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अपराधों के आधुनिकीकरण के मद्देनजर नये कानून की थी आवश्यकता अत्यधिक

Updated at : 08 Jul 2024 6:46 PM (IST)
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अपराधों के आधुनिकीकरण के मद्देनजर नये कानून की थी आवश्यकता अत्यधिक

मानवाधिकार एवं सामाजिक संगठन ने नए आपराधिक कानूनों पर की चर्चा-प्रतिनिधि, बिहारीगंज

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मानवाधिकार एवं सामाजिक संगठन ने नये आपराधिक कानूनों पर की चर्चा- बिहारीगंज अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन की जिला इकाई ने सोमवार को बिहारीगंज कार्यालय में एक जुलाई से प्रभावी हुए तीन नए कानूनों पर चर्चा की. संगठन के वरिष्ठतम पदाधिकारीद्वय डॉ अरविंद कुमार कुशवाहा और अवकाश प्राप्त पुलिस अवर निरीक्षक मृत्युंजय झा ने बताया कि मानवाधिकार संगठन में अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज सिंह के दिशा निर्देश पर तीन नए आपराधिक कानून 2023 पर चर्चा की गई. डॉ कुशवाहा ने बताया कि नए आपराधिक कानून से अपराध को कम करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है. त्वरित न्याय दिलाने का भी प्रावधान नए कानून में है. नए आपराधिक कानून में जहां पीड़ित घटना स्थल से भी डिजिटल माध्यम से अपने साथ घटित घटना को प्राथमिकी तौर पर दर्ज करा सकता है. व्यक्ति या पीड़ित दूसरे गतंव्य जगह से भी पुलिस को अपनी बात कह सकता है. -पुराने कानून में थी कई कमियां- रिटायर्ड अवर निरीक्षक मृत्युंजय झा ने कहा कि कानून कानून होता है. समाज में सामाजिक संरचना को सुदृढ़ता के साथ बनाये रखने के लिए कानून की धाराओं का पालन किया जाता है. बदलते परिवेश में पुराने आपराधिक कानूनों में पायी गयी खामियों को दूर करते हुए नए आपराधिक कानून लाये गए हैं. नए आपराधिक कानून के केंद्र में मानवाधिकार व मूल्यों को रखा गया है. उन्होंने कहा कि 1860 के बने भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता लाया गया है. ठीक उसी तरह दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की जगह 2023 में संशोधित भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और तीसरा भारतीय साक्ष्य अधिनियम में दंड के स्थान पर न्याय शब्द पर जोर दिया गया है. उन्होंने नए कानून में डिजिटल तौर पर प्राथमिकी, नोटिस, समन, ट्रायल, रिकार्ड, फॉरेंसिक, केस डायरी आदि को संग्रहित किए जाने पर प्रसन्नता जतायी. उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी में व्याप्त अपराध और अपराधों के आधुनिकीकरण के मद्देनजर नए कानून की आवश्यकता अत्यधिक थी. -अबलाओं के लिए वरदान साबित होगा नया कानून- संगठन के किशोर कुमार सिंह ने साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला पटना एवं बिहार पुलिस अकादमी राजगीर में क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला में साइबर फॉरेंसिक प्रयोगशाला की इकाइयों की स्थापना पर प्रसन्नता व्यक्त की. कार्यालय प्रभारी ई मनीष कुमार ने तीन नए कानून में महिला व बाल विषय पर अपराधों में अतिशय वृद्धि को रोकने आपराधिक कानूनो में 37 धाराओं को शामिल करने को एक बेहतरीन कदम बताया. उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की नाबालिग पर सामूहिक बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को मृत्यु दण्ड अथवा आजीवन कारावास की श्रेणी में रखा जाना अबलाओं के लिए वरदान साबित होगा. अधिवक्ता सोनी कुमारी ने कहा कि एक तय समय सीमा के अंदर न्याय दिलाने के लिए बीएनएस में 45 धाराओं को जोड़ा जाना सर्वहितकारी हैं. इन दिनों नाबालिग लड़कियों, छोटी बच्चियों के साथ कुकृत्य बढ़ गया है. नए आपराधिक कानून में निहित धाराओं के अंतर्गत दोषियों को सजा दिलाना आसान होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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