर्धारित है. जबकि, वर्तमान में हर रूट में मैक्सी या बस में चढ़ने वाले यात्री से जिस प्रकार से किराया वसूली किया जा रहा है वह औसतन दो से ढाई रुपये तक प्रतिकिलोमीटर की दर से हो रहा है. जानकारी के अनुसार मधुबनी से बेनीपट्टी की दूरी करीब 25 किलोमीटर है. इसका निर्धारित किराया करीब उन्नीस रुपये होने चाहिए. पर बस चालक द्वारा 25 से तीस रुपये तक लिया जाता है. इसी प्रकार मधुबनी से रहिका की दूरी आठ किलोमीटर है.
किराया 6 रुपये होना चाहिए, पर लिया जाता है कम से कम 10 रुपये. यही हाल मधुबनी से जयनगर, मधुबनी से खुटौना, पंडौल, झंझारपुर सहित अन्य जगहों का है. किलोमीटर के आधार पर तो कहीं भी किराये की वसूली नहीं हो पा रही है. जानकारी के अनुसार मुख्यालय बस पड़ाव से जिले के विभिन्न भागों व प्रदेश के अन्य शहरों के लिए प्रतिदिन करीब 125 बस का परिचालन है. जबकि, 25 से 30 मैक्सी का भी परिचालन किया जाता है.
मिनटों का सफर घंटों में होता है तय
नहीं किया गया किराये का निर्धारण
विभाग द्वारा 2010 से ही किराये का निर्धारण नहीं किया गया है. जबकि इन वर्षों में दर्जनों बार डीजल, मोबिल एवं पेट्रोल की कीमत बढ़ायी गयी है.
मुन्ना ठाकुर, अध्यक्ष, जिला मोटर्स वाहन एसोसिएशन
आधे घंटे की दूरी दो घंटे में तय
सतलखा के रवींद्र कुमार झा को दिल्ली जाना था. शहीद एक्सप्रेस की टिकट था. सतलखा से मधुबनी की दूरी करीब आठ किलोमीटर होगी. बस से आने में मुश्किल से 15 मिनट भी लगता हो. सुबह करीब छह बजे घर से निकले. ट्रेन का समय 7 बजकर 15 मिनट था. बेनीपट्टी से एक मैक्सी मधुबनी के लिये आ रही थी. सतलखा में ही रवींद्र कुमार सपरिवार बस पर चढे.
मैक्सी सतलखा से खुली तो रहिका में करीब आधे घंटे तक रोक दिया और पैसेंजर को चढ़ाने का इंतजार बस रुकी रही. यहां से फिर बस खुली तो कई जगहो पर इसी प्रकार रूकती रही और यात्रियों को चढाने उतारने का सिलसिला जारी रहा. समय निकलता जा रहा था. रवींद्र रह – रह कर बस कंडक्टर से अपनी परेशानी बताते हुए समय से स्टैंड तक पहुंचाने को कहते रहे. जिससे कंडक्टर के साथ उनकी कहा सुनी भी हो गयी. किसी तरह स्टैंड पहुंचे और दौड़ते हुए स्टेशन तक आये. गनीमत थी कि ट्रेन कुछ लेट था और ट्रेन मिल गयी.
एक घंटे के सफर में लगे चार घंटे
खुटौना से भी आर के मंडल ने मधुबनी स्टेशन आने के लिये बस पकड़ा. हाल वहीं. जगह जगह बस रूकती रही. घंटों लग गया मधुबनी आने में. खुटौना बरैल चौक से बस खुली तो भूपट्टी, बाबूबरही, पिपराघाट होते हुए करीब बीस जगहों पर रूकी. पैसेंजर चढते रहे, उतरते रहे. समय भागता गया. हाल यह हो गया कि जब तक आर के मंडल मधुबनी स्टेशन तक पहुंचते ट्रेन प्लेटफार्म पर लग गयी थी. सर पर सामान को लादे हुए दौड़कर स्टेशन पहुंचे. साथ में इनकी पत्नी, बेटा सभी दौड़ लगा रहे थे.
यह किसी एक रविंद्र या आर पी मंडल की परेशानी की बात नहीं है. जिले में बस में सफर करने वाले हर यात्री इस परेशानी से गुजर रहे हैं. जिस जगह पर पहुंचने में एक घंटा लगना होता है तीन से चार घंटे लग जाते हैं. कई बार तो इस परेशानी से खीझ कर यात्री व कंडक्टर में कहासुनी और मारपीट भी हो जाती है. दरअसल बस संचालकों द्वारा परमिट व नियम को ताक पर रखकर बसों का परिचालन किया जा रहा है.
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