स्वास्थ्य केंद्र में सौ रुपये में ग्रामीणों का इलाज
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :26 Feb 2017 4:16 AM
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कलुआही (मधुबनी) : कलुआही प्रखंड में 12 हजार की आबादी वाले मलमल गांव के ग्रामीणों को बीमार होने पर अब नीम हकीम खतरा-ए-जान के चक्कर में नहीं जाना पड़ता है. अल्पसंख्यक बाहुल्य इस गांव के युवाओं की पहल पर यहां स्वास्थ्य केंद्र खुल गया है, जिसमें एक महिला व एक पुरुष चिकित्सक को रखा गया […]
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कलुआही (मधुबनी) : कलुआही प्रखंड में 12 हजार की आबादी वाले मलमल गांव के ग्रामीणों को बीमार होने पर अब नीम हकीम खतरा-ए-जान के चक्कर में नहीं जाना पड़ता है. अल्पसंख्यक बाहुल्य इस गांव के युवाओं की पहल पर यहां स्वास्थ्य केंद्र खुल गया है, जिसमें एक महिला व एक पुरुष चिकित्सक को रखा गया है, जो यहां के लोगों का इलाज करते हैं. गांव के लोगों ने एंबुलेंस भी खरीद ली है, जिसकी वजह से गंभीर मरीजों को मधुबनी, दरभंगा या पटना ले जाने में आसानी होती है.
मलमल गांव में स्वास्थ्य केंद्र की शुरुआत नौ महीने पहले हुई थी, तब यहां के 20 युवाओं ने इसकी पहल की थी. ये सभी युवा बड़े शहरों में काम करते हैं. इन्होंने आपसी मदद से स्वास्थ्य केंद्र खोलने का फैसला लिया. इससे पहले गांव के लोगों को इलाज के लिए तीन किलोमीटर दूर कलुआही पीएचसी जाना पड़ता था, जहां अक्सर डॉक्टर व दवाएं नहीं मिलती थीं. हार कर गांव के लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ता है. अगर कोई गंभीर रूप से बीमार होता, तो एंबुलेंस के लिए भटकना पड़ता था.
पहले से सामाजिक रूप से जागरूक मलमल गांव के लोगों ने स्वास्थ्य केंद्र के लिए वेलफेयर सोसायटी बनायी. इसके अध्यक्ष गजनफर हुसैन व सचिव अनवर इमाम बने. इसके सदस्य वो 20 युवा भी हैं, जिन्होंने इसका सपना देखा था. सोसायटी बनने के बाद युवाओं ने हर महीने एक हजार रुपये जमा करने शुरू किये. गांव के लोगों ने भी मदद की और स्वास्थ्य केंद्र खुल गया. सोसायटी के अध्यक्ष गजनफर हुसैन कहते हैं कि हमारे यहां हेपेटाइटिस बी का टीका व टीबी का मुफ्त इलाज होता है.
स्वास्थ्य केंद्र में डॉ संतोष कुमार व डॉ तमन्ना रूही काम कर रहे हैं. मलमल गांव का अगर कोई बीमार होता है, तो उसे इलाज के लिए एक सौ रुपये जमा करने होते हैं. इसी में उसे दवा समेत सभी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं. आवश्यकता होने पर भर्ती करके ऑक्सीजन भी लगायी जाती है. मरीजों से
स्वास्थ्य केंद्र में सौ रुपये….
जो पैसा मिलता है, वो स्वास्थ्य केंद्र में जमा हो जाता है. हर माह गांव के लोग अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से मरीजों के इलाज का खर्च उठाते हैं. कोई दस मरीजों के इलाज पर आनेवाला खर्च देता है, तो कोई बीस. ऐसे ही स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है.
महिला चिकित्सक होने की वजह से गांव की महिलाओं को भी इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ता है. हालांकि अभी महिला चिकित्सक स्वास्थ्य केंद्र में सप्ताह में दो दिन ही बैठती हैं, जबकि पुरुष डॉक्टर 24 घंटे रहते हैं. स्वास्थ्य केंद्र अभी गांव के मदरसा के छात्रावास में चल रहा है, लेकिन इसके लिए अलग से भवन बनाने का काम शुरू हो गया है, जिसका निर्माण जल्द ही पूरा होने की बात कही जा रही है.
चल रहा गर्ल्स हाइस्कूल
मलमल गांव के लोग पहले से प्रगतिशील रहे हैं. यहां 1991 में सफा गर्ल्स हाइस्कूल खुला था, जिसमें अब समस्तीपुर, दरभंगा से आकर छात्राएं पढ़ रही हैं. मधुबनी जिले के विभिन्न प्रखंडों की भी बच्चियां यहां शिक्षा ले रही हैं. इनके रहने के लिए गांव में की हॉस्टल की सुविधा है. ग्रामीण बताते हैं कि बदलते जमाने के साथ हम लोगों को महसूस हुआ कि हमारी बच्चियां पढ़ाई में पिछड़ रही हैं. इसी वजह से हम लोगों ने 26 साल पहले स्कूल खोलने का फैसला लिया था.
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