नाले का पानी सड़क पर बहने से मोहल्ले के लोग परेशान, जिम्मेदार मौन

नाले का पानी सड़क पर बहने से मोहल्ले के लोग परेशान, जिम्मेदार मौन
नप अधिकारी सहित मुख्य पार्षद से लेकर वार्ड पार्षद तक की नही टूट रही निंद्रा
मधेपुरा. नगर परिषद क्षेत्र में बहुत नालों का तो निर्माण हुआ. अभी भी बुडको द्वारा नाले का निर्माण जारी है, लेकिन जलनिकासी की व्यवस्था के अभाव में अधिकतर नाला मच्छर पालन केंद्र बनकर रह गया है. बिना मास्टर प्लान के बने नाले अपने मोहल्ले का पानी निकालने में अक्षम है. वहीं कई जगहों पर नाले की कनेक्टिविटी दूसरे नाले से नहीं रहने के कारण भी जलजमाव हो रहा है. ऐसे में मधेपुरा शहर को एक संपूर्ण ड्रेनेज सिस्टम की आवश्यकता है, ताकि जलजमाव की समस्या खत्म हो. नालों से पानी निकासी सुनिश्चित हो.एक जमाने में जलजमाव से मुक्त था मधेपुरा
शहर के पुराने लोग बताते हैं कि तीनों तरफ नदियां होने की वजह से मधेपुरा शहर में कभी जलजमाव नहीं होता था. 90 के दशक में मुख्य बाजार में बने नाले से पर्याप्त जलनिकासी भी हो जाती थी. उसके बाद बगैर लेवल देखे नालों का निर्माण होता गया व जलजमाव की समस्या बढ़ती चली गयी. हालात यहां तक हो गए कि निजी मंशा से ऐसी नालियां भी बनायी गयी, जो आगे कहीं से भी कनेक्ट नहीं है. लिहाजा वे नाले परेशानी बढ़ाने के अलावे किसी काम के नहीं रहे.
जनता की चुप्पी भी है बदहाली की बड़ी वजह
विकास की राशि की अफरा तफरी की बात सर्वविदित है पर, इसके खिलाफ आवाज न उठना बदहाली का प्रमुख कारण है. जनता कभी न तो अपने पार्षदों से न नगर सरकार के प्रमुखों से विकास निधि का हिसाब मांगती है. न उनके बढ़ते आर्थिक संसाधनों पर प्रश्न पूछती है. जनता की इस चुप्पी का सभी खुलकर लाभ उठाते है. हालात ये हैं कि गलियों में जगह-जगह नाले का ढक्कन टूटा हुआ है. अंधेरा छाया हुआ है, लेकिन मुख्य सड़क के अलावे कई खास जगह पर स्ट्रीट लाइट जगमगा रही है.
पहले नदियों में बहकर जाता था पानी
स्थानीय निवासी महेश बताते हैं कि मधेपुरा शहर में पहले कभी जलजमाव नहीं होता था. 1980 के आसपास कई बार भीषण वर्षा हुई थी. लेकिन सारा पानी बहकर नदियों के माध्यम से निकलता रहा. कभी भी जलनिकासी की समस्या नहीं रही. इधर नाले बनते रहे व समस्या बढ़ती गयी. पूर्व में कॉलेज चौक के आसपास का जलनिकासी टीपी कॉलेज के बगल से बेलघाट हो जाता था. जबकि कचहरी के आसपास मुख्य बाजार की जल निकासी डाक बंगला रोड होकर तत्कालीन बांध वर्तमान में पश्चिमी बाईपास के बगल से होते हुए नदी में होता था. इसी नदी में भिरखी की भी जलनिकासी होती थी. वहीं जयपालपट्टी व उस इलाके की जलनिकासी रेलवे पुल के माध्यम से नदी में होती थी.
जहां-तहां सड़कों पर बह रहा गंदा पानी
हर वार्ड में अधिकतर जगह नाला टूटे अवस्था में हैं तो कहीं नालों का पानी सड़कों पर बहता रहता है. उन्होंने बताया कि शहर के भूपेंद्र चौक से सुभाष चौक तक सभी जगहों पर नगर परिषद द्वारा लोगों के लिए सुरक्षा का इंतजाम किए बिना ही नाला के प्लेट को तोड़कर खुला छोड़ दिया गया है. कहीं नाले का पानी सड़क पर जमा हो गया है तो कहीं नाला क्षतिग्रस्त पड़ा है. शहर के लक्ष्मीपुर मोहल्ला में नाला का गंदा पानी सड़कों पर सालों से रहने के कारण उससे लोगोें के बीमार होने का खतरा अलग सता रही है. नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि अभी बोर्ड गठन नहीं होने से भी परेशानी हो रही है. नाला से होने वाले जलजमाव के परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. शहर के गोविंदपुरी मोहल्ला में नाले का पानी सड़क पर बह रहा है, लेकिन धरातल स्थिति में कोई देखने वाला नहीं है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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