ईश्वर की भक्ति करने से मानव जीवन का होता है कल्याण: आरती किशोरी

रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था.
-घमंडियों के समूल नाश करने के लिए ईश्वर को धरती पर होना पड़ा अवतरित- -फनहन गोठ बस्ती में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन आरती किशोरी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी कथा सुनाई- -श्रद्धालुओं ने कथावाचक का केक काटकर मनाया जन्मदिन- उदाकिशुनगंज नगर परिषद क्षेत्र के फनहन गोठ बस्ती में श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ जारी है. कथा के पांचवें दिन उत्तर प्रदेश के श्रीराम वृंदावन धाम से पहुंचे कथावाचक पंडित आरती किशोरी ने श्रीकृष्ण के जन्म से संबंधित प्रसंग का व्याख्यान किया. भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े प्रसंग को व्याख्यान करते हुए कथावाचक पंडित आरती किशोरी ने कहा कि यह द्वापर युग के मथुरा के राजा उग्रसेन के आततायी पुत्र कंस से जुड़ा हुआ है. जहां आततायी पुत्र कंस ने अपने पिता उग्रसेन को गद्दी से उतारकर खुद मथुरा का राजा बन बैठा. उन्होंने कहा कि रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था. यह दिन खुशहाली का है. कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ था. एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था. रास्ते में आकाशवाणी हुई हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है. इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा. यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ. तब देवकी ने उससे विनय पूर्वक कहा मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे जन्म लेने के बाद मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी. कंस ने देवकी की बात मान ली और मथुरा वापस चला आया. उसने वसुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया. -कारागृह के फाटक अपने आप खुल गए- वसुदेव-देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला. अब आठवां बच्चा होने वाला था. कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए. उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था. उन्होंने वसुदेव-देवकी के दुखी जीवन को देख आठवें बच्चे की रक्षा का उपाय रचा. जिस समय वसुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ माया थी. जिस कोठरी में देवकी-वसुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए. दोनों भगवान के चरणों में गिर पड़े. तब भगवान ने उनसे कहा अब मैं पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं. तुम मुझे इसी समय अपने मित्र नंदजी के घर वृंदावन में भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है, उसे लाकर कंस के हवाले कर दो. इस समय वातावरण अनुकूल नहीं है. फिर भी तुम चिंता न करो. जागते हुए पहरेदार सो जाएंगे, कारागृह के फाटक अपने आप खुल जाएंगे और उफनती अथाह यमुना तुमको पार जाने का मार्ग दे देगी. उसी समय वसुदेव नवजात शिशु रूप श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े और अथाह यमुना को पार कर नंदजी के घर पहुंचे. वहां उन्होंने नवजात शिशु को यशोदा के साथ सुला दिया और कन्या को लेकर मथुरा आ गए. कारागृह के फाटक पूर्ववत बंद हो गए. अब कंस को सूचना मिली कि वसुदेव-देवकी को बच्चा पैदा हुआ है. उसने बंदीगृह में जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा, परंतु वह कन्या आकाश में उड़ गई और वहां से कहा अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा. तुझे मारनेवाला तो वृंदावन में जा पहुंचा है. वह जल्द ही तुझे तेरे पापों का दंड देगा. -मोह माया त्याग कर करें ईश्वर की भक्ति- उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा के माध्यम से लोगों को जागरूक किया कि अति का अंत होना तय है. लोगों को अपने जीवन में घमंड नहीं पालना चाहिए. घमंडी लोगों का हाल कंस जैसा ही होता है. धरती पर पापियों का नाश करने के लिए भगवान को अवतरित होना पड़ा. इसलिए लोगों को घमंड नहीं करना चाहिए. संसारिक मोह माया का त्याग कर इश्वर की भक्ति करना चाहिए. इश्वर की भक्ति से ही मानव जीवन का कल्याण होता है. वही कथावाचक पंडित आरती किशोरी का जन्मदिन श्रद्धालुओं ने केक काटकर जन्मदिन मनाया. इस दौरान आयोजन समिति के सदस्यों ने कथावाचक पंडित आरती किशोरी को चांदी का मुकुट पहनाया. मौके पर आयोजन समिति के विजय प्रसाद सिंह ,कृष्ण कुमार सिंह, रामबालक सिंह ,अमर आशीष, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि कुंदन पासवान,भीमशंकर पासवान,शिवनंदन यादव, रामानंद यादव, पवन यादव ,रविशंकर कुमार ,राजेंद्र यादव, निरंजन मंडल, शिवेंद्र कुमार सिंह, सुनील पासवान, राजेश पासवान, बैजनाथ मंडल, धनेश्वर पासवान, प्रकाश पासवान, सागर पासवान, वरुण ठाकुर, रंजीत पासवान, निर्धन मंडल, अर्जुन पासवान, इंदल मंडल व अन्य मौजूद थे.
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