डिफॉल्टर राइस मिलरों की बैंक गारंटी होगी जब्त

Updated at :05 Apr 2017 5:17 AM
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डिफॉल्टर राइस मिलरों की बैंक गारंटी होगी जब्त

सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, अब तक 23 मिलरों पर 32 करोड़ रुपये बकाया मामला साल 2011-12 से 2013-14 तक धान खरीद योजना का मधुबनी : वित्तीय वर्ष 11 -12, 12-13 व 13-14 में धान खरीद योजना में करोड़ों रुपये गबन करने वाले मिलरों के खिलाफ अब उच्चतम न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाने का आदेश […]

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, अब तक 23 मिलरों पर 32 करोड़ रुपये बकाया

मामला साल 2011-12 से 2013-14 तक धान खरीद योजना का
मधुबनी : वित्तीय वर्ष 11 -12, 12-13 व 13-14 में धान खरीद योजना में करोड़ों रुपये गबन करने वाले मिलरों के खिलाफ अब उच्चतम न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाने का आदेश अधिकारियों को दिया है. इसके तहत अब ऐसे सभी मिलरों के बैंक गारंटी संपत्ति को जब्त करने का आदेश दिया है. उच्चतम न्यायालय के इस आदेश के बाद मिलरों में हड़कंप मचा है. बीते करीब चार साल से ये मिलर राशि गबन कर फरार हैं. आलम यह है कि अब तक इन डिफाल्टर मिलरों के मिल का भी अता पता नहीं है.
नहीं मिल रहा मिलर का ठिकाना .राशि गबन करने वाले मिलरों का भी अब ठिकाना विभाग को नहीं मिल रहा है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिन 23 मिलरों पर विभाग का रकम बकाया है उनमें से 17 का मिल पूरी तरह बंद हो चुके हैं. इन मिलरों के द्वारा बैंक के जमा किये गये गारंटी को उच्चतम न्यायालय ने जब्त करने के आदेश दिये हैं.
दायर हो चुका है नीलाम पत्र वाद. इस बावत जिला प्रबंधक संतोष कुमार झा ने बताया कि कुछ मिलरों ने बकाये रुपये जमा किया है. सभी पर नीलाम पत्र वाद दायर कर दी गयी है.
धान लिया, नहीं की चावल की आपूर्ति
जिले के 23 मिलरों पर एसएफसी का 32 कड़ोर 82 लाख रुपये धान खरीद योजना में वर्ष 11-12, 12-13, एवं 13-14 का बकाया है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मिलर ने विभाग से धान तो लिया. पर इसके बदले में विभाग को दी जाने वाले चावल की आपूर्ति नहीं हो सकी. इसका बकाया रकम करीब 32 करोड़ आज के तिथि में विभाग बता रही है. को चावल आपूर्ति करने को लेकर विभाग द्वारा यह राशि भुगतान किया गया लेकिन समय पर एक भी मिलर विभाग को चावल नहीं दिया. विभाग द्वारा सख्ती बरते जाने के बाद कुछ मिलरों ने करीब 10 करोड़ रुपये जमा किये.
कई अधिकारियों पर भी हो चुकी है प्राथमिकी
विभाग ने बकायेदार मिलरों पर 28 प्राथमिकी नगर थाना में विभिन्न तिथियों में दर्ज किया गया है. इसमें कथित तौर पर विभाग के कर्मी व अधिकारियों की मिलीभगत की बात भी सामने आती रही है. तत्कालीन जिला प्रबंधक गुलाब हुसैन के आदेश पर विभाग के कई कार्यपालक सहायक पर प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है. इसमें अधिकारियों व कर्मियों की गलत तरीके से मिलरों को धान देने व दिये गये धान का इंट्री नहीं किया गया. जिस कारण कई मिलरों के द्वारा धान व चावल लेन देन का सही आकलन नहीं हो सका है.
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