लाखों खर्च के बाद भी जिप को नहीं हो रहा लाभ

Published at :08 Feb 2014 4:38 AM (IST)
विज्ञापन
लाखों खर्च के बाद भी जिप को नहीं हो रहा लाभ

मधुबनीः जिला परिषद के करोड़ों की संपत्ति विगत कई सालों से बरबाद हो रही है़. लाखों रुपये सालाना राजस्व का हानि हो रही है़ जिस विकास की परिकल्पना की गयी थी ना तो वह विकास हुआ और ना ही बेरोजगार युवकों को व्यवसाय का अवसर प्राप्त हुआ़. जिला परिषद एवं डीआरडीए में ऐसा विभागीय नियम […]

विज्ञापन

मधुबनीः जिला परिषद के करोड़ों की संपत्ति विगत कई सालों से बरबाद हो रही है़. लाखों रुपये सालाना राजस्व का हानि हो रही है़ जिस विकास की परिकल्पना की गयी थी ना तो वह विकास हुआ और ना ही बेरोजगार युवकों को व्यवसाय का अवसर प्राप्त हुआ़. जिला परिषद एवं डीआरडीए में ऐसा विभागीय नियम कानून का पेच फंसा कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद आज तक निर्मित भवन व मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन तक नहीं हो सका़. दरअसल, जिला परिषद के जमीन पर वर्षो से बने मार्केटिंग भवन आज तक किराया पर नहीं लग सका जिस कारण एक ओर जहां सालाना करीब 20 लाख रुपये का राजस्व की हानि जिला परिषद को हो रहा है. वहीं देख रेख के अभाव में यह मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स अब टूटने लगा है़

लाखों खर्च कर बना कॉम्प्लेक्स

विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2006-07 में आधारभूत संरचना मद की राशि से एसजीएसवाइ योजना के तहत लाखों रुपये खर्च कर जिला परिषद के जमीन पर विभिन्न प्रखंडों में मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया गया था़. सूत्रों की मानें तो एक कॉम्प्लेक्स बनाने में करीब 10 लाख रुपये का प्राक्कलन बनाया गया था़.

इस कॉम्प्लेक्स को बनाने का मुख्य उद्देश्य जिले के गरीबी रेखा से नीचे के युवकों को स्वरोजगार के लिये कम किराये पर मकान उपलब्ध कराना था़ लेकिन यही नियम व उद्देश्य इसकी विफलता का सबसे बड़ा कारण बन गया़. कॉम्प्लेक्स बनाने में राशि डीआरडीए ने दिया और जमीन जिला परिषद ने उपलब्ध करायी थी़. लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी ना तो जिले के किसी बीपीएल परिवार के युवकों को दुकान दिया गया और ना ही उस जमीन पर बने मकान का देख रेख हो सका़ जिला परिषद के जमीन पर बने कॉम्प्लेक्स की दुर्दशा विभागीय नियम व जिला परिषद के रवैया के कारण बना हुआ है़.

कॉम्प्लेक्स का निर्माण आधारभूत संरचना मद से हुआ था़. नियमानुसार आधारभूत संरचना मद से बने मकान में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के बिना किराया के दुकान आवंटित करना चाहिय़े. वही मकान जिला परिषद के जमीन पर बनाया गया जिस कारण जिला परिषद अपने जमीन का किराया की मांग करता रहा़. इसके निदान के लिये ना तो डीआरडीए के अधिकारी ने ही कोई प्रयास किया और ना ही जिप अध्यक्ष ने ही कभी कोई पहल की़. नतीजा समस्या दिन व दिन बढ़ती गयी़.

जिला परिषद को इस मद से हर साल करीब 20 लाख का राजस्व का घाटा हो रहा है़ विभागीय अधिकारियों ने बताया है कि जिले में ऐसे करीब 250 कमरे हैं जिसका भाड़ा नहीं आ रहा है़. वर्तमान में जिला परिषद के मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स का किराया 4 रुपये से 4.50 रुपये प्रति वर्ग फीट निर्धारित है़ इस हिसाब के 250 कमरे का एक साल का किराया करीब 12 से 14 लाख बन रहा है़. विभागीय आंकड़ों के अनुसार जीवछ चौक, पंडौल, हरिपुर, अनदह, बरूआर, कपसिया, सौराठ, पिलखवार, नाहरचौक सहित कई जगहों पर इस मद से दुकान बनाया गया जो आज तक भाड़ा पर नहीं लग सका है़.

क्या कहते हैं अधिकारी

इस बाबत पूर्व जिप अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्र ने बताया है कि वर्ष 2006 से कई उनके कार्यकाल में उप विकास आयुक्त के साथ दुकान को किराया पर देने की बात चली लेकिन नियम के पेच के कारण यह सुलझ नहीं सका़. हालांकि यदि प्रशासन एवं जिप प्रशासन नये सिरे से पहल करे तो इसका निदान निकल सकता है़. श्री मिश्र ने कहा कि ऐसे दुकान बनाने का मुख्य उद्देश्य गरीब बेरोजगार युवकों को स्वरोजगार के दिशा मे मदद करना था लेकिन यह उद्देश्य अब तक सफल नहीं हो सका है़. वहीं वर्तमान जिप अध्यक्ष नसीमा खातून ने कहा कि जल्द ही इस मामले का डीआरडीए प्रशासन एवं जिला प्रशासन से बात कर निदान किया जायेगा. जिला परिषद अब और घाटा बरदाश्त नहीं कर सकता है़. वहीं उप विकास आयुक्त के स्थानांतरण हो जाने के कारण उनसे बात नहीं हो सकी़.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन