डेंगू के तीन संदिग्ध मरीज मिले

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मधुबनीः शहर में डेंगू के दस्तक देने के साथ ही लोगों की नींद हराम हो गयी है. शहर के भौआड़ा निवासी अंकित कुमार(20) जो पटना में पढ़ते हैं. एक दिन के लिये मधुबनी भी आये थे. वह डेंगू का संदिग्ध मरीज पाया गया है. वहीं शहर के गौशाला चौक की प्रभा झा(40) भी डेंगू की […]

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मधुबनीः शहर में डेंगू के दस्तक देने के साथ ही लोगों की नींद हराम हो गयी है. शहर के भौआड़ा निवासी अंकित कुमार(20) जो पटना में पढ़ते हैं. एक दिन के लिये मधुबनी भी आये थे. वह डेंगू का संदिग्ध मरीज पाया गया है. वहीं शहर के गौशाला चौक की प्रभा झा(40) भी डेंगू की संदिग्ध मरीज पायी गयी है. वाटसन स्कूल गेट के समीप रहने वाले राशि रंजन(26) को भी डेंगू का संदिग्ध मरीज पाया गया है. उसका एनएलआइ टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है.

रौशन शर्मा शहर से बाहर के एक मात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें डेंगू का संदिग्ध मरीज पाया गया है. इनका भी एनएसआइ टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है. श्री शर्मा पंडौल के पोखरगाम के निवासी 21 वर्षीय युवक हैं. एक साथ चार डेंगू के संदिग्ध मरीज मिलने से आम लोग बेचैने हो गये हैं. प्रभा झा को एलाइजा टेस्ट के लिये बाहर भेजा गया है. सदर अस्पताल में डेंगू का किट है पर इस जांच जांच में पॉजिटिव पाये जाने पर भी मरीज को संदिग्ध ही माना जाता है. एलाइजा टेस्ट का बाद ही उसे डेंगू का मरीज घोषित किया जाता है. पर आम जनता डेंगू के इन मरीजों को लेकर काफी परेशानी है. शहर के लोग अब दिन को भी मच्छरदानी लगा कर अपने घरों में सोते हैं. मच्छरों के आतंक से बचने के लिये लोग हर संभव प्रयास कर रहे हैं.

घर के आस पास सफाई करने लगे हैं और जल जमाव वाले क्षेत्र में मच्छरों के लारवा को मारने वाली दवाओं का छिड़काव करने लगे हैं. कोई ब्लीचिंग करने लगे हैं. कोई ब्लीचिंग पाउडर डाल रहा है तो कोई केरोसिन तेल डाल रहा है. शहर में जगह नालियों के खुले रहने से इसमें मच्छरों का लारवा पैदा हो रहा है. मच्छर के डर से शहरवासियों में दहशत हैं. आम लोग यह नहीं जानते कि किस मच्छर के काटने से डेंगू होता है. इसलिए वे मच्छरों से बचने के लिये बेचैन हैं. जिला वेक्टर बार्न डिजीज सलाहकार नीरज कुमार सिंह ने बताया कि डेंगू एक वेक्टर बॉर्न डीजीज है जो मच्छरों के काटने से फैलती है. मच्छर इस रोग के वायरस के वाहक होते हैं.उनका कहना है कि वाटर कूलर, टैंक, प्लास्टिक या टीन के कंटेनर आदि में जमे पानी में मच्छर पाया जाता है. डेंगू ठहरे हुए पानी में ब्रीडिंग करती है. उनका सलाह है कि लोगों को घर में फालतू कंटेनरों को नहीं रखना चाहिए. फालतू पानी के बोतलों को भी नहीं रखने की सलाह दी गयी है. मच्छरों के लारवा को मारने के लिये टेमफोस नामक इंसेक्टिसाइड का इस्तेमाल करें.

मच्छर डेंगू का वायरस एक से दूसरे व्यक्ति में फैला सकता है. इससे बचने के लिये सावधानी की जरूरत है. डेंगू का मच्छर दिन में ही काटता है. सबसे अधिक खतरा सूर्योदय के दो घंटा के बाद और सूर्यास्त के दो घंटा पहले रहता है. अगर आप डेंगू से बचना चाहते हैं तो पूरी बांह का शर्ट पहने. मच्छर मारने वाली क्रीम, क्वाइल, इलेक्ट्रिक वेपर मैट आदि का दिन में भी प्रयोग करें. दिन में भी मच्छरदानी लगायें. वैसे क्षेत्र में यात्रा नहीं करें जहां डेंगू फैला हो. अगर किसी मरीज को डेंगू का बुखार है तो उसे अविलंब सदर अस्पताल लाकर जांच करायें. यहां डेंगू जांच का कीट है. यहां इस जांच से इतना जरूर पता चलता है कि मरीज डेंगू का संदिग्ध मरीज है. इसके बाद उस मरीज को एलाइजा टेस्ट के लिये मुजफ्फरपुर, पटना आदि जगहों पर भेजा जाता है. मधुबनी में एलाइजा टेस्ट नहीं होता है. पर सदर अस्पताल के कर्मियों की देख रेख में उसे बाहर भेजा जाता है. जैसे गौशाला रोड की महिला को भेजा गया है. एलाइजा में डेंगू का मरीज पाये जाने पर उसे डेंगू का मरीज घोषित किया जाता है. डेंगू मरीजों में प्लेट लेट काउंट करना भी जरूरी होता है.

डॉक्टरों को मरीज की दशा के अनुरूप ही इलाज करना होता है. वेक्टर बार्न डिजीज सलाहकार ने डेंगू के मरीज को कभी भी एस्पीरीन या बूफेज नहीं देने की सलाह दी है. इससे प्लेट लेट घटता है ओर ब्लीडिंग की संभावना बढ़ती है. श्री सिंह कहते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को डेंगू बुखार हो तो उसे तुरंत सदर अस्पताल लायें ताकि सदर अस्पताल के लैब में मौजूद किट से डेंगू की प्रारंभिक जांच की जा सके और जरूरत पड़ने पर उसे मुजफ्फरपुर या पटना रेफर किया जा सके जिससे उसका एलाइजा टेस्ट हो सके. वेक्टर बार्न डिजीज सलाहकार ने कहा कि डेंगू के मरीज को सदर अस्पताल में किसी डॉक्टर से परामर्श लेकर ही दवा दें. सैंपल ब्लड ट्रांसफ्यूजन आदि डॉक्टर की सलाह पर ही की जा सकती हैं. उन्होंने कहा कि समुदाय में जागरूकता से ही डेंगू से बचाव संभव है. मच्छर पर नियंत्रण के बिना डेंगू पर नियंत्रण संभव नहीं है. एडीज मच्छर के काटने से डेंगू होता है. घर में जमा पानी को हटा दें क्योंकि इसमें एडिज मच्छर ब्रीडिंग करता है. थरमल फॉगिंग से भी डेंगू के मच्छर के लारवा को मारा जा सकता है. तीन चार दिन के अंतराल पर थर्मल फॉगिंग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि भौआड़ा में फॉगिंग कराया गया है.

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