मनरेगा योजना रही विफल

मधुबनीः मनरेगा योजना को विफल करने में हर प्रखंड ने अपने स्तर पर पूरी तरह लापरवाही बरती है़ जिले का एक भी ऐसा प्रखंड नहीं है जहां पर मनरेगा योजना की उपलब्धि संतोषजनक है़. पंचायत स्तरीय जनप्रतिनिधि एवं मनरेगा पदाधिकारियों व अन्य कर्मियों की इस योजना के प्रति उदासीनता बरतने का अंदाजा इसी बात से […]
मधुबनीः मनरेगा योजना को विफल करने में हर प्रखंड ने अपने स्तर पर पूरी तरह लापरवाही बरती है़ जिले का एक भी ऐसा प्रखंड नहीं है जहां पर मनरेगा योजना की उपलब्धि संतोषजनक है़.
पंचायत स्तरीय जनप्रतिनिधि एवं मनरेगा पदाधिकारियों व अन्य कर्मियों की इस योजना के प्रति उदासीनता बरतने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पंचायतों में जितने मजदूरों को सौ दिन का काम नहीं दिया गया है उससे कई गुणा अधिक मजदूर ऐसे हैं जिन्हें 15 दिन से भी कम काम किया गया है़.
मनरेगा योजना में मजदूरों को काम मुहैया कराने में रहिका प्रखंड ने काफी निराश किया है़ 22 पंचायत वाले इस पंचायत में इस प्रखंड में मात्र 118 लोगों को ही 100 दिन का काम दिया गया़ . जबकि 798 जॉब कार्डधारी ऐसे हैं जिन्हें 15 दिन से भी कम काम दिया गया़ वहीं 539 जॉब कार्ड धारी परिवार ऐसे हैं जिन्हें एक भी दिन का काम नहीं दिया गया़ विभागीय आंकड़े यह बयां कर रहे हैं कि इस प्रखंड में जमकर राशि खर्च की गयी है़. अधिकांश पंचायत ऐसे हैं जहां ऐसी योजना का चयन किया गया जिसमें पक्का मैटेरियल में नाम मात्र को खर्च किया गया.
ऐसी योजना को लेने में पंचायत प्रतिनिधियों ने दिलचस्पी दिखायी जिसमें योजना के नाम पर राशि गबन करने की संभावना अधिक रही. रहिका प्रखंड के कई पंचायतों में मनरेगा योजना में व्यापक पैमाने पर लूट खसोट की आशंका व्यक्त की जा रही है़. हुसैनपुर पंचायत में भले ही जॉब कार्डधारियों को काम मुहैया कराने में उदासीनता बरती गयी लेकिन राशि खर्च के नाम पर कोई कोताही नहीं बरती गयी है़ विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस पंचायत में लाखों रूपये खर्च किये गय़े लेकिन पक्का काम के नाम पर यह खर्च हजारों में सिमट कर रह गया है़. इस पंचायत में ऐसी योजना का चयन करने में जनप्रतिनिधि ने तत्परता दिखायी जिसमें मजदूरों को काम नहीं मिला और जनप्रतिनिधि की जेब भरी़ पौधारोपन के नाम पर पंचायत में जमकर खर्च किया गया है़ वहीं पेड़ के सुरक्षा के नाम पर बांस से बने बाडें़ बनाने में भी खूब खर्च दिखायी गयी है़ . एक बाड़े पर करीब चार सौ रूपये का बिल बनाया गया है़. यह बात और है कि पंचायत में ढूंढने से भी पेड़ नहीं मिलेगा कमोबेश यही हाल खजुरी, जगतपुर, बसौली, ईजरा, शंभुआर व कई अन्य पंचायत का भी है़ जहां एक भी मजदूरों को भले ही सौ दिन का काम नहीं दिया गया पर राशि खर्च खूब की गयी. इस बाबत हुसैनपुर पंचायत के मुखिया रजिया देवी ने कुछ भी बताने से इंकार किया. इस बाबत उप विकास आयुक्त राजकुमार ने बताया कि मनरेगा योजना की व्यापक रूप से जांच की जायेगी़ दोषी जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी के ऊपर कार्रवाई की जायेगी़.
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