ठंड की मार से कांपा मधेपुरा, पछुआ हवा से बढ़ी कनकनी

कानदारों, राहगीरों और मजदूरों के लिए अलाव ही फिलहाल ठंड से राहत का प्रमुख साधन बना हुआ है.
मधेपुरा जिले में गुरुवार देर शाम से पछुआ हवा के साथ तापमान में आई गिरावट ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. मधेपुरा में अधिकतम 20 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री दर्ज किया गया है. मौसम के जानकार के अनुसार अभी तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी. शुक्रवार को सुबह और शाम के समय ठंड का असर सबसे अधिक देखा गया. कड़ाके की ठंड और सर्द हवा के कारण लोग घरों से निकलने से बचते नजर आए. शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक ठंड का समान असर देखने को मिला, जिससे जनजीवन की रफ्तार धीमी पड़ गई है. -चौक-चौराहों पर अलाव ही सहारा- कड़ाके की ठंड से बचाव के लिए शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजार इलाकों, बस स्टैंड एवं सड़क किनारे लोग अलाव जलाकर खुद को गर्म करते दिखे. कई स्थानों पर लोग कुर्सी या ईंट लगाकर अलाव के पास बैठकर हाथ सेंकते नजर आए. दुकानदारों, राहगीरों और मजदूरों के लिए अलाव ही फिलहाल ठंड से राहत का प्रमुख साधन बना हुआ है. हालांकि यह व्यवस्था पूरी तरह लोगों की अपनी पहल पर निर्भर है. -गरीब और मजदूर वर्ग पर सबसे ज्यादा मार- ठंड का सबसे ज्यादा असर रिक्शा चालक, ठेला चालक, दिहाड़ी मजदूर, फुटपाथ पर रहने वाले लोग, बुजुर्ग और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ा है. रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों के लिए ठंड दोहरी मार साबित हो रही है. एक ओर ठंड के कारण काम के अवसर कम हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ठंड से बचाव के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं. कई मजदूर सुबह काम पर निकलने से पहले लंबे समय तक अलाव के पास बैठे रहने को मजबूर हैं. -कोहरे से यातायात और बाजार प्रभावित- सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने से सड़कों पर दृश्यता काफी कम हो जा रही है. इसके कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है. कई जगहों पर वाहनों की रफ्तार धीमी होने से जाम की स्थिति भी बन रही है. कोहरे और ठंड का असर बाजारों पर भी पड़ा है. सुबह के समय बाजारों में अपेक्षाकृत कम भीड़ देखी जा रही है. -अलाव और कंबल व्यवस्था नाकाफी- स्थानीय लोगों का कहना है कि ठंड लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन नगर परिषद या जिला प्रशासन की ओर से सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है. मजबूरी में लोग लकड़ी, कचरा और प्लास्टिक जलाकर ठंड से बचाव कर रहे हैं, जिससे आग लगने और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि नगर परिषद द्वारा कंबल वितरण की व्यवस्था सिर्फ चुनिंदा इलाकों तक सीमित न रहकर नगर क्षेत्र के सभी वार्डों में समान रूप से की जानी चाहिए, ताकि कोई भी जरूरतमंद ठंड में असहाय न रहे. -ठंड का किसानों पर असर- मौजूदा ठंड का असर किसानों और रबी फसलों पर साफ दिखाई देने लगा है. लगातार गिरते तापमान और कोहरे से फसलों की बढ़वार धीमी हो जाती है. आलू, सरसों, दाल और सब्जी जैसी फसलें ठंड से अधिक प्रभावित होती हैं, जिससे पैदावार घटने की आशंका रहती है. अत्यधिक ठंड या पाला पड़ने से पत्तियां झुलस सकती हैं और पौधों को नुकसान पहुंच सकता है. पशुपालक किसानों को भी परेशानी होती है, क्योंकि ठंड में दूध उत्पादन घट सकता है. हालांकि गेहूं जैसी फसलों के लिए हल्की ठंड लाभकारी मानी जाती है. -गर्म कपड़ों के बाजार में तेजी- ठंड बढ़ते ही गर्म कपड़ों के बाजार में रौनक लौट आई है. स्वेटर, जैकेट, मफलर, टोपी, दस्ताने और कंबलों की मांग में अचानक इजाफा हुआ है. शहर के प्रमुख बाजारों और फुटपाथ दुकानों पर खरीदारों की भीड़ देखी जा रही है. खासकर सुबह और शाम के समय ऊनी कपड़ों की खरीदारी अधिक हो रही है. मध्यम और गरीब वर्ग सस्ते गर्म कपड़ों की ओर रुख कर रहा है, जबकि रेडीमेड दुकानों में जैकेट और स्वेटशर्ट की बिक्री बढ़ी है. ठंड के इस मौसम से छोटे दुकानदारों को अच्छी आमदनी की उम्मीद जगी है. -चिकित्सकों की सलाह और प्रशासन से मांग- चिकित्सकों के अनुसार अत्यधिक ठंड के कारण सर्दी, खांसी, बुखार, दमा और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. चिकित्सकों ने लोगों को गर्म कपड़े पहनने, सिर और कान ढककर रखने, गर्म तरल पदार्थ लेने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है. इधर, बढ़ते ठंड को देखते हुए लोगों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि प्रमुख चौक-चौराहों, अस्पतालों के आसपास, बस स्टैंड, गरीब बस्तियों में अलाव की तत्काल व्यवस्था की जाए और सभी वार्डों में कंबल वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि जरूरतमंदों को ठंड से राहत मिल सके. … नगर परिषद क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरण की प्रक्रिया शुरू है, जल्द ही वितरण की जाएगी. तान्या कुमारी, कार्यपालक पदाधिकारी, नप, मधेपुरा
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