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गोपाष्टमी महोत्सव - भाव नृत्य, गीत व गजल से दर्शकों हुये मंत्रमुग्ध

Updated at : 21 Dec 2025 6:09 PM (IST)
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गोपाष्टमी महोत्सव - भाव नृत्य, गीत व गजल से दर्शकों हुये मंत्रमुग्ध

जिसके बाद आरती आनंद ने कृष्ण भजन के जरिये कृष्ण भक्तों व दर्शकों का मनमोहित किया.

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मधेपुरा. कला एवं संस्कृति व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राजकीय गोपाष्टमी महोत्सव के अंतिम दिन स्थानीय कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भाव नृत्य, गीत व गजल से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम की शुरुआत बीके पब्लिक स्कूल के प्रकाश कुमार व साथी ने समूह लोकनृत्य से हुई. जिसके बाद आरती आनंद ने कृष्ण भजन के जरिये कृष्ण भक्तों व दर्शकों का मनमोहित किया. नवाचार रंगमंडल के मो. फैयाज व साथी ने कृष्ण-सुदामा के भाव नृत्य से दर्शकों को भावुक कर दिया. कलाकारों ने दिखाया कि भगवान कृष्ण ने अपने बचपन के मित्र सुदामा को पाकर कितने भावुक हुए थे. अपने मित्र का चरण अपने अंशु से धोया व अपने बराबरी में बिठाया. भावनृत्य देखकर दर्शक भावुक हो गये. – मंच पर आते ही फुट-फुट कर रोने लगे गायक रौशन – स्थानीय कलाकारों में संगम कुमारी ने विवाह गीत, भवेश कुमार नेे ताकते रहते तुझको सांझ सवेरे…, आलोक राज ने लागा चुनरी में दाग…, नारायण कुमार ने है जिंदगी कितनी खूबसूरत, उन्हें अभी ये पता नहीं है…, गजल की प्रस्तुति दी. इसके बाद संगीत शिक्षक व गायक रौशन ने मंच पर आते ही फुट-फुट कर रोने लगे. उनका कहना था कि वह जब दूसरे जिला में महफिल सजाते हैं, तो हजारों लोग उन्हें सुनने के लिए जमा रहते हैं, लेकिन मधेपरा में राजकीय महोत्सव में उन्हें समय नहीं मिल रहा है. उन्होंने जिला प्रशासन से प्रार्थना किया कि इसमें सुधार किया जाए. मौके पर उपस्थित कमेटी के लोगों द्वारा भावुक रौशन को स्थिर कराया गया, फिर गायक रौशन कुमार ने गजल हम तेरे शहर में आए है मुसाफिर की तरह…, व याद-याद-याद, बस याद रह जाती है…, गाकर दर्शकों को आनंदित किया. – बांके बिहारी की देख छटा, मेरो मन हो गयो लटा पटा… की हुई प्रस्तुति- गायिका शशिप्रभा जायसवाल ने बांके बिहारी की देख छटा, मेरो मन हो गयो लटा पटा…, भजन गाकर खूब तालियां बटोरी। डी फार डी ने भाव नृत्य एवं कला संगम ने मयूर समूह नृत्य की प्रस्तुति देकर खूब वाह – वाही लूटी. स्थानीय कलाकारों के बाद अतिथि कलाकार राधा श्रीवास्तव ने हनुमान भजन दुनिया में देव हजारों है, बजरंगबली का क्या कहना…, से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की. बजरंगली के इस भजन से श्रीकृष्ण गोशाला परिसर के वातावरण को भक्तिमय हो गया. दर्शकों ने तालियों से राधा श्रीवास्तव का स्वागत किया. उसके बाद उन्होंंने जैसी ही राम भजन राम आएं हैं तो अंगना सजाऊंगी…, शुरू किया वैसे ही महोत्सव में उपस्थित सभी राम भक्त झूम उठे. राधा श्रीवास्तव के चटनियां ऐ सइयां सिलवट पे पिसी…, गीत पर दर्शकों ने खूब मनोरंजन किया. राधा श्रीवास्तव ने दर्शकों के बीच जाकर दर्शकों को थिरकने पर मजबूर किया. – राधा श्रीवास्तव व अमित रंजन श्रीवास्तव एवं स्थानीय कलाकारों को किया गया सम्मानित – राधा श्रीवास्तव के भजन एवं हिंदी गीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति ने दर्शकों को रोमांचित किया. बाद में राधा श्रीवास्तव व उनके पति अमित रंजन श्रीवास्तव ने रात श्याम सपने में आए…, पग पग लिए जाऊं तोहरे बलैयां में…, अरे द्वारपालो कन्हैया से कहदो…, अरेरे मेरी जान है राधा…, समेत अन्य गीतों की प्रस्तुति दी. महोत्सव के समापन पर कला सांस्कृतिक पदाधिकारी आम्रपाली कुमारी, समाजसेवी साहित्यकार डा. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी, डा. अरुण कुमार, शौकत अली, डा. आर के पप्पू, डा. संजय कुमार, गौशाला के सचिव पृथ्वीराज यदुवंशी ने गायिका राधा श्रीवास्तव व अमित रंजन श्रीवास्तव समेत समेत सभी कलाकारों एवं अतिथि व कमेटी के सदस्यों को स्मृति चिन्ह व अंग वस्त्र से सम्मानित किया. कार्यक्रम का मंच संचालन संगीत शिक्षिका शशि प्रभा जायसवाल एवं समीक्षा यदुवंशी ने संयुक्त रूप से किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Kumar Ashish

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Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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