20 से अधिक बैठकों के बाद भी लाखों की क्षति, अब तक नहीं सुलझा मामला

Updated at :30 Jun 2017 4:59 AM
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20 से अधिक बैठकों के बाद भी लाखों की क्षति, अब तक नहीं सुलझा मामला

नाराजगी. रामनवमी के दिन शिवलिंग िमलने के साथ शुरू हुआ था दो गांवाें के बीच विवाद बाबूबरही : जिस शिवलिंग को लेकर खोजपुर में इतनी बड़ी घटना घट गयी, उस शिवलिंग का ही अब कोई अता पता नहीं है. ना तो प्रशासन इसे अपने पास होने की बात स्वीकार रहा है और ना ही खोजपुर […]

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नाराजगी. रामनवमी के दिन शिवलिंग िमलने के साथ शुरू हुआ था दो गांवाें के बीच विवाद

बाबूबरही : जिस शिवलिंग को लेकर खोजपुर में इतनी बड़ी घटना घट गयी, उस शिवलिंग का ही अब कोई अता पता नहीं है. ना तो प्रशासन इसे अपने पास होने की बात स्वीकार रहा है और ना ही खोजपुर ग्रामीण ही इसे अपने गांव में रहने की बात कह रहे हैं. शिवलिंग को लेकर अब सवालिया निशान उठ गया है. शिवलिंग के मिलने के बाद से ही विवाद शुरू हो गया था. विवाद सुलझाने की हर संभव कोशिश भी की गयी. पर इसका नतीजा इतना भयानक होगा इसका किसी को अंदाजा भी नहीं था.

जानकारी के अनुसार बीते पांच अप्रैल को खोजपुर नहर चौक के समीप बेला पंचायत के खेत से करीब दो फुट का दुर्लभ शिवलिंग मवेशी चरा रहे एक बालक ने देखा. वहीं पर गेहूं काट रही खोजपुर की कुछ महिलाओं की नजर भी इस पर पड़ी. जानकारी के अनुसार खोजपुर की महिला ने तत्काल ही इसकी सूचना लोगों को दिया. जैसे ही लोगों को इस बात की जानकारी हुइ लोग खेत पहुंच शिवलिंग को लेकर खोजपुर आ गये. यहीं से विवाद शुरू हो गया.

सार्वजनिक स्थल पर स्थापित करने का भी दिया गया था सुझाव

एसपी दीपक बरनवाल ने कहा है कि शिवलिंग को लेकर उठे विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के लोगों को किसी ऐसे सार्वजनिक स्थल पर स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया था. ताकि दोनों टोले के लोगों के अलावे अन्य श्रद्धालु भी इसका दर्शन कर सकें और विवाद भी सुलझ जाये. पर इस प्रस्ताव को दोनों पक्षों ने नहीं माना. एसपी ने कहा है कि शिवलिंग के विवाद को सुलझाने के लिये कम से कम 20 बार बैठक आयोजित की गयी थी.

जमीन की मापी भी की गयी

शिवलिंग मामले में प्रशासन ने हर स्तर पर मामले को सुलझाने की पहल का दावा किया है. अधिकारियों का कहना है कि कमेटी के निर्णय के अनुसार ही जिस स्थल से शिवलिंग मिला था उस जगह का सरकारी स्तर पर मापी भी किया गया था कि यह जमीन किस पंचायत में आता है. बताया जा रहा है जमीन की मापी में वह स्थल बेला पंचायत के अधीन आया. इसके बाद तो नवका गांव के लोगों का विरोध प्रदर्शन और भी उग्र होता गया. मुख्यालय में ही दो – दो बार अनशन भी कुछ लोगों ने किया. समाहरणालय के सामने धरना प्रदर्शन भी किया. एसडीओ अभिलाषा नारायण शर्मा बाबूबरही पहुंचकर भी कथित तौर पर शिवलिंग को नवका टोल के लोगों के हवाले करने का दबाव खोजपुर के लोगों को दिया था. जिसे खोजपुर के लोगों ने इसे मानने से इनकार कर दिया. करीब दो माह तक लगातार खोजपुर में शिव मंदिर परिसर में पूजा पाठ,धार्मिक अनुष्ठान चलता रहा. हजारों की संख्या में लोग जमा हुए और पूजा पाठ किया.

शांति की अपील. घटना के बाद देर शाम तक रह रहकर अधिकारियों का काफिला सड़क पर घूमता रहा व लोगों से शांत रहने की अपील करता रहा. हालांकि जैसे ही अधिकारियों की टोली सड़क पर गुजरती लोग किसी

दुर्घटना आशंका से आशंकित हो जाते. देर शाम तक महिला पुलिस जिला पुलिस बल व एसएसबी के जवान किसी भी अप्रिय घटना से निबटने के लिए तत्पर थे.

दो पंचायतों के विवाद मे उलझा मामला

शिवलिंग को लेकर विवाद दो पंचायत को लेकर शुरू हुआ. बताया जा रहा है कि जिस खेत से शिवलिंग बरामद हुआ वह जमीन बेला पंचायत के नवका टोल के एक किसान का था. जबकि शिवलिंग को लेकर खोजपुर के लोग आये. शिवलिंग को लेकर दोनों पंचायत के लोग इसे अपना बताने लगे. इसमें खोजपुर के लोग शिवलिंग की स्थापना मंदिर परिसर में कर पूजा पाठ भी शुरू कर दिया तो दूसरी ओर नवका टोल के लोगों ने इसे अपना करने के लिए अनशन शुरू कर दिये. बाबूबरही से लेकर मुख्यालय तक धरना प्रदर्शन व अनशन तक किया गया. प्रशासन ने इस विवाद को सामाजिक स्तर पर ही सुलझाने के लिये एक कमेटी का भी गठन किया. बताया जा रहा है कि इसमें स्थानीय दोनों गांव के गणमान्य, जनप्रतिनिधि व कई अधिकारी को भी शामिल किया गया. वार्ता का दौर चलता रहा. पर नतीजा वही शून्य.

लाखों की संपत्ति की हुई क्षति

जेसीबी से शिवलिंग को उखाड़ने की प्रशासनिक पहल में प्रशासनिक स्तर पर चूक हुइ. इसी का नतीजा है कि महज आधे घंटे में ना सिर्फ एक की जान गयी बल्कि लाखों की संपत्ति भी जलकर राख हो गयी. आक्रोशित लोगों ने जेसीबी मशीन को आग के हवाले कर दिया.

लोगों के आक्रोश को देखते हुए जैसे ही पुलिस प्रशासन पीछे हटा, लोगों ने पुलिस प्रशासन को खदेड़ना शुरू कर दिया. जिसमें पुलिस के कई वाहन बाबूबरही- खुटौना मुख्य पथ पर ही वाहनों को छोड़ दिया. इसमें फुलपरास के डीएसपी उमेश्वर चौधरी, अग्निशमन की छोटी गाड़ी, पुलिस के अन्य दो जीप, व कई मोटरसाइकिल भी शामिल था. जिसमें लोगों ने आग लगा दी. तब तक लोग इस वाहन में आग लगाते रहे जब तक की पूरी वाहन जल कर राख ना हो गयी.

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