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माता-पिता, गुरु व समाज की सेवा करना ही है भक्ति- डॉ जितेंद्र

Updated at : 30 Oct 2025 7:35 PM (IST)
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माता-पिता, गुरु व समाज की सेवा करना ही है भक्ति- डॉ जितेंद्र

माता-पिता, गुरु व समाज की सेवा करना ही है भक्ति- डॉ जितेंद्र

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सदगुरु कबीर देव अध्यात्म सत्संग महोत्सव का हुआ समापन मधेपुरा. सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सकरपुरा बेतौना पंचायत के बेतौना वार्ड नंबर 11 में सदगुरु कबीर देव अध्यात्म सत्संग महोत्सव गुरुवार को संपन्न हो गया. सत्संग संत सीताराम पंडित साहेब जी के सानिध्य में, शिक्षाविद जयनारायण पंडित के अध्यक्षता में हुई. समारोह में पूज्य सद्गुरुदेव डॉ जितेंद्र साहेब जी जीवन ज्योति केंद्र संत कबीर नगर पूर्णिया कोर्ट ने कहा ध्यान के चार स्तंभ हैं. शब्दाभ्यास के द्वारा सद्गुरु द्वारा बताये हुये मत्रों का जप करते हैं, रूपाभ्यास में माता-पिता गुरु और परमात्मा के रूप का स्मरण करते हैं. दृष्टा दृश्याभ्यास में मैं कौन हूं और जगत क्या है इसका ज्ञान करना. साक्षीभाव जहां मन निर्मल हो जाता है, मन से राग, द्वेष, ईर्ष्या मर जाता है तो मन निर्मल हो जाता है. हम शून्य अवस्था में पहुंचते हैं. यही है साक्षी भाव, केवल अवस्था हैं. पूज्य गुरुदेव डॉ अभय साहेब जी कबीर पारख निकेतन चैरिटेबल ट्रस्ट कहलगांव भागलपुर ने कहा- माता-पिता गुरु और समाज की सेवा करना ही भक्ति है. भक्ति है समर्पण, भक्ति है मिट जाना. उन्होंने भगवान श्री राम द्वारा बताए हुये माता शबरी को नौ प्रकार की भक्ति का वर्णन की. पूज्य संत श्री सीताराम पंडित साहेब ने कहा ध्यान साधना व भक्ति से हमें शांति मिलती है. हमें परमात्मा की अनुभूति होती है. हमारे मन का मैल साधना से ही कटेगा. यदि हम किसी की आंख की आंसू को नहीं पोछें हैं तो हमारे द्वारा किसी की आंख में आंसू भी पैदा न हो. पूज्य गुरुदेव मणिदिन साहेब ने कहा हमें संसार की आसक्ति व बंधन ध्यान साधना और गुरु भक्ति से कटेगा. समाजसेवी साहित्यकार भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरा ने कहा शिक्षक जयनारायण पंडित के पिताजी संत श्री सीताराम पंडित 113 वर्ष की उम्र में ध्यान साधना व भक्ति में लीन रहते हैं. यह सौभाग्य का विषय है. प्रो डॉ अरुण कुमार ने कहा मुझे संत श्री सीताराम पंडित का दर्शन व भेंट करके हमें खुशी हुई. यह स्वस्थ जीवन जीने की कामना करेंगे. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये शिक्षाविद् जयनारायण पंडित ने कहा सत्संग से ही हमें सार और असार का ज्ञान होता है. शुद्ध ,बुद्धि ,यश, मोक्ष, धन, भलाई जब जिसने जिस यत्न से कहीं पाया है तो वे सत्संग का प्रभाव ही है. यदि हम किसी की भलाई नहीं किये हैं तो हमारे द्वारा किसी की बुराई भी ना हो. मंच संचालन करते हुए प्रो नगल किशोर साहेब ने कहा शिक्षक जयनारायण पंडित प्रतिभा के धनी हैं. 113 वर्ष की अवस्था में अपने पिताजी की काफी सेवा करते हैं. मौके पर उपस्थित योगाचार्य असंग स्वरूप साहेब, शिवनारायण साहेब, बालेश्वर साहेब, विजेंद्र साहेब, भूपेंद्र साहेब, शिवेंद्र साहेब, डॉ तेजना पंडित, पुलकित पंडित, कामेश्वर यादव, जनार्दन यादव, राजेंद्र यादव, रमेश पंडित, विजेंद्र यादव, सुखदेव साहेब, शालिग्राम साहेब, अनिल साहेब, आचार्य तेज नारायण यादव, बबलू कुमार, दीप नारायण पंडित , चंदेश्वरी पंडित, बद्री पंडित, अर्जुन यादव, राजेंद्र यादव आदि उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Kumar Ashish

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Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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