मधेपुरा में प्रभारी प्रधानाध्यापक के निलंबन पर भड़के छात्र, NH-107 किया जाम

प्रदर्शन करते छात्र | Prabhat Khabar Network
Madhepura News: मधेपुरा के सोनाय अनूप विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार के निलंबन के विरोध में सैकड़ों छात्र, अभिभावक और ग्रामीण सड़कों पर उतर आए. उन्होंने NH-107 को जाम कर शिक्षा विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया. यह मामला विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है.
घैलाढ़ (मधेपुरा) से सविता नंदन कुमार की रिपोर्ट
Madhepura News: मधेपुरा के घैलाढ़ प्रखंड स्थित सोनाय अनूप उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़क तक पहुंच गया है. विभाग द्वारा प्रभारी प्रधानाध्यापक बदलने और तत्कालीन प्रभारी मुकेश कुमार को निलंबित किए जाने के विरोध में गुरुवार को सैकड़ों छात्र-छात्राएं, अभिभावक और ग्रामीण राष्ट्रीय राजमार्ग-107 पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने मिठाही चौक पर सड़क जाम कर शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और निलंबन आदेश वापस लेने की मांग की. इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनविश्वास पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
प्रभारी बदलने के फैसले के बाद भड़का विरोध
घैलाढ़ प्रखंड के भान टेकती स्थित सोनाय अनूप उच्च माध्यमिक विद्यालय में विभाग ने शिक्षक मोहम्मद इमरान आलम को प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाने का आदेश जारी किया. साथ ही तत्कालीन प्रभारी मुकेश कुमार को निलंबित कर दिया गया.
इस फैसले के विरोध में गुरुवार को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अभिभावक और ग्रामीण सड़क पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने मिठाही चौक स्थित NH-107 (सहरसा-मधेपुरा मुख्य मार्ग) को जाम कर दिया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ.
छात्रों का दावा, मुकेश कुमार के कार्यकाल में सुधरी थी व्यवस्था
प्रदर्शन कर रहे छात्रों और ग्रामीणों का कहना है कि मुकेश कुमार के कार्यकाल में विद्यालय में पढ़ाई, अनुशासन और शैक्षणिक माहौल में उल्लेखनीय सुधार हुआ था. उनका आरोप है कि ऐसे शिक्षक को हटाकर निलंबित करना विद्यालय के हित में नहीं है.
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि विभाग अपना आदेश वापस नहीं लेता है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.
बीईओ के आश्वासन के अगले दिन आया निलंबन आदेश
विवाद को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि मंगलवार को विद्यालय पहुंचे प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) ने छात्रों को आश्वस्त किया था कि अगले विभागीय आदेश तक मुकेश कुमार ही प्रभारी बने रहेंगे. इस आश्वासन के बाद छात्रों ने विद्यालय की तालाबंदी समाप्त कर दी थी.
लेकिन अगले ही दिन विभाग ने मुकेश कुमार को निलंबित करते हुए मोहम्मद इमरान आलम को प्रभारी बनाने का आदेश जारी कर दिया. इस फैसले से छात्रों और ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई.
निलंबन से पहले ही सौंप दिया था प्रभार
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मुकेश कुमार ने विभागीय निर्देश का पालन करते हुए बुधवार को निलंबन पत्र मिलने से पहले ही विद्यालय का प्रभार मोहम्मद इमरान आलम को सौंप दिया था.
इसके बावजूद उनके निलंबन से कई सवाल उठ रहे हैं. हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से कोई अलग आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है.
आठ महीने बाद कार्रवाई पर उठे सवाल
ग्रामीणों और छात्रों का कहना है कि यदि विभागीय नियमों के अनुसार मोहम्मद इमरान आलम को ही प्रभारी बनाया जाना था, तो यह निर्णय आठ महीने पहले क्यों नहीं लिया गया.
उनका आरोप है कि विभाग ने पहले स्वयं मुकेश कुमार को प्रभारी बनाया और आठ महीने तक विद्यालय का संचालन कराया. बाद में एक शिक्षक द्वारा वरीयता का मुद्दा उठाने के बाद अचानक कार्रवाई कर दी गई.
यह भी पढ़ें: आलू की खेती से लाखों कमाना चाहते हैं? कृषि वैज्ञानिक ने बताए बंपर मुनाफे के आसान तरीके
Madhepura News: विभाग ने निलंबन की बताई यह वजह
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), मधेपुरा की ओर से जारी आदेश के अनुसार, मुकेश कुमार को विभागीय निर्देश के बावजूद समय पर प्रभार हस्तांतरित नहीं करने, विभागीय आदेशों की अवहेलना करने, विद्यालय में उत्पन्न विवाद, तालाबंदी और अनुशासनहीनता के लिए प्रथम दृष्टया जिम्मेदार मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है.
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभाग द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण का उत्तर उपलब्ध नहीं कराया गया. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, चौसा निर्धारित किया गया है.
पहले तालाबंदी, अब हाईवे जाम
इससे पहले मंगलवार को भी छात्रों ने विद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर मुकेश कुमार को प्रभारी बनाए रखने की मांग की थी. उस समय बीईओ के आश्वासन पर आंदोलन समाप्त हो गया था, लेकिन निलंबन आदेश के बाद विरोध फिर तेज हो गया और मामला राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच गया.
प्रशासनिक फैसले पर सड़क पर क्यों उतरे छात्र?
यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है कि प्रभारी प्रधानाध्यापक की नियुक्ति और प्रभार हस्तांतरण जैसे प्रशासनिक विषय पर छात्र, अभिभावक और ग्रामीण सड़क पर उतरने को क्यों मजबूर हुए.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन में नहीं, बल्कि विद्यालय में बनी बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन और नियमित पढ़ाई को बनाए रखने के लिए है.
वहीं शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि विभाग समय रहते इस विवाद का पारदर्शी समाधान करता और अपने निर्णय के कारणों को स्पष्ट रूप से सामने रखता, तो मामला विद्यालय परिसर से निकलकर राष्ट्रीय राजमार्ग तक नहीं पहुंचता. फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं.
Also Read: भागलपुर में चौंकाने वाली खोज, सैंडिस कंपाउंड के जिस पत्थर पर लोग बैठते थे वह निकला दुर्लभ ट्री फॉसिल
Also Read: 21 साल से वही स्वाद… मुजफ्फरपुर के इस समोसे के लिए आज भी दूर-दूर से पहुंचते हैं लोग
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










